'गुलामी की मानसिकता से निकलने का संकल्प...', नए PMO के उद्घाटन पर बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री ने कहा कि नई इमारतें देश के 140 करोड़ नागरिकों की आकांक्षाओं को पूरा करने के उद्देश्य से बनाई गई हैं. अब यहां लिए जाने वाले फैसले किसी शासक की इच्छा नहीं बल्कि देश की जनता के सपनों को साकार करने का आधार बनेंगे.

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प्रधानमंत्री ने कहा कि नया पीएमओ परिसर सेवा तीर्थ सेवा की भावना का प्रतीक है. (File Photo- PTI) प्रधानमंत्री ने कहा कि नया पीएमओ परिसर सेवा तीर्थ सेवा की भावना का प्रतीक है. (File Photo- PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:51 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री कार्यालय के नए परिसर ‘सेवा तीर्थ’ और केंद्रीय सचिवालय की दो नई इमारतों ‘कर्तव्य भवन-1’ और ‘कर्तव्य भवन-2’ का उद्घाटन किया. इस मौके पर उन्होंने कहा कि ये नई इमारतें भारत के ‘विकसित भारत’ के संकल्प को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होंगी और नागरिक केंद्रित शासन व्यवस्था को मजबूत करेंगी.

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उद्घाटन समारोह में केंद्रीय मंत्री, वरिष्ठ नौकरशाह और कई सरकारी अधिकारी मौजूद रहे. प्रधानमंत्री ने कहा कि नई इमारतें देश के 140 करोड़ नागरिकों की आकांक्षाओं को पूरा करने के उद्देश्य से बनाई गई हैं. अब यहां लिए जाने वाले फैसले किसी शासक की इच्छा नहीं बल्कि देश की जनता के सपनों को साकार करने का आधार बनेंगे.

प्रधानमंत्री ने कहा कि नया पीएमओ परिसर सेवा तीर्थ सेवा की भावना का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि विकसित भारत का संकल्प लेकर देश इस सेवा तीर्थ में प्रवेश कर रहा है और यह परिसर शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी और प्रेरणादायक बनाने में मदद करेगा.

पीएम मोदी ने कहा कि पहले महत्वपूर्ण मंत्रालयों और प्रधानमंत्री कार्यालय का संचालन साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक से किया जाता था. ये ऐतिहासिक इमारतें ब्रिटिश शासन के प्रतीक के रूप में बनाई गई थीं. हालांकि स्वतंत्रता के बाद भी कई महत्वपूर्ण फैसले इन्हीं भवनों से लिए गए, लेकिन अब भारत को औपनिवेशिक मानसिकता से पूरी तरह मुक्त होकर आगे बढ़ने की जरूरत है.

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प्रधानमंत्री ने कहा कि नई सचिवालय इमारतें कर्तव्य भवन 1 और कर्तव्य भवन 2 आधुनिक सुविधाओं से लैस हैं और विभिन्न मंत्रालयों को एक ही परिसर में लाने की दिशा में बड़ा कदम हैं. पुराने भवनों में जगह की कमी और बिखरी हुई प्रशासनिक व्यवस्था के कारण कामकाज प्रभावित होता था, लेकिन नई इमारतें प्रशासन को अधिक सुचारू और कुशल बनाएंगी.

पीएम मोदी ने कहा कि 2014 के बाद देश ने गुलामी की मानसिकता से बाहर निकलने का संकल्प लिया था. इसी सोच के तहत कई ऐतिहासिक बदलाव किए गए. प्रधानमंत्री आवास वाले रास्ते रेस कोर्स रोड का नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग रखा गया. यह केवल नाम बदलने की प्रक्रिया नहीं थी बल्कि सत्ता की मानसिकता को सेवा की भावना में बदलने का प्रयास था. हमने पुराने भवन को भुलाया नहीं है, अलग-अलग मंत्रालयों को एक परिसर में लाया गया है.

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि पहले ‘राजपथ’ के नाम से जाना जाने वाला मार्ग भी अब जनता के लिए जीवंत सार्वजनिक स्थान के रूप में विकसित किया गया है. उन्होंने जोर देकर कहा कि नाम बदलने की पहल केवल औपचारिक बदलाव नहीं बल्कि स्वतंत्र भारत की पहचान को मजबूत करने का प्रयास है.

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने ‘सेवा तीर्थ’ पर आधारित स्मारक डाक टिकट और स्मारक सिक्का भी जारी किया. उन्होंने कहा कि भारत जब विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, तब देश को गुलामी के हर प्रतीक से मुक्त करना जरूरी है.

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प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विजय एकादशी के दिन इन इमारतों का उद्घाटन होना बेहद शुभ संकेत है. उन्होंने कहा कि इस दिन लिए गए संकल्प सफलता की दिशा में मार्ग प्रशस्त करते हैं और नई इमारतों से देश के विकास को नई ऊर्जा मिलेगी.

उन्होंने पीएमओ और केंद्रीय सचिवालय के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि यह परिसर केवल भवन नहीं बल्कि सेवा, समर्पण और सुशासन की नई पहचान बनेगा.

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