कोरोना (corona) के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन (Omicron) को लेकर पूरी दुनिया में चिंता के बादल मंडरा रहे हैं. हालांकि, भारत के लिए यह सुकून भरी खबर है कि यहां ओमिकॉन का अब तक कोई केस सामने नहीं आया है. फिर भी, एहतियात बरतते हुए मंगलवार को केंद्र सरकार ने कोविड-19 के बेहद खतरनाक वैरिएंट Omicron के बचाव के लिए, देश भर में इसकी रोकथाम के उपायों को 31 दिसंबर तक बढ़ा दिया है और राज्यों को सतर्क रहने को कहा है.
कोविड से जुड़े दिशा-निर्देशों का सख्ती से हो पालन
इस मामले पर केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को 25 नवंबर को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने के लिए कहा है. इसमें सभी अंतरराष्ट्रीय उड़नों से आने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग और टेस्टिंग की सिफारिश की गई है. उन्होंने यह भी कहा है कि दिशानिर्देशों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के करीबी संपर्कों को भी बारीकी से ट्रैक करना चाहिए और उनका टेस्ट किया जाना चाहिए. साथ ही, पॉज़िटिव पाए जाने पर इन सैंपल को जीनोम सीक्वेंसिंग लैब में तुरंत भेजा जाना चाहिए. इसके साथ ही, नतीजे जल्दी पाने के लिए, राज्यों के सर्विलेंस अफसरों को इन जीनोम सीक्वेंसिंग लैब के साथ कॉर्डिनेट करना चाहिए, ताकि उसपर तेजी से काम किया जा सके.
भारत में ओमिकॉन का अब तक कोई केस नहीं
मंगलवार, संसद को आश्वासन देते हुए, स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने यह जानकारी दी कि ओमिक्रॉन वैरिएंट अब तक 14 देशों में पाया गया है, लेकिन भारत में अब तक इसका कोई मामला सामने नहीं आया है. उन्होंने कहा है कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए उपाय कर रही है कि यह वायरस देश तक न पहुंचे.
उन्होंने कहा कि दुनिया भर में फैल रहे इस वायरस को ध्यान में रखते हुए केंद्र ने एक एडवाइज़री जारी की है. उन्होंने कहा, संदिग्ध मामलों की जीनोम सीक्वेंसिंग की जा रही है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हमें सभी सावधानियां बरतने की जरूरत है.
तीसरी लहर के लिए तैयार है भारत
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री डॉ भारती प्रवीण पवार का कहना है कि भारत सरकार, देश और विश्व स्तर पर कोविड की स्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए है. उन्होंने कहा कि
- अब तक राज्यों/यूटी को कोविड-19 से जुड़े करीब 150 दिशानिर्देश/एडवाइज़री/प्लान दिए जा चुके हैं, जिन्हें समय समय पर अपडेट किया जा रहा है.
- राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को ऑन-फील्ड सहायता प्रदान करने के लिए, कुल 170 सेंट्रल मल्टीडिसिप्लिनरी टीम को 33 राज्यों/जिलों में तैनात किया गया है. इन टीम में महामारी विज्ञानियों (epidemiologists), चिकित्सक, माइक्रोबायोलॉजिस्ट और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं.
- राज्यों को पीपीई किट, एन-95 मास्क, वेटिलेटर और Hydroxychloroquine और Remdesivir जैसी दवाएं उपलब्ध कराई गई हैं.
- राज्यों को ऑक्सीजन सिलेंडर और ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर उपलब्ध कराए गए हैं. राज्यों को ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर प्लांट गाने के लिए भी सहायता दी जा रही है. सभी राज्यों को ऑक्सीजन के सही उपयोग करने की सलाह दी गई है.
- राज्यों के अस्पतालों में ऑक्सीजन की खपत का ऑडिट करने और सुविधा-वार/अस्पताल-वार ऑक्सीजन इन्वेंट्री मैपिंग और समय पर उपलब्धता के लिए अग्रिम योजना बनाने की सलाह दी गई है ताकि कोई भी स्टॉक आउट न हो.
- सभी सरकारी कोविड-19 टीकाकरण केंद्रों में, 18 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों के लिए मुफ़्त वैक्सीन उपलब्ध कराई जा रहा है. टीकाकरण दर में सुधार के लिए 'हर घर दस्तक' अभियान चलाया जा रहा है.
बता दें कि कोविड से जुड़ी ज़रूरी सुविधाओं और तैयारियों के लिए सरकार ने वित्तीय वर्ष 2019-20 के दौरान, राज्यों को कोविड-19 महामारी के प्रबंधन और रोकथाम के लिए 1113.21 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की थी. वहीं, आपातकालीन स्थिति और स्वास्थ्य प्रणाली की तैयारी के लिए, वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान, 8257.88 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं.
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