पंजाबः वोटिंग में सिर्फ 3 दिन पहले डेरा ब्यास प्रमुख से मिले अमित शाह, क्या हैं इसके सियासी मायने

Punjab Assembly Elections 2022: पंजाब दौरे पर पहुंचे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह डेरा राधा स्वामी ब्यास पहुंचे. राधा स्वामी सत्संग के प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों से मुलाकात की.

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राधा स्वामी डेरा के प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह के साथ अमित शाह राधा स्वामी डेरा के प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह के साथ अमित शाह

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 17 फरवरी 2022,
  • अपडेटेड 10:00 AM IST
  • 20 फरवरी को है पंजाब में वोटिंग
  • पंजाब चुनाव में है डेरों का अहम रोल

पंजाब में विधानसभा चुनाव (Punjab Assembly Elections 2022) के लिए वोटिंग होने में महज सिर्फ 3 दिन बाकी है. वोटिंग से कुछ समय पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah) ने डेरा ब्यास स्थित राधा स्वामी डेरा के प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों से मुलाकात की है. दोनों की यह बैठक लगभग एक घंटा तक चली. हालांकि राधा स्वामी डेरा के प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह और अमित शाह के बीच क्या बातचीत हुई इसका खुलासा नहीं हुआ है. 

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इस मुलाकात के बाद अमित शाह ने तस्वीर शेयर करते हुए ट्वीट किया, 'राधा स्वामी डेरा प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों से सत्संग ब्यास में मुलाकात हुई. राधा स्वामी सत्संग ब्यास लगातार कई दशकों से समाज में आध्यात्मिक चेतना जगाकर मानवता और समाज सेवा के लिए कार्य कर रहा है. यह अपने आप में अद्भुत और प्रेरणादायी है.'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी की थी मुलाकात

इससे पहले रविवार को नई दिल्ली में पंजाब के ब्यास स्थित राधा स्वामी सत्संग डेरा के प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों से पीएम नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने मुलाकात की थी. पीएम ने यह मुलाकात पंजाब में रैली से एक दिन पहले की थी. जिसके बाद सियासी गलियारों में इसकी खूब चर्चा हुई थी.

डेरा प्रमुख से मुलाकात के राजनीतिक मायने

पीएम मोदी और अमित शाह डेरा प्रमुखों से मुलाकात क्यों कर रहे हैं, इसका खुलासा तो नहीं हुआ है. लेकिन इन मुलाकातों के सियासी मायने भी हैं. दरअसल, पंजाब में राधा स्वामी डेरे का मजबूत आधार है. पंजाब के अलावा दूसरे कई राज्यों में भी डेरे के अनुयायी हैं. डेरा ब्यास के अनुयायी कई सीटों पर चुनाव परिणाम को प्रभावित करने की ताकत रखते हैं. साल 1891 में बाबा जैमल सिंह ने डेरा ब्यास की स्थापना की थी. 

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डेरा जमीनी स्तर पर जुड़ा है और अभी तक सियासत से दूर रहा है. डेरे में खुले तौर पर कभी राजनीति की बात नहीं होती और न घोषणाएं होती हैं. सियासी मजबूती ही कारण है कि मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi) भी सीएम बनने के बाद दो बार डेरा ब्यास जा चुके हैं. अकाली नेता बिक्रम मजीठिया का भी यहां आना-जाना लगा रहता है.

पंजाब चुनाव पर प्रभाव डाल सकते हैं 6 डेरे 

पंजाब में 6 ऐसे डेरे हैं, जिनके न सिर्फ लाखों-करोड़ों लोग अनुयायी हैं बल्कि इनका राजनीति रसूख भी है. पंजाब में एक चौथाई आबादी किसी न किसी डेरे से ताल्लुक रखती है.  ये डेरे हैं- डेरा सच्चा सौदा, राधा स्वामी सत्संग ब्यास, नूरमहल डेरा (दिव्य ज्योति जागृति संस्थान), संत निरंकारी मिशन, नामधारी संप्रदाय और डेरा सचखंड बल्लां. ये डेरे बेहद प्रभावशाली हैं और चुनाव के दौरान 68 विधानसभा क्षेत्रों में अपना असर रखते हैं. हालांकि, पिछले चुनावों से एक सबक सीखते हुए डेरे (धार्मिक संप्रदाय) इस बार किसी विशेष पार्टी के पक्ष में खुलकर बोलने से बच रहे हैं. 

राम रहीम को भी मिली जेल से रिहाई

पंजाब चुनाव में डेरा का कितना अहम रोल इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वोटिंग से कुछ दिन पहले ही रेप और मर्डर केस में सजा काट रहे राम रहीम को 21 दिनों की पैरोल मिली है. हालांकि अब तक किसी भी पार्टी के राजनेता ने राम रहीम से मुलाकात नहीं की है.

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