सुप्रीम कोर्ट की चुनाव आयोग को फटकार, अखबारों में छप गया, लेकिन हमें हलफनामा नहीं मिला

चुनाव में मुफ्त सुविधाओं का वायदा करने वाली राजनीतिक पार्टियों की मान्यता रद्द करने की मांग वाली अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल गई है. अब इस मामले पर 17 अगस्त को सुनवाई होगी. आज शीर्ष अदालत ने निर्वाचन आयोग से पूछा कि क्या सभी राजनीतिक पार्टी चुनाव से पहले अपना मेनिफेस्टो आपको देती हैं?

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फाइल फोटो फाइल फोटो

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 11 अगस्त 2022,
  • अपडेटेड 1:56 PM IST

चुनाव में मुफ्त सुविधाओं का वायदा करने वाली राजनीतिक पार्टियों की मान्यता रद्द करने की मांग वाली अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल गई है. अब इस मामले में अगली सुनवाई 17 अगस्त को होगी. शीर्ष अदालत ने निर्वाचन आयोग से पूछा है कि सभी राजनीतिक पार्टी चुनाव से पहले अपना मेनिफेस्टो आपको देती हैं?

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को फटकार भी लगाई है. कोर्ट ने कहा कि हमें हलफनामा नहीं मिलता, लेकिन वो अखबारों को मिल जाता है और वहां छप भी जाता है. हमने आज हलफनामा न्यूज पेपर में पढ़ भी लिया है.

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राजनीतिक पार्टियों द्वारा मुफ्त योजनाओं के ऐलान के खिलाप बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में जो याचिका दायर की है, उसमें कहा गया है कि इससे देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान होता है. इसको लेकर जब कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा तो आयोग ने बताया कि फ्री योजनाओं को लेकर कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं है. इसके साथ ही EC ने कोर्ट से कहा कि इसको लेकर एक कमेटी बना दी जाए, लेकिन हमें उस कमेटी से दूर रखा जाए क्योंकि हम एक संवैधानिक संस्था हैं. 

सुप्रीम कोर्ट ने ईसी को लगाई फटकार

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को फटकार भी लगाई. कोर्ट ने कहा कि आपका हलफनामा हमें नहीं मिला, लेकिन अखबारों तक पहुंच गया है. हम सुबह पढ़ अखबार में आपका हलफनामा पढ़ चुके हैं. बता दें कि चुनाव में फ्री योजनाओं को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्री रेवड़ी कल्चर कहा था. वहीं इसको लेकर आम आदमी पार्टी भी प्रधानमंत्री पर हमलावर है. आम आदमी पार्टी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा भी दायर किया गया है, जिसमें उसे भी पक्षकार बनाए जाने की मांग की गई है. 

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CJI ने कहा- राजनीति से अलग रखें मुद्दा

सीजेआई ने कहा कि इस मामले पर किसी प्रकार का श्वेत पत्र होना चाहिए. बहस होनी चाहिए. अर्थव्यवस्था को धन की हानि हो रही है और लोगों का कल्याण, दोनों को संतुलित करना होगा. इसलिए हम कुछ समिति चाहते हैं. सीजेआई के प्रस्ताव पर कपिल सिब्बल सहमत हुए और उन्होंने कहा कि पेपर लाने के लिए थोड़ी मेहनत करनी पड़ेगी. इस दौरान सीजेआई ने कहा कि कृपया अगले सप्ताह रिटायरमेंट से पहले मुझे कुछ सुझाव दें. 
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हम मानते हैं कि यह मुद्दा बहुत महत्वपूर्ण है और इसे राजनीति से अलग रखा जाना चाहिए. हम इस मामले को अगले सप्ताह किसी समय रखेंगे और मेरी सेवानिवृत्ति से पहले तय करेंगे कि क्या किया जाना चाहिए. 

SG ने दिया कमेटी का प्रस्ताव 

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इसको लेकर कमेटी बनाने का प्रस्ताव दिया है. इनमें वित्त मंत्रालय के सचिव, राज्यों के वित्त मंत्रालयों के सचिव, राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक पार्टियों का एक-एक प्रतिनिधि, 15वें वित्त आयोग के चेयरमैन, आरबीआई के डिप्टी गवर्नर, नीति आयोग के सीईओ, चुनाव आयोग का प्रतिनिधि, उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि (FICC, CII), पावर सेक्टर के प्रतिनिधि, नेशनल टेक्सपेयर ऑर्गनाइजेशन के प्रतिनिधि और ऑडिटर जनरल ऑफ इंडिया इस कमेटी के सदस्य बनाए जा सकते हैं. 

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AAP को मामले में पक्षकार बनने की अनुमति मिली

वहीं चुनाव आयोग की ओर से पेश वकील मनिंदर सिंह ने पीठ से कहा कि हमने 2004, 13 और 16 में सिफारिशें दी थी. हमने हलफनामे में राजनीतिक दलों के गैर-पंजीकरण पर उल्लेख किया था. इस पर सीजेआई ने कहा कि मैं मान्यता रद्द करने की जांच नहीं करूंगा. यह अलोकतांत्रिक है. मैं राजनीतिक दल और सभी के अपंजीकरण से निपटना नहीं चाहता. वहीं अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आम आदमी पार्टी को पक्षकार बना लिया है. अब इस मामले में 17 अगस्त को अगली सुनवाई होगी. 
 

 

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