'नॉन-वेज फूड हलाल है या झटका यह जानना यात्रियों का अधिकार', रेलवे को NHRC ने भेजा नोटिस

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने IRCTC द्वारा परोसे जा रहे नॉन-वेज भोजन में पारदर्शिता की कमी पर सख्त रुख अपनाया है. आयोग ने रेलवे बोर्ड से नई कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है और FSSAI व पर्यटन मंत्रालय को भी नोटिस जारी किया है.

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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने ट्रेनों में नॉन वेज फूड परोसे जाने में पारदर्शिता की कमी को लेकर रेलवे और आईआरसीटीसी को नोटिस भेजा. (File Photo: PTI) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने ट्रेनों में नॉन वेज फूड परोसे जाने में पारदर्शिता की कमी को लेकर रेलवे और आईआरसीटीसी को नोटिस भेजा. (File Photo: PTI)

पीयूष मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 12 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:55 PM IST

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भारतीय रेलवे द्वारा IRCTC के जरिए ट्रेनों में परोसे जा रहे नॉन-वेज फूड को लेकर पारदर्शिता की गंभीर कमी पर चिंता जताते हुए रेलवे बोर्ड से नई कार्रवाई रिपोर्ट (Action Taken Report–ATR) मांगी है. आयोग ने इस मामले में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) और पर्यटन मंत्रालय को भी नोटिस जारी कर अपने-अपने नियामक ढांचे में NHRC की टिप्पणियों को शामिल करने के निर्देश दिए हैं.

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यह निर्देश उस शिकायत के बाद जारी किए गए हैं, जिसमें आरोप लगाया गया था कि भारतीय रेलवे में IRCTC के माध्यम से केवल हलाल मीट परोसा जा रहा है. शिकायत में इसे भेदभावपूर्ण बताते हुए यात्रियों की पसंद की स्वतंत्रता, धार्मिक अधिकारों और गैर-मुस्लिम समुदायों से जुड़े लोगों की आजीविका पर असर पड़ने का मुद्दा उठाया गया था. 21 नवंबर 2025 को दर्ज शिकायत पर NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई की.

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि ट्रेनों और IRCTC द्वारा मैनेज कैंटीन में केवल हलाल मांस परोसना संविधान के तहत प्रदत्त अधिकारों का उल्लंघन है और इससे हिंदुओं समेत अन्य गैर-मुस्लिम समुदायों के रोजगार के अवसर प्रभावित हो रहे हैं. शिकायत में संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 19(1)(g), 21 और 25 के उल्लंघन के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट और NHRC के पूर्व आदेशों का भी हवाला दिया गया.

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IRCTC ने अपने जवाब में क्या कहा?

IRCTC ने 10 दिसंबर 2025 को दाखिल जवाब में कहा था कि वह हलाल सर्टिफिकेशन को अनिवार्य नहीं करता और उसकी कोई ऐसी खरीद नीति नहीं है. उसका कहना था कि वह केवल FSSAI के खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता मानकों का पालन कराता है और रेलवे मंत्रालय किसी धार्मिक सर्टिफिकेशन पर जोर नहीं देता. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने IRCTC की रिपोर्ट को अधूरा और अस्पष्ट बताते हुए कहा कि यात्रियों को यह जानने का मौलिक अधिकार है कि वे क्या खा रहे हैं. 

NHRC ने स्पष्ट किया कि IRCTC केवल मध्यस्थ नहीं बल्कि खाद्य सेवा प्रदाता भी है, इसलिए उसे यह बताना होगा कि नॉन-वेज भोजन हलाल है, झटका है या किसी अन्य विधि से तैयार किया गया है. आयोग ने सिख रहत मर्यादा का उल्लेख करते हुए कहा कि जानकारी के अभाव में सिख यात्रियों को अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप विकल्प चुनने से वंचित किया जा रहा है. साथ ही यह भी कहा गया कि यदि केवल हलाल मांस परोसा जाता है, तो इससे रोजगार में धार्मिक आधार पर भेदभाव की स्थिति बन सकती है.

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NHRC ने रेलवे बोर्ड को निर्देश दिया है कि वह नई ATR में IRCTC से जुड़े सभी फूड कॉन्ट्रैक्टर्स और वेंडर्स की सूची, उनके द्वारा परोसे जाने वाले मांस की विधि (हलाल/झटका/दोनों) और संबंधित स्थानों का पूरा विवरण दे. FSSAI और पर्यटन मंत्रालय को भी चार सप्ताह के भीतर पारदर्शिता और खुलासे से जुड़े दिशा-निर्देशों पर कार्रवाई रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है.

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