आसाराम के आश्रम को सुप्रीम कोर्ट से राहत, बुलडोजर कार्रवाई पर लगी रोक, जानें पूरा मामला

गुजरात में आसाराम ट्रस्ट से जुड़ी लगभग 45,000 वर्ग मीटर भूमि को अपने कब्जे में लेने की राज्य सरकार की प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट ने अस्थायी रोक लगा दी है. शीर्ष अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अहमदाबाद स्थित आश्रम परिसर की जमीन या उससे संबंधित संपत्तियों पर फिलहाल कोई सख्त प्रशासनिक कदम नहीं उठाया जाएगा. इस विवाद पर आगे की सुनवाई 5 मई को निर्धारित की गई है.

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SC से चार सप्ताह की रोक की मांग की गई थी. Photo ITG SC से चार सप्ताह की रोक की मांग की गई थी. Photo ITG

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 27 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 6:27 PM IST

गुजरात में आसाराम ट्रस्ट से जुड़ी 45,000 वर्ग मीटर जमीन के विवाद में सुप्रीम कोर्ट से ट्रस्ट को फिलहाल राहत मिल गई है. विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए गुजरात सरकार की कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है.

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अहमदाबाद स्थित आश्रम की जमीन और उससे जुड़ी संपत्तियों के खिलाफ कोई कठोर कदम न उठाया जाए और यथास्थिति बनाए रखी जाए. इस मामले की अगली सुनवाई 5 मई को होगी.

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आश्रम की अपील खारिज हुई थी
यह विवाद 45,000 वर्ग मीटर सार्वजनिक भूमि से जुड़ा है, जिस पर कानूनों के उल्लंघन और अवैध कब्जे के आरोप लगे हैं. गुजरात हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पहले एकल जज के फैसले को बरकरार रखते हुए आश्रम की अपील खारिज कर दी थी. साथ ही अवैध निर्माण को ध्वस्त करने और जमीन खाली कराने का आदेश दिया था.

हाईकोर्ट ने माना था कि ट्रस्ट ने सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जा किया और संबंधित कानूनों का उल्लंघन किया. अदालत ने ट्रस्ट को इस मामले में 'आदतन अपराधी' तक करार दिया था. विवादित जमीन साबरमती नदी के किनारे स्थित है. राज्य सरकार इसे खेल अधोसंरचना परियोजना, संभावित 2030 कॉमनवेल्थ खेलों या स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के लिए उपयोग में लाना चाहती है.

हालांकि सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद फिलहाल जमीन पर कोई प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होगी और मामले पर अंतिम फैसला अगली सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा.

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चार सप्ताह की रोक की मांग थी
सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने के लिए आश्रम प्रबंधन ने हाईकोर्ट से चार सप्ताह की रोक की मांग की थी, ताकि उसे आगे कानूनी विकल्प अपनाने का समय मिल सके. लेकिन हाईकोर्ट ने साफ किया कि किसी भी तरह की अंतरिम राहत तभी संभव होगी, जब आश्रम प्रशासन लिखित रूप में यह भरोसा दे कि वह संबंधित जमीन खाली करेगा. चूंकि ऐसा कोई शपथपत्र प्रस्तुत नहीं किया गया, इसलिए अदालत ने रोक देने से इनकार कर दिया.

45 साल पुराना आश्रम
साबरमती नदी के तट पर स्थित यह आश्रम लगभग 45 साल पुराना बताया जाता है. वर्षों से यह स्थान धार्मिक गतिविधियों का केंद्र रहा है, लेकिन जमीन आवंटन की शर्तों के उल्लंघन के आरोपों के बाद मामला विवादों में घिर गया. जिला प्रशासन, विशेषकर कलेक्टर स्तर से पहले ही यह निष्कर्ष सामने आया था कि आश्रम ने निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया. उसी के बाद से यह कानूनी लड़ाई लगातार जारी है.

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