मणिपुर: गृह मंत्रालय और कुकी-ज़ो समूहों के बीच हुई वार्ता, केंद्र ने नए केंद्र शासित प्रदेश की मांग ठुकराई

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 6 और 7 नवंबर को मणिपुर के कुकी-ज़ो समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ शांति वार्ता की. बैठक में कुकी-ज़ो प्रतिनिधियों ने केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मांगा, लेकिन मंत्रालय ने कहा कि मौजूदा नीति में नए केंद्र शासित प्रदेशों का समर्थन नहीं किया जा सकता.

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मणिपुर वार्ता में कुकी-ज़ो की केंद्र शासित प्रदेश की मांग पर सरकार का इनकार (Photo: ITG) मणिपुर वार्ता में कुकी-ज़ो की केंद्र शासित प्रदेश की मांग पर सरकार का इनकार (Photo: ITG)

अनीषा माथुर

  • नई दिल्ली,
  • 08 नवंबर 2025,
  • अपडेटेड 1:56 PM IST

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 6 और 7 नवंबर 2025 को मणिपुर के कुकी-ज़ो समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की. यह बैठक पहले से चल रहे शांति समझौते (एसओओ - संचालन निलंबन समझौता) के तहत हुई, जिसमें सरकार और कुकी-ज़ो समूहों के बीच जारी संवाद का हिस्सा है.

इस बैठक में कुकी-ज़ो प्रतिनिधियों ने केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मांग की, जिसमें एक विधानमंडल भी शामिल हो. उन्होंने अपनी इस मांग को संवैधानिक और ऐतिहासिक आधार बताया. लेकिन गृह मंत्रालय ने साफ कहा कि भारत सरकार उनकी कठिनाइयों को समझती है, लेकिन वर्तमान नीति नए केंद्र शासित प्रदेशों के निर्माण का समर्थन नहीं करती.

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गृह मंत्रालय ने यह भी कहा कि किसी भी फैसले से पहले मणिपुर के अन्य समुदायों से भी व्यापक परामर्श ज़रूरी है. मंत्रालय ने दोहराया कि राज्य में स्थायी शांति और आपसी विश्वास स्थापित करना ही सरकार का मुख्य उद्देश्य है, इसलिए संवाद जारी रहेगा.

कुकी-ज़ो समूह और सरकार की बातचीत

यह वार्ता पिछले समझौते का हिस्सा है, जो 2008 में हुआ था. तब से वार्ता जारी है, और इस बार भी सभी पक्ष शांति और स्थिरता बनाए रखने पर सहमत हैं. साथ ही, मेन रोड खोलने और उग्रवादी शिविर हटाने जैसे मुद्दे भी चर्चा में रहे.

यह भी पढ़ें: मिजोरम सीमा पर सुरक्षा बढ़ाने की अपील, मणिपुर के पूर्व CM बीरेन सिंह ने जताई अवैध घुसपैठ की आशंका

केंद्र शासित प्रदेश की मांग पर स्थिति

कुकी-ज़ो समुदाय की मांग को लेकर सरकार ने साफ कर दिया कि नई नीति की वजह से नया केंद्र शासित प्रदेश बनाने का समर्थन फिलहाल संभव नहीं है. सरकार चाहती है कि सभी समुदायों की सहमति से ही कोई बड़ा कदम उठाया जाए.

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शांति की दिशा में सरकार का प्रयास

सरकार और समूहों के बीच संवाद से वहां शांति स्थापित करने की कोशिशें बढ़ी हैं. सभी पक्षों को सहयोग और समझौते के नियमों का पालन करना होगा ताकि क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे.

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