IMA का दावा- कोरोना के इलाज के लिए कोरोनिल को मंजूरी नहीं मिली, पतंजलि ने ये दिया जवाब

IMA ने RTI के जरिए ड्रग रेगुलेटर से कोरोनिल को लेकर जानकारी मांगी थी. जिस पर जवाब देते हुए DCGI ने कहा कि कोरोना के इलाज के लिए कोरोनिल को सर्टिफिकेट या मंजूरी नहीं दी गई है.

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बाबा रामदेव ने पिछले महीने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में कोरोनिल लॉन्च की थी. (फाइल फोटो-PTI) बाबा रामदेव ने पिछले महीने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में कोरोनिल लॉन्च की थी. (फाइल फोटो-PTI)

मिलन शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 20 मार्च 2021,
  • अपडेटेड 5:48 PM IST
  • IMA का कहना है कि पतंजलि की कोरोनिल को DCGI ने मंजूरी नहीं दी
  • IMA के डॉक्टर का कहना है कि ये हमारे लिए खतरनाक हो सकती है
  • पतंजलि ने कहा कि कोरोनिल पर ऐसी टिप्पणी करने का ये सही समय नहीं है

योग गुरु बाबा रामदेव की कोरोना की दवा कोरोनिल को लेकर फिर एक नया विवाद खड़ा हो गया है. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने दावा किया है कि ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने पतंजलि की कोरोनिल को कोरोना की दवा के रूप में इस्तेमाल करने की मंजूरी नहीं दी है. ये जानकारी आरटीआई के जरिए सामने आई है.

आरटीआई में DCGI ने जवाब दिया है कि कोविड-19 के इलाज के लिए कोरोनिल के इस्तेमाल के लिए कोई सर्टिफिकेट या मंजूरी नहीं दी गई है. हालांकि, आयुष मंत्रालय से सलाह लेने के बाद WHO सर्टिफिकेशन के तहत, दिव्य फार्मेसी यूनिट (II), हरिद्वार को दिव्य कोरोनिल टैबलेट के लिए सर्टिफिकेट जरूर दिया गया है. 

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IMA ने एक बयान जारी कर बताया है कि जब सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) से RTI के जरिए सवाल पूछा गया तो वहां से यही जवाब मिला कि कोरोना के इलाज के लिए कोरोनिल को सर्टिफिकेट या मंजूरी नहीं दी गई है. IMA के डॉक्टर जेए जयलाल का कहना है कि 'कोरोना के इलाज के लिए इस दवा का इस्तेमाल नहीं कर सकते. ये हमारे देश के लिए खतरनाक हो सकता है.' RTI से जवाब मिलने के बाद IMA ने मांग की है कि कोरोना के इलाज के लिए उपयुक्त प्रोटोकॉल का पालन किया जाना चाहिए.

अब पतंजलि का क्या है कहना?

इसके बाद पतंजलि की तरफ से बयान जारी किया गया है. इसमें पतंजलि ने कुछ फैक्ट बताए हैं. उसका कहना है कि 12 मार्च को CDSCO ने लेटर जारी किया था, जिसमें साफ लिखा था कि आयुष मंत्रालय से सलाह-मशविरा करने के बाद WHO सर्टिफिकेशन स्कीम के तहत दिव्य कोरोनिल टैबलेट को सर्टिफिकेट जारी किया गया था. इसी लेटर में CDSCO ने IMA को स्टेट लाइसेंसिंग अथॉरिटी (SLA) से संपर्क करने का निर्देश भी दिया था. SLA ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक एक्ट, 1940 और नियम 1945 के तहत देश में आयुर्वेदिक दवाओं की मैनुफैक्चरिंग और बिक्री के लिए लाइसेंस देता है. लेकिन इसके बाद भी IMA ने 19 मार्च को कहा कि कोरोना के  इलाज के लिए कोरोनिल के इस्तेमाल को मंजूरी नहीं मिली है.

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पतंजलि ने IMA को दी नसीहत

इस पूरे विवाद पर पतंजलि ने IMA को नसीहत भी दी है. पतंजलि ने कहा है कि देश में कोरोना की दूसरी लहर का खतरा बढ़ रहा है, ऐसे में IMA को इसे रोकने के उपायों पर काम करना चाहिए, ताकि एक साल पहले जैसी स्थिति न बने. हालांकि, ये साफ है कि IMA के अधिकारी कोरोना के खिलाफ लड़ाई को कमजोर करने का काम कर रहे हैं. पतंजलि का कहना है कि IMA ने एक बार फिर से कोरोनिल को लेकर अतार्किक टिप्पणी की है. 

पतंजलि ने कहा कि हम वैक्सीनेशन के खिलाफ नहीं हैं. ऐसे समय में जब दुनिया एक महामारी से जूझ रही है, तब इसे रोकने के लिए जो भी जरूरी है, वो करना चाहिए. इसलिए IMA को सुझाव दिया जाता है कि वो जनता को गुमराह न करे. कोरोनिल को लेकर ऐसी बातें करने का ये सही समय नहीं है.

 

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