'गलत तरीके से पेश किया गया...', विवादित नारेबाजी पर घिरने के बाद JNU छात्रसंघ की सफाई

जेएनयू छात्र संघ (JNUSU) ने साबरमती हॉस्टल के बाहर हुई नारेबाजी की घटना पर बयान जारी किया है. छात्र संघ ने कहा कि इस घटना को विश्वविद्यालय की छवि खराब करने और असल मुद्दों से ध्यान भटकाने की साजिश बताया है. छात्र संघ ने मीडिया पर भी आरोप लगाए कि वे घटना को गलत तरीके से पेश कर रहे हैं. उन्होंने पुलिस की निष्क्रियता और हमलावरों की गिरफ्तारी न होने पर सवाल उठाए हैं.

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JNUSU ने साबरमती हॉस्टल के बाहर हुई नारेबाजी की घटना पर जारी किया बयान. (photo: ITG) JNUSU ने साबरमती हॉस्टल के बाहर हुई नारेबाजी की घटना पर जारी किया बयान. (photo: ITG)

श्रेया चटर्जी

  • नई दिल्ली,
  • 06 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:09 PM IST

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू) ने साबरमती हॉस्टल के बाहर सोमवार को आयोजित सभा में हुई विवादस्पद नारेबाजी पर अपना बयान जारी किया है. JNUSU ने इस घटना को विश्वविद्यालय को बदनाम करने और असल मुद्दों से ध्यान भटकाने की संगठित साजिश करार दिया है. छात्र संघ ने मीडिया पर इस घटना को गलत तरीके पेश करने और जेएनयू के खिलाफ झूठी अफवाह फैलाने का आरोप लगाया है.

जेएनयूएसयू के बयान में कहा गया कि 5 जनवरी 2020 को नकाबपोश गुंडों ने जेएनयू कैंपस में घुसकर साबरमती छात्रावास और अन्य क्षेत्रों में छात्रों तथा शिक्षकों पर हमला किया था. ये कोई झड़प नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण विरोध कर रहे लोगों पर खुला हमला था. जबकि इस मामले में पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है. छह साल बीत जाने के बाद भी हमलावरों की पहचान सबको पता होने के बावजूद कानून की नजर में वह आज भी नकाबपोश ही हैं.

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पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

जेएनयूएसयू ने बयान में सवाल उठाते हुए कहा, 'कोमल शर्मा और एबीवीपी के वह गुंडे कहां हैं, जिन्होंने नेशनल टेलीविजन पर हमले की योजना बनाने और उसे अंजाम देने की बात कबूल की थी?' उनका कहना है, 'दिल्ली पुलिस छोटे-मोटे विरोध प्रदर्शनों पर तो जेएनयूएसयू पदाधिकारियों के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज कर लेती है, लेकिन इस गंभीर मामले में छह साल बाद भी एक भी गिरफ्तारी नहीं कर पाई है. ये उनकी हमले में मिलीभगत को उजागर करता है.'

जेएनयूएसयू ने दावा किया कि हाल के सालों में लोकतांत्रिक प्रदर्शन के अधिकार को अपराध बनाने की प्रवृत्ति देखी गई है और छात्रों द्वारा उठाए गए सवालों को दबाने के लिए सभी तंत्रों का इस्तेमाल किया जा रहा है.

सभा को गलत तरीके से किया पेश

जेएनयूएसयू अपने बयान मीडिया के एक वर्ग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि 5 जनवरी 2026 को साबरमती छात्रावास (जो 2020 के हमले का मुख्य निशाना था) में जेएनयूएसयू ने 2020 की हिंसा की स्मृति को याद करते हुए एक कैंडल मार्च (जुलूस) आयोजित किया था, लेकिन कुछ न्यूज चैनल सच्चाई दिखाने के बजाय सरकार का पक्ष ले रहे हैं और शांतिपूर्ण सभा को गलत तरीके से पेश कर रहे हैं.

यूनियन ने इसे छात्रों के उत्पीड़न को तेज करने और जेएनयू की गरिमा को ठेस पहुंचाने की साजिश बताया है. JNUSU का तर्क है कि ये सब इसलिए किया जा रहा है, ताकि हिंसा और न्याय में देरी जैसे असली सवालों से आम जनता का ध्यान पूरी तरह भटक जाए.

जेएनयूएसयू ने साफ कर दिया है कि वे हमेशा शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक विरोध के पक्ष में खड़े रहेंगे. बयान में कहा गया है कि असहमति का अधिकार एक संवैधानिक अधिकार है और छात्र इसकी रक्षा करना बखूबी जानते हैं.

यूनियन ने उन सभी कोशिशों की निंदा की है जो छात्रों की आवाज को कुचलने के लिए तंत्र द्वारा की जा रही हैं. उन्होंने दोहराया कि वे अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल जारी रखेंगे और किसी भी तरह के संगठित दुष्प्रचार के सामने हार नहीं मानेंगे.

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