पुलिस थानों में CCTV कैमरे लगवाने में देरी पर SC की फटकार, राज्यों से कहा- अप्रूवल की बातें ना बताएं

कोर्ट ने कहा कि हमें इस्टिमेट और अप्रूवल की बातें न बताएं. हमारी इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है. ये पुलिस थानों में सीसीटीवी लगाने का मामला तो जनता की सुरक्षा से जुड़ा है. अब राज्य सरकारें कैबिनेट अप्रूवल जैसी दलीलें दे रही हैं लेकिन पिछले कई साल में हमारे आदेश के अनुपालन से इनकार ही कर रही हैं.

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सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को फटकार लगाई. (फाइल फोटो) सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को फटकार लगाई. (फाइल फोटो)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 02 मार्च 2021,
  • अपडेटेड 6:35 PM IST
  • सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को लगाई फटकार
  • कहा- ये लोगों की सुरक्षा से जुड़ा मामला
  • राज्य को जल्द सीसीटीवी कैमरे लगवाने के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों से पुलिस थानों में लगाए गए सीसीटीवी कैमरों पर कब कितनी रकम खर्च की गई, इसका ब्योरा तलब किया है. 'अमाइकस क्यूरी' की रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने ये आदेश जारी किया है. रिपोर्ट के मुताबिक पिछले डेढ़ साल में हरियाणा और तेलंगाना ने इस पर एक पैसा भी खर्च नहीं किया है. कोर्ट ने हरियाणा और तेलंगाना सरकार से इसका बजट तय कर पिछले आदेश पर अमल कर चार महीने में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है.

रिपोर्ट के मुताबिक कर्नाटक के 1054 पुलिस थानों में से अधिकतर में सीसीटीवी लगाए गए हैं. बाकी साल के अंत तक सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पूरा अमल हो जाने का भरोसा राज्य सरकार ने दिया. कोर्ट ने साफ कहा कि वो अब राज्यों को और ज्यादा मोहलत देने के पक्ष में नहीं है.

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कोर्ट ने कहा कि हमें इस्टिमेट और अप्रूवल की बातें न बताएं. हमारी इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है. ये पुलिस थानों में सीसीटीवी लगाने का मामला तो जनता की सुरक्षा से जुड़ा है. अब राज्य सरकारें कैबिनेट अप्रूवल जैसी दलीलें दे रही हैं लेकिन पिछले कई साल में हमारे आदेश के अनुपालन से इनकार ही कर रही हैं.

अमाइकस ने रिपोर्ट में यूपी के बारे में कहा है कि वहां तीन साल बर्बाद हो गए, अब और तीन साल इनको चाहिए. यूपी के वकील ने कहा को हमने अगले तीन साल के लिए चरणबद्ध तरीके से हर एक थाने में सीसीटीवी कैमरे लगाने का टारगेट और बजट तय कर लिया है. 

इस पर कोर्ट ने यूपी सरकार के हलफनामे की आलोचना करते हुए कहा कि हमने उसे पढ़ा है लेकिन उसमें हमारे सवाल, जिज्ञासा और समाधान का कोई जिक्र नहीं है. तीन साल की मोहलत तो बहुत ज्यादा है. हम बजट तय होने के बाद ज्यादा से ज्यादा छह महीने दे सकते हैं. 

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कोर्ट को हिमाचल प्रदेश के हलफनामे में भी कोई विवरण नहीं मिला. बजट का जिक्र तो है लेकिन समय का जिक्र नहीं. हिमाचल ने विस्तृत विवरण प्रस्तुत करने के लिए चार हफ्ते की मोहलत मांगी. कोर्ट ने ये मांग ठुकराते हुए हरियाणा वाली समय सीमा ही तय की.

गुजरात की प्रस्तुति अपेक्षाकृत ठीक रही. लेकिन बचे हुए 122 थानों में सीसीटीवी लगाने के लिए डेढ़ साल मांगे जो कोर्ट ने नहीं दिए. कहा जी हरियाणा वाली टाइम लाइन पर ही करें. मध्य प्रदेश ने भी सभी 1127 थानों में कैमरे लगाने के लिए 2023 तक टाइम मांगा लेकिन कोर्ट ने बजट तय करने को दो महीने और अमल के लिए और छह महीने दिए. 

महाराष्ट्र को जब कोर्ट ने कहा कि आपने भी कुछ नहीं किया तो राज्य के वकील ने कहा हमने कर दिया और हलफनामा भी दिया है. मार्च आखिर तक राज्य के सभी 1174 थानों में सीसीटीवी कैमरे लग जाएंगे. लेकिन कोर्ट ने वकील की दलील से असंतोष जताते हुए राज्य सरकार के सचिव से छह हफ्तों में इसे पूरा करने का हलफनामा मांगा. 

बिहार को भी लापरवाही के लिए डांट पड़ी. हलफनामे में कोई बजट और टाइम लाइन न होने से नाराज़ कोर्ट ने पूछा आप अब तक कर क्या रहे थे? अगर आप हमारे आदेश पर तेजी से अमल नहीं करेंगे तो हम आपके सचिव को कोर्ट की अवमानना का नोटिस भेजकर कार्रवाई करेंगे. आप तीन महीने में बजट और अगले नौ महीने में राज्य के हरेक थाने में सीसीटीवी लगवाइए. 

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अमाइकस रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम बंगाल ने तो पांच साल का एक्सटेंशन लेकर भी कुछ नहीं किया. वकील ने कहा चुनाव आ गए. कोर्ट ने कहा 30 जून तक बजट बनाएं और अगले छह महीनों में पूरा करें. केरल ने कहा कि 1200 थानों में काम हो गया है सिर्फ 523 थाने रह गए हैं. बजट तैयार है चुनाव बाद काम पूरा हो जाएगा. पंजाब ने कहा कि हमने सभी थानों में 2018 में ही कैमरे लगाए थे अब हम नाइट विजन कैमरे लगाने वाले हैं.

 

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