मां की गोद से 20 दिन की बच्ची को उठा ले गया बंदर, हाथ से छूट कुएं में गिरी, 'डायपर' की वजह से डूबी नहीं

छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसे सुनकर रोंगटे खड़े हो जाएं, लेकिन इसका अंत किसी चमत्कार से कम नहीं रहा. एक 20 दिन की मासूम बच्ची को बंदर ने कुएं में फेंक दिया, लेकिन किस्मत और एक नर्स की सूझबूझ ने मौत के मुंह से उसे खींच लिया.

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मासूम के लिए 'लाइफ जैकेट' बना डायपर.(Photo:ITG) मासूम के लिए 'लाइफ जैकेट' बना डायपर.(Photo:ITG)

दुर्गेश यादव

  • जांजगीर-चांपा,
  • 23 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:27 PM IST

छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जिसने पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया. यहां एक बंदर ने मां की गोद से महज 20 दिन की दूधमुंही बच्ची को छीनकर पास के कुएं में फेंक दिया. हालांकि किस्मत और सूझबूझ ने इस बार साथ दिया. बच्ची ने डायपर पहन रखा था, जो पानी में लाइफ जैकेट साबित हुआ. ग्रामीणों की तत्परता और गांव में मौजूद एक नर्स की त्वरित कार्रवाई से मासूम की जान बच गई.
 
जिले में नैला थाना इलाके के सिवनी का यह मामला है. गांव के निवासी अरविंद राठौर की पत्नी अपनी 20 दिन की बेटी को गोद में लेकर खाना खिला रही थीं. इसी दौरान अचानक एक बंदर आया और बच्ची को मां की गोद से छीनकर भाग गया. 

मां की चीख-पुकार सुनकर परिजन और ग्रामीण बंदर के पीछे दौड़े. करीब 10 से 15 मिनट तक बंदर बच्ची को लेकर इधर-उधर भागता रहा. बाद में बच्ची कहीं दिखाई नहीं दी, जिससे गांव में अफरा-तफरी मच गई. 

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खोजबीन के दौरान ग्रामीणों की नजर पास के एक कुएं पर पड़ी, जहां बच्ची पानी में पानी के ऊपर नजर आई. बताया गया कि बच्ची करीब 10 मिनट तक कुएं के पानी में रही और उसने काफी पानी भी पी लिया था, लेकिन डायपर की वजह से वह पूरी तरह नहीं डूबी. 

बाल्टी से बाहर निकाला, नर्स बनी देवदूत 
हालात की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने तुरंत बाल्टी की मदद से बच्ची को कुएं से बाहर निकाला. उसी समय गांव में कथा सुनने आई नर्स राजेश्वरी राठौर मौके पर मौजूद थीं. उन्होंने बिना समय गंवाए बच्ची को तुरंत सीपीआर देना शुरू किया. कुछ ही पलों में मासूम की सांसें लौटने लगीं. यह दृश्य देख परिजनों और ग्रामीणों की आंखें भर आईं. 

प्राथमिक उपचार के बाद बच्ची को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची की हालत अब स्थिर है और उसे किसी गंभीर चोट का खतरा नहीं है. 

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बच्ची के पिता अरविंद राठौर ने बताया कि वह मड़वा पावर प्लांट में काम करते हैं और घटना के समय ड्यूटी पर थे. उन्होंने कहा कि गांव में बंदर अक्सर दिखते हैं, लेकिन ऐसी घटना पहले कभी नहीं हुई. अगर गांववालों और नर्स की मदद नहीं मिलती, तो कुछ भी हो सकता था. हम भगवान और सभी मददगार लोगों के आभारी हैं. उन्होंने सभी से अपील की है कि छोटे बच्चों को कभी अकेला या असुरक्षित न छोड़ें. 

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