हिंसा प्रभावित मणिपुर में करीब एक साल बाद नई निर्वाचित सरकार का गठन हो गया है. बुधवार को वाई खेमचंद सिंह ने मणिपुर के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. उनके साथ नेमचा किपगेन और एल. दीखो ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली. शपथ ग्रहण समारोह इंफाल स्थित लोक भवन में आयोजित किया गया, जहां राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने सभी को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई.
इससे कुछ घंटे पहले ही केंद्र सरकार ने मणिपुर में लागू राष्ट्रपति शासन को हटाने का फैसला किया था. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर तत्काल प्रभाव से राष्ट्रपति शासन समाप्त करने की घोषणा की, जिससे राज्य में नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हुआ.
यह भी पढ़ें: खेमचंद नए CM तो कुकी नेता नेमचा होंगी डिप्टी CM, मणिपुर में NDA का नया समीकरण
शपथ ग्रहण समारोह के दौरान गोविंदास कोंथौजम ने गृह मंत्री पद की शपथ ली, जबकि खुराइज़म लोकेन ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली. एनपीएफ विधायक एल. दीखो ने डिप्टी मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, वहीं कुकी समुदाय से आने वाली बीजेपी विधायक नेमचा किपगेन ने वर्चुअली उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली.
भारतीय जनता पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शपथ ग्रहण समारोह की जानकारी साझा की. पार्टी ने कहा कि वाई. खेमचंद सिंह के अनुभव और दूरदर्शी नेतृत्व में मणिपुर शांति, विकास और सुशासन की दिशा में आगे बढ़ेगा और राज्य में स्थिरता का नया दौर शुरू होगा.
मुख्यमंत्री पद की शपथ से पहले खेमचंद सिंह के नेतृत्व में एनडीए विधायकों का एक प्रतिनिधिमंडल लोक भवन पहुंचा और राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से मुलाकात कर सरकार बनाने का औपचारिक दावा पेश किया था. इस प्रतिनिधिमंडल में चुराचांदपुर और फेरजावल जैसे कुकी-जो बहुल जिलों के दो विधायक भी शामिल थे.
यह भी पढ़ें: फुटबॉलर के बाद अब ताइक्वांडो प्लेयर के हाथ में मणिपुर की कमान, जानिए कौन हैं युमनाम खेमचंद
62 वर्षीय वाई. खेमचंद सिंह को मंगलवार को नई दिल्ली में हुई बैठक में पहले बीजेपी विधायक दल का नेता चुना गया था, जिसके बाद उन्हें एनडीए विधायक दल का नेता घोषित किया गया.
गौरतलब है कि फरवरी 2025 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था. मई 2023 से शुरू हुई मैतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा के चलते राज्य में लंबे समय तक अस्थिरता बनी रही. अब नई सरकार के सामने शांति बहाली, भरोसा कायम करने और शासन व्यवस्था को पटरी पर लाने की बड़ी चुनौती होगी.
aajtak.in