'ट्रेड डील पर सांसदों को ट्रंप से मिली जानकारी, ये संसद का अपमान', राज्यसभा में खड़गे का सरकार पर वार

राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि अमेरिका के साथ डील की जानकारी सांसदों को अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप से मिली. यह संसद का अपमान है.

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खड़गे ने राज्यपाल के कामकाज पर भी उठाए सवाल (Photo: ITG) खड़गे ने राज्यपाल के कामकाज पर भी उठाए सवाल (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 04 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:28 PM IST

विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्यसभा में राष्टपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान सरकार पर जमकर हमला बोला. खड़गे ने राज्यपालों के कामकाज पर सवाल उठाए और कर्नाटक के राज्यपाल पर हेट स्पीच बिल रोकने का आरोप लगाया. उन्होंने पीएम मोदी के गुजरात का सीएम रहते तत्कालीन पीएम डॉक्टर मनमोहन सिंह की उम्र से रुपये की गिरावट की तुलना करते थे.

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राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि आज रुपये की कीमत 92 है. यह तो मोदी जी की उम्र पार कर गया. मोदी जी को देश की इज्जत की कोई चिंता नहीं है, तब थी जब विपक्ष में थे. एक तरफ नौजवानों की पीड़ा से सरकार को कोई मतलब नहीं. केंद्र सरकार में नौ लाख 70 हजार से ज्यादा पद खाली हैं. खड़गे ने आंगनबाड़ी से एम्स तक, रिक्त पद गिनाते हुए सवाल किया कि काला धन वापस लाने से 15 लाख रुपये देने तक, पीएम मोदी के वादे गिनाए और कहा कि कितनी असत्य बातें करते हो. हमको शर्म आती है. 

उन्होंने ड्रग्स जब्ती के आंकड़े भी बताए और कहा कि इनमें 65 परसेंट से ज्यादा केवल गुजरात के बंदरगाहों से ही हुआ. वह गांधी जी की जगह है. आप रोक नहीं सकते नशाखोरी को. पीएम-गृह मंत्री के राज्य में इतने नशीले पदार्थ पहुंच रहे हैं, ये अडानी के पोर्ट से आते हैं. ये आपकी नीति है, चाल-चलन है. युवा बेहतर भविष्य के लिए अमेरिका, कनाड़ा और यूरोप तक जाते हैं और मारे-मारे फिरते हैं. आप इजरायल जैसे एक्टिव वार जोन में मजदूरी के लिए अपने नौजवानों को भेजकर क्या आप भारत का सम्मान बढ़ा रहे हो. सम्मान बढ़ता है इससे. 

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खड़गे ने कहा कि मनरेगा के तहत मजदूरों को कानूनी गारंटी मिली थी. मनमोहन सिंह ने ये सेफ्टी नेट तैयार किया. लेकिन आज इसकी फंडिंग पैटर्न में बदलाव हुआ है. आज 60 परसेंट केंद्र और 40 परसेंट राज्य का है, जो पहले 90 परसेंट केंद्र और 10 परसेंट राज्य का था. हिमाचल जैसी सरकारों के लिए दिक्कत है, क्योंकि उन्हें रेवेन्यू नहीं मिलता. खड़गे ने मनरेगा के पुराने एक्ट को ही लागू रखने की मांग की और कहा कि गांधी जी के नाम पर राइट टू वर्क बहाल होने दो. आजादी के बाद बने सभी श्रमिक कानून जो मजदूरों की सुरक्षा की गारंटी थे, कुछ मित्रों को लाभ पहुंचाने के लिए खत्म कर दिया. ये लेबर कोड मजदूरों के खिलाफ है, जनता के खिलाफ है. 

उन्होंने कहा कि चुनाव में आप बार-बार आंबेडकर का नाम लेते हो, और उनकी बनाई नींव को खतम कर रहे हो. अच्छे दिन की बात कर रहे थे. आज हवा का बाजार भी खड़ा हो गया है. नौ हजार करोड़ का एयर प्यूरिफायर का बाजार खड़ा हो गया है. संसद सत्र के बीच अमेरिका से ट्रेड डील हुई, इस बारे में सांसदों को सरकार से नहीं राष्ट्रपति ट्रंप से पता चलेगा. यह संसद का अपमान है. इस डील से भारत का किसान तबाह होगा. अमेरिका के कृषि मंत्री ने कहा कि अमेरिका भारत को और कृषि उत्पाद निर्यात करेगा और किसान को फायदा मिलेगा. आप हमारे किसान को कुचल रहे हो. किसानों के हित में काम कर रहे हो, या खिलाफ, हमको भी बताओ. आप भारत के किसानों की आय दोगुना करने वाले थे, इसीलिए आप अमेरिका से जीरो टैरिफ पर सामान आने की इजाजत दे रहे. 

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खड़गे ने कहा कि भारतीय किसान अमेरिकी उत्पादों का कैसे मुकाबला करेंगे. आप किसी और राह पर चल रहे हो. कृषि आयात बढ़े तो भारत की एमएसपी प्रणाली पर दबाव बढ़ेगा. आपने बिना तैयारी भारतीय किसानों को बेहद संपन्न अमेरिकी किसानों का मुकाबला करने के लिए खड़ा कर दिया. फिर से किसान आंदोलन उठेगा और जब वो रास्ते पर आएंगे, तब आप कहीं के नहीं रहेंगे. जैसे वो कानून वापस लेना पड़ा था, वैसे ही आपको इसे भी वापस लेना होगा.

उन्होंने कहा कि यह विफल विदेश नीति का उदाहरण है. अब ट्रंप वेनेजुएला से तेल खरीदेगा. मोदी जी नाक रगड़ रहे हैं, ये गलत है. हमारी सार्वभौमिकता पर हमले हो रहे हैं. जब हम ट्रंप के कंट्रोल में गए हैं, तब हालत सोचिए. भारत के कालापानी, लिपुलेख जैसे देशों पर नेपाल दावा कर रहा है. पाकिस्तान-बांग्लादेश करीब आ गए हैं और सरकार मौन है. बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहे हैं.  उसे रोको. नहीं बोलेंगे तो हमारा बड़ा नुकसान होगा. भारत का चीन के साथ ट्रेड डेफिसिट 116 लाख करोड़ पहुंच गया है. जो लोग लाल आंख दिखाने की बात करते थे, वहीं रेड कॉर्पेट बिछा रहे हैं.

राज्यसभा में विपक्ष के नेता ने कहा कि ये मजबूती नहीं, स्ट्रैटेजिक सरेंडर है और देश इसकी कीमत चुका रहा है.  विदेश नीति की विफलता है. 2014 के बाद से इस सरकार के कार्यकाल में एक हजार से अधिक सैनिकों ने शहादत दी. घरेलू ध्रुवीकरण के विदेशी हमलों को हथियार बनाने की प्रवृत्ति खतरनाक है. इस सरकार से जानना चाहता हूं कि वे किस प्रकार का भारत बनाना चाहते हैं. प्रोपेगैंडा जनता को थोड़े समय के लिए गुमराह कर सकते हैं, लेकिन आपने सबके हितों पर चोट पहुंचाई है. 
 

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