संसद में इस वक्त मॉनसून सत्र चल रहा है. मंगलवार को लोकसभा में जहां अविश्वास प्रस्ताव पर हलचल मची थी, वहीं राज्यसभा में TMC सांसद डेरेक ओ ब्रायन को लेकर हंगामा मच गया. राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने डेरेक ओ ब्रायन को सदन से सस्पेंड कर दिया लेकिन बाद में दूसरे सांसदों के मनाने पर उनको सदन की कार्यवाही में आने दिया.
हालांकि, इस सत्र में कुछ ऐसे भी सांसद हैं जिनको सस्पेंड किया गया और उनकी वापसी भी नहीं हो पाई. जैसे 3 अगस्त को आम आदमी पार्टी के इकलौते सांसद सुशील कुमार रिंकू को सस्पेंड किया गया था. इससे पहले 24 जुलाई को AAP के राज्यसभा सांसद संजय सिंह को पूरे संसद सत्र के लिए सस्पेंड कर दिया गया था.
सांसदों को सस्पेंड करने का लंबा इतिहास रहा है. इनको किस नियम के तहत और कब सस्पेंड किया जा सकता है यहां जानिए. पहले जानिए कब-कब सांसदों को सस्पेंड किया गया-
- जुलाई 26, 2022 को राज्यसभा के 19 सासंदों को एक हफ्ते के लिए सस्पेंड किया गया था. सांसदों पर सदन की कार्यवाही में बाधा डालने का आरोप लगा. ये सांसद तेल की बढ़ती कीमत पर चर्चा और रोज इस्तेमाल होने वाली चीजों से GST हटाने की मांग कर रहे थे.
- नवंबर 29, 2021: 12 राज्यसभा सांसदों को पूरे शीतकालीन सत्र के लिए सस्पेंड कर दिया गया था. उनपर हिंसक व्यवहार करने का आरोप लगा था.
- सितंबर 21, 2020: आठ राज्यसभा सांसदों को सस्पेंड किया गया. सांसदों पर एक दिन पहले संसद में गलत व्यवहार करने का आरोप लगा था.
- मार्च 5, 2020: सात कांग्रेस सांसदों को लोकसभा से पूरे बजट सत्र के लिए सस्पेंड किया गया था.
- नवंबर 2019 में स्पीकर ओम बिरला ने कांग्रेस के दो सांसदों को लोकसभा से सस्पेंड किया था.
- बिरला के बाद स्पीकर बनीं सुमित्रा महाजन ने जनवरी 2019 में TDP, AIADMK के 45 लोकसभा सांसदों को सस्पेंड कर दिया था. उनपर सदन की कार्यवाही में बाधा पहुंचाने का आरोप था.
- अगस्त 2015 में सुमित्रा महाजन ने 25 कांग्रेस सांसदों को पांच दिन के लिए सस्पेंड कर दिया था. उनपर संसद की कार्यवाही में जानबूझकर बाधा डालने का आरोप लगा था.
- 13 फरवरी 2014 को स्पीकर मीरा कुमार ने 18 सांसदों को सस्पेंड किया था. ये तेलंगाना के विभाजन को लेकर हंगामा कर रहे थे. सभी सांसद आंध्र प्रदेश के थे. तब तक राज्य का बंटवारा नहीं हुआ था.
- सितंबर 2014 में 9 सांसदों को 5 दिन के लिए सस्पेंड किया गया था.
- अगस्त 2013 में 12 सांसद पांच दिन के लिए सस्पेंड हुए थे.
- अप्रैल 2012 में 8 सांसदों को 4 दिन के लिए सस्पेंड किया गया था.
- सबसे पहले मार्च 1989 में राजीव गांधी की सरकार में 63 सांसदों को लोकसभा से 3 दिन के लिए सस्पेंड किया गया था.
सांसद को कब सस्पेंड किया जाता है?
- अगर सभापति को लगता है कि कोई सदस्य सभापीठ के अधिकारों की उपेक्षा कर रहे हैं या फिर बार-बार और जानबूझकर कार्यवाही में बाधा डाल रहे हैं तो उस सदस्य को निलंबित कर सकते हैं.
- सभापति उस सदस्य को एक निश्चित अवधि तक निलंबित कर सकते हैं. ये अवधि कुछ दिन या फिर पूरे सत्र पर लागू हो सकती है. सभापति किसी सदस्य को एक सत्र से ज्यादा निलंबित नहीं कर सकते.
- सभापति की ओर से निलंबित किए जाने के बाद उस सदस्य को तुरंत सदन से बाहर जाना होता है.
एक दिन के लिए भी होता है निलंबन
राज्यसभा के रूल बुक के नियम 255 के तहत किसी सदस्य को एक दिन के लिए निलंबित किया जा सकता है. अगर कोई सदस्य कार्यवाही में बाधा पहुंचा रहा है या दुर्व्यवहार कर रहा है तो उसे नियम 255 के तहत उस दिन की कार्यवाही से निलंबित किया जा सकता है.
निलंबन वापस नहीं हो सकता?
- निलंबन वापस लिया जा सकता है, लेकिन ये तभी संभव है जब सदस्य अपने बर्ताव के लिए माफी मांगे. जैसे अगर संजय सिंह माफी मांग लेते हैं तो उनका निलंबन वापस लिया जा सकता है.
लोकसभा में क्या है नियम?
- लोकसभा से भी किसी सांसद को एक दिन, कुछ दिन या फिर पूरे सत्र के लिए निलंबित किया जा सकता है. लोकसभा रूल बुक में ये अधिकार नियम 373 और 374 में है.
- नियम 373 के तहत सांसद को एक दिन के लिए निलंबित किया जा सकता है तो वहीं नियम 374 के तहत एक निश्चित अवधि और पूरे सत्र के लिए निलंबित करने का अधिकार लोकसभा अध्यक्ष को रहता है.
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