किसानों आंदोलन में शामिल होने वाले किसानों को NIA ने समन नहीं भेजा: MHA

कृषि कानून को लेकर संसद से लेकर सड़क तक मचे घमासान के बीच केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने किसान आंदोलन में शामिल किसानों से पूछताछ के लिए एनआईए ने पूछताछ के लिए समन नहीं किया है. राज्यसभा में MHA की तरफ से यह लिखित बयान दिया गया.

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MHA का कहना है कि किसानों आंदोलन में शामिल होने वाले किसानों को NIA ने समन नहीं भेजा है.(फाइल फोटो) MHA का कहना है कि किसानों आंदोलन में शामिल होने वाले किसानों को NIA ने समन नहीं भेजा है.(फाइल फोटो)

जितेंद्र बहादुर सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 11 फरवरी 2021,
  • अपडेटेड 3:48 AM IST
  • किसान आंदोलन को लेकर राज्यसभा में MHA का लिखित बयान
  • दिग्विजय सिंह समेत तीन सांसदों ने पूछा था सवाल
  • अन्य कई मामलों पर केंद्र सरकार ने दिया जवाब

किसान आंदोलन को लेकर एनआई की तरफ से किसानों को भेजे गए समन को लेकर केंद्र सरकार ने सदन में सफाई दी है. MHA का कहना है कि किसानों आंदोलन में शामिल होने वाले किसानों को NIA ने समन नहीं भेजा है. कृषि कानून को लेकर संसद से लेकर सड़क तक मचे घमासान के बीच केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने किसान आंदोलन में शामिल किसानों से पूछताछ के लिए एनआईए ने पूछताछ के लिए समन नहीं किया. राज्यसभा में MHA की तरफ से यह लिखित बयान दिया गया.

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इसके अलावा सदन में केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से बताया गया कि 2016 के मुकाबले 2020 में भारत-बांग्लादेश सीमा पर घुसपैठ के मामलों में कमी आई है. गृह मंत्रालय के मुताबिक 2016 में ऐसे 654 मामले थे और 1601 लोगों को पकड़ा गया था. वहीं,  2020 में 489 मामले सामने आए और 955 लोगों को पकड़ा गया. दिग्विजय सिंह समेत तीन सांसदों ने सवाल पूछा था जिसका जवाब केंद्र सरकार ने दिया.

गृह मंत्रालय की तरफ से यह  भी कहा गया कि नक्सल हिंसा में 70% की कमी दर्ज की गई है. गृह मंत्रालय की तरफ से बताया गया कि 2009 में हिंसा के 2258 मामले सामने आए थे जबकि  2020 में केवल 665 मामले सामने आए. नक्सल हिंसा का दायरा भी घटा है. 9 राज्यों में 53 ज़िलों में हिंसा हुई, जबकि 2013 में 10 राज्यों के 76 ज़िलों में हिंसा हुई थी.

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MHA ने बताया कि आम नागरिकों की जान जाने और सुरक्षाबलों के शहीद होने के मामलों में 80% की कमी आई है. 2010 में 1005 मामले, 2020 में 183 ऐसे मामले सामने आए जिसमें लोगों की जान गई. इसके अलावा केंद्र की तरफ से बताया गया कि 2019 में 1948 लोगों को UAPA के तहत गिरफ्तार किया गया जबकि 2016 से 2019 के बीच UAPA के तहत 5922 लोगों को गिरफ्तार किया गया और 132 को दोषी पाया गया.

 

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