कर्नाटक: मुस्लिम महिला की मदद कर रहे हिंदू युवक को पीटा, 4 गिरफ्तार; पुलिस के एक्शन से भड़की SDPI

कर्नाटक के कोप्पल में एक हिंदू युवक को मुस्लिम महिला की मदद करने पर पीटा गया. पुलिस ने 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि SDPI पुलिस पर पक्षपात और मारपीट का आरोप लगा रही है.

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पुलिस कार्रवाई के विरोध में SDPI का विरोध प्रदर्शन.(Photo:Screengrab) पुलिस कार्रवाई के विरोध में SDPI का विरोध प्रदर्शन.(Photo:Screengrab)

सगाय राज

  • कोप्पल ,
  • 05 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:12 AM IST

कर्नाटक के कोप्पल में एक हिंदू युवक को भीड़ ने बेरहमी से पीट दिया. वेंकटेश नाम के युवक का कसूर सिर्फ इतना था कि वह अपने पड़ोसी मुस्लिम परिवार की आपसी कलह को सुलझाने और महिला को बस स्टैंड से घर वापस लाने में मदद कर रहा था. पुलिस ने इसे 'गलतफहमी' के कारण हुई हिंसा और लूट का मामला बताया है.

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कोप्पल एसपी राम एल. अरासिद्धि के अनुसार, वेंकटेश और अजीज का परिवार पिछले 15 वर्षों से पड़ोसी हैं. अजीज और उसकी पत्नी अफीया के बीच झगड़ा हुआ था, जिसके बाद अफीया बच्चों के साथ घर छोड़कर चली गई थी. अजीज के कहने पर ही वेंकटेश उन्हें मनाने बस स्टैंड गया था.

जब कुछ मुस्लिम युवकों ने वेंकटेश को मुस्लिम महिला और बच्चों के साथ देखा, तो उन्होंने इसे 'गलत संबंध' समझ लिया और हमला कर दिया. स्थानीय लोगों के समझाने के बावजूद हमला जारी रहा और वेंकटेश का मोबाइल और पैसे भी छीन लिए गए.

पुलिस ने डकैती और अपहरण का मामला दर्ज कर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है. घटना के बाद सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के सदस्यों ने पुलिस स्टेशन के बाहर विरोध प्रदर्शन किया.

SDPI कार्यकर्ताओं का दावा है कि लड़की 17 साल की (नाबालिग) है, इसलिए वेंकटेश पर POCSO एक्ट के तहत कार्रवाई होनी चाहिए. SDPI ने आरोप लगाया कि PSI प्रकाश माला ने शांतिपूर्वक खड़े कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज किया और एक कार्यकर्ता ख्वाजा हुसैन के पेट में लाठी मारी, जिससे वह घायल हो गया.

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SDPI ने आरोप लगाया कि पुलिस दबाव में काम कर रही है और केवल पूछताछ करने वाले निर्दोष युवकों पर हत्या के प्रयास और डकैती जैसे गंभीर मामले दर्ज कर रही है.

एक वायरल वीडियो में वेंकटेश को डराया-धमकाया जाता दिख रहा है, जहां वह दबाव में यह कहते हुए सुनाई दे रहा है, "उसने गलती की है और वह दोबारा उस लड़की को कहीं नहीं ले जाएगा." पुलिस का मानना है कि यह बयान हमले के दौरान या दबाव में लिया गया है.

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