पवन खेड़ा की 'ग़लती' से फिसली जुबान का BJP बदला ले रही है?

पवन खेड़ा पर क्यों गरमाई राजनीति, कैसे थमेगा दिल्ली एमसीडी का विवाद, UN जनरल असेंबली में रूस या यूक्रेन में से किसका साथ देगा भारत, कोरोना के बाद घर खरीद में क्यों हुई बढ़ोतरी, सुनिए 'दिन भर' में.

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नितिन ठाकुर

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  • 23 फरवरी 2023,
  • अपडेटेड 8:27 PM IST

पवन खेड़ा के बयान पर सियासत तेज़

बात तो हरियाणा की होनी चाहिए थी क्योंकि आज मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने राज्य का बजट पेश किया है, जिसमें कोई नए टैक्स की बात नहीं कही और गौ सेवा के लिए 40 करोड़ के फंड को 400 करोड़ का कर दिया गया है, लेकिन बात असम पुलिस की करेंगेक्योंकि असम पुलिस ने आज कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर घेर लिया. वजह थी उनका तीन दिन पहले का बयान.

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खेड़ा ने अदाणी-हिंडनबर्ग मामले में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रधानमंत्री मोदी का नाम बोलते वक्त थोड़ी छेड़खानी कर दी थी. इस बात पर खेड़ा के ख़िलाफ़ असम में केस दर्ज हुआ और पुलिस की एक टीम दिल्ली पहुंच गई  गिरफ़्तारी करने. तेज़ी की तारीफ है मगर पुलिस इतनी मेहनत बावजूद खेड़ा को असम नहीं ले जा सकी, उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने पहले अग्रिम जमानत दे दी. फिर द्वारका की अदालत से भी उन्हें जमानत मिल गई. इसके बाद पवन खेड़ा मीडिया के सामने आए.

कांग्रेस बीजेपी पर बहुत खफा है. अपने पूर्ण अधिवेशन को डिस्टर्ब करने के आरोप लगा रही है. क्लिक कर के सुनिए 'दिन भर' में.

 

दिल्ली मेयर चुनाव के बाद हंगामा

दिल्ली एमसीडी चुनाव पर लगी साढ़ेसाती अब तक ख़त्म नहीं हो पा रही. पहले मेयर चुनाव नहीं हो पा रहा था अब मेयर मिलीं तो स्टैंडिंग कमेटी को लेकर हंगामा कटा है. स्टैंडिंग कमेटी का ये चुनाव कल शाम से शुरू हुआ था लेकिन अंजाम तक नहीं पहुंच सका. चुनावी प्रक्रिया शुरू होती उससे पहले सदन में हंगामा शुरू हो गया. यहां तक की कल मारपीट की भी नौबत आ गई. इनमें पुरुष पार्षद भी थे और महिला पार्षद भी.

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आज भी हंगामे के साथ ही कार्रवाई शुरू हुई लेकिन बहुत देर तक चल नहीं पाई. हंगामे के चलते कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित कर दी गई। अब स्टैंडिंग कमेटी के 6 सदस्यों का चुनाव कल होना तय हुआ है. क्लिक कर के सुनिए 'दिन भर' में.

 

रूस या यूक्रेन में किसके साथ भारत?

रूस-यूक्रेन युद्ध पर भारत का रुख स्पष्ट रहा है... भारत न रूस के साथ है, न ही यूक्रेन के साथ. हां... युद्ध बातचीत के ज़रिए ख़त्म हो, इसका समर्थन ज़रूर करता आया है. अब युद्ध को एक साल हो गया है. इस दौरान वर्ल्ड पॉलिटिक्स में कई बदलाव हुए. पाकिस्तान, इजरायल में सत्ता परिवर्तन हुआ, चीन, ईरान... रूस के और करीब आ गए और इन घटनाओं ने युद्ध पर भी अपना प्रभाव छोड़ा. इन्हीं सब के बीच आज UN जनरल असेंबली में वोटिंग होनी है जिसमें यूक्रेन में शांति स्थापित करने के प्रयासों पर जोर दिया जाएगा.

भारत इस वोटिंग से अब तक एब्सटेन करता आया है लेकिन यूरोपीय देश इस कोशिश में हैं कि भारत अपना मत इस दफे यूक्रेन के पक्ष में रखे. खास कर फ्रांस का इसपर काफी ज़ोर है जिससे पिछले कुछ सालों में भारत के रिश्ते मज़बूत हुए है. आजतक से फ्रांस के राजनयिक सूत्र की बात हुई और उसने कहा कि फ्रांस, भारत के संपर्क में हैं और इस मसले पर उनसे बात भी हो रही है. वहीं एंड्री यरमक जो कि यूक्रेन राष्ट्रपति कार्यालय के प्रमुख है उन्होंने भी कल भारतीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से फोन पर बातें की और समर्थन मांगा.  तो सबसे पहले सवाल तो फ्रांस को लेकर करते हैं कि वो यूक्रेन के लिए भारत का समर्थन क्यों चाह रहा है, क्लिक कर के सुनिए 'दिन भर' में.

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 कोरोना के बाद घर ख़रीदने में आई तेज़ी!

अपना घर फिर अपना घर है अपने घर की बात क्या

ग़ैर के गुलशन से सौ दर्जा भला अपना क़फ़स

हीरा लाल फ़लक़ देहलवी का ये शेर है और बात सौ दर्जे सही भी है. देश मे ज़्यादातर लोग ख़ास कर युवा इसी बात को मानते हैं. एक रिपोर्ट इस की तस्दीक करती है.  रियल इस्टेट से जुड़ी कन्सल्टिंग फर्म है. CBRE. उसने एक सर्वे के एक बाद ये रिपोर्ट पब्लिश की है.

क़रीब 20 हजार लोगों के इस सर्वे में आधे युवाओं ने कहा कि वो अगले दो साल में नए घर मे शिफ्ट होना चाहते हैं. इसी सर्वे में 70 परसेंट युवाओं ने कहा कि वो किराए के मकान से ज़्यादा ख़ुद के घर मे रहना चाहते हैं. मेट्रो सिटीज की ये कहानी भी है कि आधी से ज़्यादा आबादी वहाँ किराए पर है. ऐसे में बड़ी चाहत ख़ुद के मकान की है. रिपोर्ट में इस बात की संभावना भी जताई गई है कि अगले दो साल में कंस्ट्रक्शन के काम मे तेज़ी आ सकती है. क्लिक कर के सुनिए 'दिन भर' में.

 

 

 

 

 

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