मणिपुर: गैंगरेप के बाद ढाई साल तक मौत से लड़ी कुकी महिला, अंत में हार गई जिंदगी की जंग

मणिपुर की मई 2023 की जातीय हिंसा से जुड़ी 20 साल की कुकी-जो युवती का गुवाहाटी के अस्पताल में निधन हो गया. ढाई साल से गंभीर शारीरिक चोटों और मानसिक पीड़ा से पीड़ित झेली, हिंसा के दौरान अपहरण और गैंगरेप की शिकार हुई थी.

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कुकी महिला ने ढाई साल बाद अस्पताल में दम तोड़ा (Photo: PTI) कुकी महिला ने ढाई साल बाद अस्पताल में दम तोड़ा (Photo: PTI)

बेबी शिरीन

  • इंफाल,
  • 18 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:08 PM IST

मणिपुर में मई 2023 की जातीय हिंसा से जुड़ा एक दर्दनाक और संवेदनशील मामला फिर से चर्चा में है. कुकी-जो समुदाय की 20 साल की युवती, जिसने उस हिंसा के दौरान अपने अपहरण और गैंगरेप का आरोप लगाया था, का इस महीने गुवाहाटी के एक अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया. परिजनों और समुदायिक संगठनों के अनुसार, वह पिछले ढाई सालों से गंभीर शारीरिक चोटों और मानसिक पीड़ा से जूझ रही थी.

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युवती का निधन 10 जनवरी 2026 को हुआ. परिवार ने बताया कि हिंसा के बाद वह कभी पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो पाई. पीड़िता ने बताया था कि 15 मई 2023 को इंफाल के न्यू चेकॉन इलाके में एक एटीएम बूथ से उसे अगवा किया गया था. तब से वह शहर के विभिन्न हिस्सों में कई घंटों तक यौन हिंसा का शिकार हुई और जबरन वाहनों में ले जाई गई. बाद में एक ऑटो चालक की मदद से वह भागने में सफल रही.

घटना के बाद युवती को कांगपोकपी जिले के राहत शिविर में रखा गया. उसके बाद मणिपुर और नागालैंड के अस्पतालों में उसका इलाज चला लेकिन स्वास्थ्य कॉम्प्लिकेशन के कारण आख़िर में उसे गुवाहाटी रेफर किया गया. 

आदिवासी संगठनों ने आरोप लगाया कि उसे गंभीर शारीरिक चोटें, मानसिक पीड़ा और गर्भाशय से जुड़ी गंभीर समस्याएं हुईं, जिनकी वजह से उसकी मौत हुई.

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इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम ने आरोप लगाया कि युवती को पहले मीरा पाइबी से जुड़ी महिलाओं ने अगवा किया और फिर अरामबाई तेंगोल के लोगों के पास सौंप दिया. संगठन ने कहा कि उसे मारने के भी निर्देश दिए गए थे, लेकिन वह बच निकली.

यह घटना उस जातीय हिंसा के दौर में हुई थी, जो 3 मई 2023 को मणिपुर में भड़क उठी थी. इस हिंसा में अब तक 260 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और साठ हज़ार से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं. पुलिस ने इस मामले में ज़ीरो एफआईआर दर्ज की थी, जिसे बाद में सीबीआई को सौंप दिया गया, लेकिन गिरफ्तारी अभी तक नहीं हुई है.

युवती की मौत के बाद कुकी-जो संगठनों ने इसे न्याय व्यवस्था की विफलता बताया है और कहा है कि ऐसे मामलों के कारण समुदाय के भीतर असुरक्षा और अलगाव की भावना बढ़ रही है.

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