घुटनों में दर्द और आठ साल की बच्ची की चिट्ठी, राहुल ने सुनाया किस्सा

राहुल गांधी ने किस्सा सुनाते हुए कहा कि जब मैं यात्रा पर निकला था तो मेरे घुटनों में दर्द था. उन्होंने कहा, हर रोज मैं 8-10 किलोमीटर चलता था तो सोचता था कि मैं 20-25 किलोमीटर चल सकता हूं. मुझे अहंकार था, लेकिन भारत अहंकार को सेकेंड में मिटा देता है.

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लोकसभा में बोलते हुए राहुल गांधी लोकसभा में बोलते हुए राहुल गांधी

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 अगस्त 2023,
  • अपडेटेड 1:22 PM IST

लोकसभा में मोदी सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान बोलते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा से जुड़ा किस्सा सुनाया. उन्होंने कहा कि जब मैंने यात्रा शुरू की थी तो लोग मुझसे जब पूछते थे कि कन्याकुमारी से कश्मीर तक क्यों जा रहे हो? उस समय मुझे ही नहीं मालूम था कि मैं यात्रा क्यों कर रहा हूं. इसके साथ ही उन्होंने आठ साल की बच्ची से जुड़ा किस्सा भी सुनाया.  

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राहुल गांधी ने किस्सा सुनाते हुए कहा कि जब मैं यात्रा पर निकला था तो मेरे घुटनों में दर्द था. उन्होंने कहा, हर रोज मैं 8-10 किलोमीटर चलता था. तो सोचता था कि मैं 20-25 किलोमीटर चल सकता हूं. मुझे अहंकार था, लेकिन भारत अहंकार को सेकेंड में मिटा देता है. दो तीन दिन में ही मेरे घुटनों में इतना दर्द हुआ कि मेरा अहंकार निकल गया. भेड़िया जो निकला था, वो चीटी बन गया. जो हिंदुस्तान को अहंकार से देखने निकला था वो अहंकार गायब हो गया.  

एक दिन छोटी से बच्ची मेरे पास आई उसने मुझे चिट्ठी दी. वह 8 साल की थी. उसमें लिखा था कि डॉन्ट वरी राहुल, आई एम वॉकिंग विद यू. उसने मेरे पैर में चोट देखी और अपनी शक्ति मुझे दे दी. उसने ही नहीं लाखों लोगों ने मुझे शक्ति दी.   

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उन्होंने कहा, मैं लोगों को जानना चाहता था, उन्हें समझना चाहता था. थोड़ी देर में मुझे बात समझ आने लगी. जिस चीज के लिए मैं मरने को तैयार हूं, जिस चीज के लिए मोदी जी की जेलों में जाने के लिए तैयार हूं. जिस चीज के लिए मैंने हर रोज गाली खाई. उस चीज को समझना चाहता था. ये है क्या? जिसने मेरे दिल को इतनी मजबूती से पकड़ रखा था, उसे समझना चाहता था. 

राहुल ने कहा, मेरे दिल में जो बोलने की इच्छी थी वो खत्म हो गई और एक सन्नाटा सा छा गया. भीड़ की आवाज थी भारत जोड़ो, भारत जोड़ो, भारत जोड़ो. उसके बाद जो मुझसे बात करता था मैं उसकी आवाज सुनता गया. हर सुबह छह बजे से रात 7-8 बजे तक हर आदमी गरीब, अमीर, किसान मजदूर, सबकी आवाज. मेरे पास एक किसान आया और उसने हाथ में रुई पकड़ी हुई थी. उसने कहा कि मेरी आंख में देखकर उसने मुझे रुई का बंडल दिया. कहा कि राहुल जी यही बचा है मेरे खेत का और कुछ बचा नहीं है. 

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कांग्रेस नेता ने कहा कि मैंने उसको पूछा कि आपको बीमा का पैसा मिला. किसान ने हाथ पकड़कर कहा कि मुझे बीमा का पैसा नहीं मिला. हिंदुस्तान के बड़े उद्योगपतियों ने मुझसे छीन लिया. इस बार बड़ी अजीब चीज हुई जब मैंने किसान को देखा और वो मुझसे बोल रहा था जो उसके दिल में दर्द था, वो मेरे दिल में आया. जो आंखों में शर्म थी, जब वो अपनी पत्नी से बात करता था, वो मुझे आई. उसके बाद यात्रा बिलकुल बदल गई, मुझे भीड़ की आवाज नहीं सुनाई देती थी. मुझे सिर्फ उसकी बात सुनाई देती थी जो मुझसे बात करता था. 

वायनाड सांसद ने कहा कि लोग कहते हैं कि ये देश है. कोई कहता है अलग-अलग भाषाएं हैं. कोई कहता है जमीन है मिट्टी है. कोई कहता है धर्म है. ये सोना है. ये चांदी है, मगर सच्चाई है कि ये देश एक आवाज है. अगर हमें इस आवाज को सुनना है तो हमारे दिल में जो अहंकार है, जो सपने हैं, उनके परे करना पड़ेगा. तब हमें हिंदुस्तान की आवाज सुनाई देगी. 

 

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