भौगोलिक परिस्थितियां, खराब मौसम और हर पल खतरा... चुनाव के बीच आतंकी घुसपैठ रोकने के लिए LoC पर मुस्तैद हैं सुरक्षाकर्मी

रूख़ी-पथरीली पहाड़ियां और घने जंगल, इन दुर्गम स्थानों पर भारतीय सेना के जवान आतंकियों की घुसपैठ रोकने के लिए हर संभव कोशिश में जुटे हुए हैं. यहां की भौगोलिक परिस्थितियां दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण जगहों में से एक हैं. लेकिन, यहां की कठिनाइयां केवल प्रकृति से ही नहीं हैं, बल्कि सीमापार से होने वाली आतंकवाद की गतिविधियों से भी हैं.

Advertisement
जम्मू-कश्मीर में एलओसी पर मुस्तैद हैं जवान (फाइल फोटो) जम्मू-कश्मीर में एलओसी पर मुस्तैद हैं जवान (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 सितंबर 2024,
  • अपडेटेड 6:46 AM IST

पीर पंजाल रेंज के दक्षिण में हाल के महीनों में आतंकियों की घुसपैठ की कोशिशें लगातार बढ़ी हैं. इस बीच आजतक ने एलओसी के पास भारतीय सेना की एक अग्रिम चौकी का जायजा लिया, जहां से पाकिस्तान के साथ सटी सीमा पर नजर रखी जा रही है. इस पोस्ट पर सेना की एक मजबूत और अत्याधुनिक सुरक्षा व्यवस्था मौजूद है, जिसमें निगरानी उपकरण, मोशन सेंसर और आधुनिक हथियार शामिल हैं. इन कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और मौसम की चुनौतियों के बीच भारतीय सेना के जवान अपने अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा के साथ देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं.

Advertisement

कठिन परिस्थितियों में डटे जवान

रूख़ी-पथरीली पहाड़ियां और घने जंगल, इन दुर्गम स्थानों पर भारतीय सेना के जवान आतंकियों की घुसपैठ रोकने के लिए हर संभव कोशिश में जुटे हुए हैं. यहां की भौगोलिक परिस्थितियां दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण जगहों में से एक हैं. लेकिन, यहां की कठिनाइयां केवल प्रकृति से ही नहीं हैं, बल्कि सीमापार से होने वाली आतंकवाद की गतिविधियों से भी हैं. भारतीय सेना की बहुस्तरीय रक्षा प्रणाली में अत्याधुनिक उपकरण, थर्मल इमेजर्स और नाइट विजन कैमरे शामिल हैं, जो लगातार सीमा पर किसी भी गतिविधि पर नज़र बनाए रखते हैं.

खराब मौसम के बावजूद जवान सतर्क
भले ही मौसम कितना भी खराब हो, चाहे कड़ाके की ठंड हो या मूसलधार बारिश, भारतीय सेना के जवान हर पल सतर्क रहते हैं. सीमा पर तैनात ये जवान सुनिश्चित करते हैं कि कोई भी आतंकवादी भारतीय सीमा में घुसपैठ न कर सके. एलओसी पर लगी बाड़ और अन्य सुरक्षा उपायों के साथ-साथ जवानों का साहस और कर्तव्यनिष्ठा ही है जो देश को सुरक्षित बनाए रखता है.
एलओसी के इस इलाके में मौसम बेहद खराब है, और जमीन ऊबड़-खाबड़ भी है. यहां पर सेना को गश्त के दौरान कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. सेना के अधिकारी बताते हैं कि दुर्गम इलाकों में काम करना बेहद चुनौतीपूर्ण है, लेकिन जवानों का हौसला और उनकी ट्रेनिंग उन्हें हर कठिनाई से पार पाने में सक्षम बनाती है.

Advertisement

भारतीय सेना को एलओसी पर सुरक्षा के लिए केवल मैन पावर पर ही निर्भर नहीं रहना है. यहां नवीनतम तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. सेना के एंटी-इन्फिल्ट्रेशन ग्रिड में अत्याधुनिक निगरानी प्रणाली, ड्रोन, मोशन सेंसर और अन्य उपकरण शामिल हैं. ये तकनीक घुसपैठ की कोशिशों को सटीकता से पहचानने और तुरंत कार्रवाई करने में मदद करती है. लेकिन, इन तकनीकी उपायों के साथ ही जवानों का साहस और उनकी सतर्कता ही इस सुरक्षा प्रणाली को प्रभावी बनाते हैं.

फॉरवर्ड पोस्ट और आतंकवादी चुनौतियाँ

जब आजतक ने एलओसी पर सेना की सबसे अग्रिम चौकी का दौरा किया, तो यहां की कठोर जीवनशैली की वास्तविकता का अनुभव हुआ. सीमा पर जवान आतंकियों की लगातार घुसपैठ की कोशिशों का सामना कर रहे हैं. यहां की भौगोलिक परिस्थितियां, क्रूर मौसम के साथ खतरा हमेशा बना रहता है. फिर भी, भारतीय सेना हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है. जवानों की साहसिक कार्यवाही और उनकी प्रतिबद्धता के कारण ही आतंकवादी घुसपैठ की कोशिशें विफल हो रही हैं.

पाकिस्तान की तरफ से बढ़ती चुनौतियां

पीर पंजाल रेंज के दक्षिणी क्षेत्र में हाल के दिनों में आतंकवादी गतिविधियों में वृद्धि हुई है. पाकिस्तान की ओर से ड्रोन का इस्तेमाल कर अवैध हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी की कोशिशें की जा रही हैं. हालांकि, इन सभी चुनौतियों के बावजूद भारतीय सेना के जवान दिन-रात कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं. सेना का बहु-स्तरीय सुरक्षा ढांचा, जिसमें आधुनिक तकनीक और वास्तविक समय की खुफिया जानकारी शामिल है, एक मजबूत रक्षा तंत्र प्रदान करता है. हाल ही में सेना ने अपने निगरानी तंत्र में ड्रोन (क्वाडकॉप्टर) को शामिल किया है, जो संवेदनशील इलाकों में सड़कें खोलने और अन्य निगरानी कार्यों में उपयोग किए जा रहे हैं.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement