बदल गया PMO का पता... पीएम मोदी ने किया सेवातीर्थ का उद्घाटन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सेवा तीर्थ बिल्डिंग कॉम्पलेक्स का उद्घाटन किया, जहां से वे अपना नया कार्यालय संचालित करेंगे. इस कदम से देश के पॉवर सेंटर में बदलाव आएगा और प्रधानमंत्री कार्यालय की नई शुरुआत होगी.

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पीएम मोदी ने शुक्रवार को नए भवन 'सेवा तीर्थ' का अनावरण किया पीएम मोदी ने शुक्रवार को नए भवन 'सेवा तीर्थ' का अनावरण किया

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:58 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को सेवा तीर्थ का उद्घाटन किया. यानी आज से पीएम मोदी नए प्रधानमंत्री ऑफिस ‘सेवा तीर्थ’ में शिफ्ट होने जा रहे हैं. इस तरह शु्क्रवार से देश का पॉवर सेंटर बदल जाएगा. दोपहर करीब 1:30 बजे पीएम मोदी ने ‘सेवा तीर्थ’ बिल्डिंग कॉम्पलेक्स के नाम का अनावरण किया. 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ‘सेवा तीर्थ’ भवन परिसर का उद्घाटन किया. इस परिसर में ही अब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) और कैबिनेट सचिवालय शिफ्ट हो गए हैं. 2014 से मोदी सरकार ने लगातार कदम उठाए हैं ताकि भारत के औपनिवेशिक अतीत के प्रतीकों से हटकर आधुनिक, भारतीय नागरिकों की जनभावना के अनुसार शासन व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा सके.

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सरकार ने साउथ ब्लॉक  को  सेवा तीर्थ. सेंट्रल सचिवालय को कर्तव्य भवन, राजपथ को कर्तव्य पथ, रेस कोर्स रोड को लोक कल्याण मार्ग और राज भवन/राज निवास को लोक भवन/लोक निवास
में तब्दील किया है. ये बदलाव न केवल प्रतीकात्मक हैं, बल्कि यह प्रशासनिक कार्यों और सार्वजनिक सोच में नए नजरिए को भी सामने रखते हैं.
सेवा तीर्थ में क्या-क्या है शामिल

बता दें कि दशकों तक केंद्र सरकार के कई महत्वपूर्ण कार्यालय और मंत्रालय सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर स्थित जर्जर और बिखरे हुए भवनों से संचालित होते रहे. इस बिखराव के कारण कामकाज में कई बार दिक्कतों का सामना करना पड़ता था. आपस में संयोजन की कमी, बढ़ती रखरखाव लागत और कर्मचारियों के लिए जरूर वर्क एन्वायरमेंट नहीं मिल पा रहा था. नए कैंपस में इन समस्याओं का समाधान करते हुए प्रशासनिक कार्यों को आधुनिक और भविष्य की जरूरतों के मुताबिक सुविधाओं से लैस एक जगह-एक साथ और एक कैंपस में शामिल कर लिया है. 

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‘सेवा तीर्थ’ में प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय को एक ही परिसर में स्थान दिया गया है, जो पहले अलग-अलग स्थानों पर संचालित होते थे.

इस हो रहे बदलाव में जो सबसे बड़ी बात है, उसे इस नजरिए से देखना चाहिए कि, सेवा तीर्थ-कर्तव्य भवन और नॉर्थ-साउथ ब्लॉक इन दोनों के बीच अंतर सिर्फ 'दो युगों' का नहीं बल्कि सत्ता के नजरिये, वर्क कल्चर और वास्तु-प्रभाव का भी है.

1910 से 1930 के बीच बने नॉर्थ और साउथ ब्लॉक की अपनी खूबी और खूबसूरती रही. ऊंचा प्लिंथ, विशाल स्तंभ, गुंबद, मेहराब और लाल-बफ सैंडस्टोन का उपयोग, ये उस दौर की भव्यता का प्रतीक तो थे ही, साथ ही इनमें ब्रिटिश साम्राज्यवाद की झलक भी थी. ये एक तरीके का अनकहा बंटवारा था. जो आम और खास के बीच फर्क को सामने लाता था. 

क्या होगा खास?
कर्तव्य भवन-1 और 2 बिल्डिंग में डिजिटल तकनीकों से लैस ऑफिस, जनता से सीधे संपर्क के लिए पब्लिक एरिया और सेंट्रलाइज्ड रिसेप्शन की व्यवस्था है. सरकार का कहना है कि इससे मंत्रालयों के बीच तालमेल, कामकाज की स्पीड और लोगों की भागीदारी बेहतर होगी. बिल्डिंग्स को 4-स्टार GRIHA मानकों के अनुसार डिजाइन किया गया है. इनमें रिन्यूएबल एनर्जी सिस्टम, वाटर कन्जर्वेशन सिस्टम, वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम और एनर्जी एफिशिएंट कंस्ट्रक्शन टेक्निक्स का इस्तेमाल किया गया है.

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इनसे पर्यावरण पर असर कम पड़ेगा और कामकाज की क्वालिटी बढ़ेगी. इन कैंपस में स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल सिस्टम, सर्विलांस नेटवर्क और एडवांस एमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम जैसी सुरक्षा सुविधाएं भी शामिल हैं. इससे अधिकारियों और विजिटर्स के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित मौहाल रहेगा.

इन भवनों का वास्तु-दर्शन औपनिवेशिक भव्यता से अलग है. यहां सादगी, पारदर्शिता और वर्क एफिशिएंसी पर जोर है. open-plan offices और ओपन स्पेस मॉर्डर्न प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं.

आधुनिक डिजाइन, भारतीय पहचान के साथ

नया प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) अब “ओपन फ्लोर” मॉडल पर बनाया गया है। यानी पहले की तरह बंद कमरों और ऊंची दीवारों वाला ढांचा नहीं है, जैसा साउथ ब्लॉक में था. अब यहां खुले और आपस में जुड़े कार्यक्षेत्र हैं, जिससे काम करना आसान और तेज़ हो सके. ऑफिस का माहौल सादा, साफ और आधुनिक है. इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि अधिकारी एक साथ बेहतर तालमेल से काम कर सकें.

प्रधानमंत्री के निजी कक्ष और बड़े बैठक कक्ष भी नए सिरे से तैयार किए गए हैं. यहां विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों के साथ महत्वपूर्ण बैठकों की सुविधा है. यह इमारत सिर्फ आधुनिक नहीं है, बल्कि इसमें भारत की हजारों साल पुरानी सांस्कृतिक विरासत की झलक भी दिखाई देती है. पारंपरिक भारतीय सौंदर्य को आधुनिक वास्तुकला के साथ मिलाकर इसे ऐसा रूप दिया गया है, जिसमें आधुनिक सोच और भारतीय पहचान दोनों साथ नजर आते हैं.
 

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