दुनिया में IFFCO का परचम, 300 सहकारी कंपनियों में नंबर वन पर पहुंची

इफको विश्व की शीर्ष 300 सहकारी समितियों में नंबर 1 सहकारी समिति है. यह रैंकिंग प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर कारोबार के अनुपात पर आधारित है.

Advertisement
दुनिया की टॉप सहकारी संस्था बनी IFFCO (फ़ोटो- @iffcokisan) दुनिया की टॉप सहकारी संस्था बनी IFFCO (फ़ोटो- @iffcokisan)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 21 जनवरी 2021,
  • अपडेटेड 7:22 PM IST
  • दुनिया की टॉप सहकारी संस्था बनी IFFCO
  • देश की जीडीपी में इफको का अहम योगदान
  • पिछले वित्त वर्ष में 65वें स्थान पर पहुंची थी इफको

इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड (इफको) विश्व की शीर्ष 300 सहकारी समितियों में नंबर एक सहकारी समिति है. यह रैंकिंग प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर कारोबार के अनुपात पर आधारित है. यह देश की जीडीपी और आर्थिक विकास में इफको के योगदान को दर्शाता है. 

इंटरनेशनल कोऑपरेटिव एलायंस (आईसीए) द्वारा प्रकाशित 9वें वार्षिक वर्ल्ड कोऑपरेटिव मॉनिटर रिपोर्ट के 2020 संस्करण के अनुसार, यह रैकिंग बताती है कि किसी उद्यम के कारोबार का देश की अर्थव्यवस्था में कितना योगदान है. लगभग 36,000 सदस्य सहकारी समितियों और करीब 7 बिलियन डॉलर के ग्रुप टर्नओवर के साथ इफको विश्व की सबसे बड़ी सहकारी समितियों में शामिल है. बता दें कि संपूर्ण कारोबार के मामले में इफको पिछले वित्त वर्ष के 125वें स्थान से चढ़कर 65वें स्थान पर पहुंच गई है.

Advertisement

आईसीए और द यूरोपियन रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑन कोऑपरेटिव एंड सोशल एंटरप्राइजेज ने आज एक अंतरराष्ट्रीय वेबिनार के दौरान वर्ल्ड कोऑपरेटिव मॉनिटर का 2020 संस्करण लांच किया है. यह आईसीए द्वारा प्रकाशित 9वीं वार्षिक रिपोर्ट है, जिसमें विश्व की प्रमुख सहकारी समितियों के आर्थिक और सामाजिक प्रभाव का जायजा लिया गया है. इसके साथ ही कोविड व जलवायु परिवर्तन जैसी वर्तमान वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए उनके द्वारा किए गए उपायों के विश्लेषण के आधार पर शीर्ष 300 की श्रेणी बनाई गई है.

इफको के प्रबंध निदेशक, डॉ. उदय शंकर अवस्थी ने कहा, "यह इफको व सहकारिताओं के लिए गर्व की बात है. भारतीय सहकारिता आंदोलन को आगे बढ़ाने की दिशा में हम सबके लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है. इफको में हम लोग पूरे देश के किसानों के विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं और भारतीय सहकारिता आंदोलन को मजबूत कर रहे हैं. हम इनोवेशन में विश्वास करते हैं, क्योंकि यह सफलता की कुंजी है. मैं इफको से जुड़े सभी लोगों और देश के सहकारी बंधुओं को इस उपलब्धि के लिए बधाई देता हूं."

Advertisement

इफको ने पिछले कई वर्षों से अंतरराष्ट्रीय सहकारिता मंच पर भारत को गौरवान्वित किया है. वैश्विक मंच पर इफको की मजबूत उपस्थिति है क्योंकि इफको के निदेशक आदित्य यादव आईसीए के वैश्विक निदेशक मंडल में इफको का प्रतिनिधित्व करते हैं. इफको में सहकारिता संपर्क विभाग के प्रमुख तरुण भार्गव इंटरनेशनल कोऑपरेटिव एन्ट्रीप्रीन्योरशिप थिंक टैंक (आईसीईटीटी) के अध्यक्ष और आईसीए की वैश्विक शाखा आईसीएओ की कार्यकारिणी समिति के सदस्य हैं. 

वर्ल्ड कोऑपरेटिव मॉनिटर (डब्ल्यूसीएम) एक परियोजना है, जिसे पूरे विश्व की सहकारी समितियों के मजबूत आर्थिक, संगठनात्मक और सामाजिक आंकड़े जुटाने के लिए तैयार किया गया है. 2020 में प्रकाशित वार्षिक अनुसंधान रिपोर्ट का यह 9वां संस्करण आईसीए द्वारा द यूरोपियन रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑन कोऑपरेटिव एंड सोशल एंटरप्राइजेज (यूरिस) के वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग से तैयार किया गया है.

यह रिपोर्ट मुख्यत: दो आधार पर तैयार की जाती है, एक अमेरिकी डॉलर में कारोबार के आधार पर और दूसरा जीडीपी पर कारोबार के आधार पर. उपलब्धता के अनुरूप शीर्ष 300 सहकारी समितियों का रोजगार आंकड़ा भी पेश किया जाता है. 

इंटरनेशनल कोऑपरेटिव एलायंस पूरे विश्व की सहकारी समितियों के बारे में जानकारी प्रदान करने वाला एक संगठन है. यह 110 देशों की 315 से अधिक सहकारी महासंघों और संगठनों का प्रतिनिधित्व करती है. आईसीए वैश्विक और क्षेत्रीय सरकारों और संगठनों के साथ मिलकर कार्य करती है ताकि सहकारी समितियों के गठन और विकास के लिए कानूनी माहौल तैयार किया जा सके.

Advertisement

इसका वैश्विक कार्यालय बेल्जियम के ब्रूसेल्स में है. इसके चार क्षेत्रीय कार्यालय (यूरोप, अफ्रीका, अमेरिका और एशिया-पेसिफिक) हैं. यह बैंकिंग, कृषि, मत्स्य, बीमा, स्वास्थ्य, आवास, उपभोक्ता सहकारी समिति तथा सेवा व उद्योग सहकारी समिति समेत कुल आठ क्षेत्रों में काम करता है. इंटरनेशनल कोऑपरेटिव एलायंस एक गैर-लाभकारी संगठन है, जिसकी स्थापना सहकारी सामाजिक उद्यम के मॉडल को आगे बढ़ाने के लिए वर्ष 1895 में की गई थी. 

यूरिस ट्रेन्टो (इटली) में एगजिस्ट एक रिसर्च संस्थान है. सहकारिताओं, सामाजिक उद्यमों और अन्य गैर-लाभकारी संगठनों के लिए ज्ञान, विकास और इनोवेशन को बढ़ावा देना तथा आर्थिक और सामाजिक विकास के क्षेत्र में ऐसे संगठनों के प्रभाव के बारे में बेहतर समझ विकसित करना इसका लक्ष्य है. यूरिस की गतिविधियों का उद्देश्य सहकारी व सामाजिक उद्यमों के क्षेत्र में टुकड़ों में हो रहे शोध को कम करना तथा वैज्ञानिक और सामाजिक बहसों में इस क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ाना है. 


Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement