मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच का तनाव हर दिन नासूर बन रहा है. महिलाओं को नग्न करके उनकी परेड निकाली जा रही है, उनसे सेक्शुअल असॉल्ट किया जा रहा है. डेढ़ महीने बाद एफआईआर दर्ज होती है लेकिन दो महीने तक गिरफ्तारी नहीं होती. वीडियो वायरल होने के बाद होती भी है, लेकिन अनेक आरोपियों में से सिर्फ एक की.
मणिपुर में दो महिलाओं से भीड़ की अभद्रता का वीडियो वायरल होने के ठीक बाद आज संसद का मॉनसून सेशन शुरू हुआ और विपक्ष सरकार पर हमलावर रही. मुद्दे पर चर्चा नहीं हो पाई और सदन अब कल तक के लिए स्थगित हो गया. सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मुद्दे पर सुओ मोटो लेकर सरकार को तुरंत कार्रवाई करने का निर्देश दिया. इस ख़बर के सामने आते ही कल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर चुप्पी तोड़ने का दबाव बन रहा था, आज आख़िरकार उनका मौन टूटा. कांग्रेस का कहना है कि प्रधानमंत्री बोले तो ज़रूर, लेकिन जो बोले, वो नाकाफी है.
मणिपुर में आर्टिकल 355 लागू है. यानी लॉ एंड ऑर्डर अब सीधे केंद्र सरकार देख रही है, वहां केंद्रीय एजेंसियां सक्रिय हैं. यानी जो वहां हुआ, उसकी प्राथमिक ज़िम्मेदारी केंद्र सरकार की बनती है.तो ये जो वीडियो वायरल हुआ है, वो घटना हुई कैसे, किन परिस्थतियों में हुई? जो प्रधानमंत्री का बयान आया है, क्या वो देर से आया और आया भी तो कितना दुरुस्त आया है? और मणिपुर में जिस तरह की स्थिति बनी हुई है, क्या ये सही मौका नहीं है राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया जाए, सुनिए 'दिन भर' की पहली ख़बर में.
राजस्थान में दिसंबर महीने में विधानसभा चुनाव हो सकते हैं. ऐसा लगता है कि सचिन पायलट इस बार भी सीएम इन वेटिंग ही रह जाएंगे. कांग्रेस की चुनाव कमेटी की जब आज घोषणा हुई और ये तय हो गया कि सचिन पायलट के साथ जो मान मनौव्वल हुई थी, उसमें उनके हाथ कुछ लगा नहीं. राजस्थान कांग्रेस की चुनाव कमेटी में ज़्यादातर लोग अशोक गहलोत के करीबी हैं. गोविंद सिंह डोटासरा जो पहले से प्रदेश अध्यक्ष थे, कमेटी के अध्यक्ष बन गए. 29 लोग इस कमेटी के सदस्य हैं. सचिन पायलट या अशोक गहलोत, किस खेमे के नेताओं को इस कमेटी में जगह मिली है और कौन से बड़े नाम इससे ग़ायब हैं, सुनिए 'दिन भर' की दूसरी ख़बर में.
आज से साढ़े आठ बरस पहले हरियाणा के पानीपत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान शुरू किया था. इस अभियान और दूसरे प्रयासों का असर भी दिखा. हरियाणा का लिंग अनुपात यानी प्रति हज़ार लड़कों के मुक़ाबले लड़कियों की संख्या पहली बार 900 के पार पहुंची. साल 2011 के आंकड़ों के मुताबिक, हरियाणा का सेक्स रेश्यो एट बर्थ सिर्फ 834 था, जो उस वक़्त के नेशनल एवरेज 919 से काफी कम था.
लेकिन 2015 के बाद तस्वीर बदली और इसमें लगातार सुधार हुआ. साल 2020 में यह 922 तक पहुँच गया था, लेकिन इसके बाद से इसमें फिर से ढलान की स्थिति देखी जा रही है. पिछले साल ये आंकड़ा 917 और इस साल के शुरूआती छह महीनों में 906 हो गया है. हरियाणा के सेक्स रेश्यो में गिरावट का ये ट्रेंड क्या कहता है, किन स्याह पहलुओं को उजागर करता है और कौन से ज़िले हैं जहाँ मामला ज़्यादा गंभीर है, सुनिए 'दिन भर' की तीसरी ख़बर में.
ये तो सत्य है कि महीने की शुरुआत में हमारी आमदनी का एक बड़ा हिस्सा ईएमआई, घर का किराया, फीस जैसी चीज़ों पर खर्च हो जाता है. एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अगर आपकी आमदनी बढ़े तो उसके साथ अपने खर्च को मत बढ़ाइए. ताकि बढ़े हुए पैसों की आप बचत कर सकें. इसके साथ पैसे कैसे ख़र्च करें, इस पर भी टिप्स मिलते रहते हैं. लेकिन ख़र्च किस माध्यम से करें, ये भी ज़रूरी सवाल है. अगर आप किसी को पेमेंट कर रहे हैं तो आपकी प्राथमिकता क्या होनी चाहिए, कैश, यूपीआई या कार्ड? अगर सिर्फ ऑनलाइन ट्रांजैक्शन की बात करें तो उसमें बेहतर विकल्प क्या है, सुनिए 'दिन भर' की आख़िरी ख़बर में.
कुलदीप मिश्र