LPG Cylinder Shortage: सरकार ने घरेलू रसोई गैस की बिना रुकावट सप्लाई पक्का करने के लिए Essential Commodities Act यानी ज़रूरी वस्तु अधिनियम (ECA) लागू किया है. इसके तहत रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल यूनिट्स को लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) का प्रोडक्शन ज़्यादा से ज़्यादा करने और ज़रूरी हाइड्रोकार्बन स्ट्रीम को LPG पूल में डालने का निर्देश दिया गया है.
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की तरफ से सोमवार देर शाम जारी किए गए इस निर्देश के मुताबिक, रिफाइनरियों को C3 और C4 स्ट्रीम के पूरे आउटपुट को LPG प्रोडक्शन की तरफ लगाना होगा, जिसमें प्रोपेन, ब्यूटेन, प्रोपलीन और ब्यूटेन शामिल हैं.
यह कदम घरेलू उपभोक्ताओं को रसोई गैस की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है, जिससे पेट्रोकेमिकल प्रोडक्शन के बजाय रसोई गैस की प्राथमिकता बनी रहे.
क्या बदलाव आएगा?
आदेश के तहत, इन स्ट्रीम्स की सप्लाई सिर्फ़ तीन सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियो- इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन को ही की जानी चाहिए, जो मिलकर देश में घरेलू LPG का लगभग पूरा डिस्ट्रीब्यूशन करती हैं.
मिनिस्ट्री ने रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स को भी इन स्ट्रीम्स को पेट्रोकेमिकल प्रोडक्शन या दूसरे डाउनस्ट्रीम इस्तेमाल के लिए डायवर्ट करने से रोक दिया है, जिससे घरेलू LPG सप्लाई को प्रायोरिटी दी जा सके.
'सिर्फ घरेलू कंज्यूमर्स को ही...'
ऑर्डर में कहा गया है कि LPG एक ज़रूरी घरेलू फ्यूल है, जिसका इस्तेमाल पूरे भारत में घरों में बड़े पैमाने पर होता है और इसकी बिना रुकावट अवेलेबिलिटी पक्का करना पब्लिक इंटरेस्ट में ज़रूरी है.
ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे यह पक्का करें कि इस अरेंजमेंट के तहत सोर्स की गई LPG सिर्फ़ घरेलू कंज्यूमर्स को ही सप्लाई की जाए.
मिनिस्ट्री ने कहा कि यह नया निर्देश 5 मार्च को जारी पहले के ऑर्डर की जगह लेगा और अगले ऑर्डर तक लागू रहेगा.
ECA क्या है?
एसेंशियल कमोडिटीज़ एक्ट, 1955 (ECA) सरकार का सालों से बढ़ती खाने की चीज़ों की कीमतों को कम करने, जमाखोरी रोकने और फ़ूड सिक्योरिटी बनाए रखने का एक तरीका रहा है.
साल 2020 में, संसद ने एक्ट में बदलाव किया, जिससे अनाज, दालें, आलू, प्याज, खाने के तिलहन और तेल को रेगुलेट करने की केंद्र की शक्तियों को सिर्फ़ युद्ध, अकाल, बहुत ज़्यादा कीमतों में बढ़ोतरी और गंभीर प्राकृतिक आपदा जैसी खास परिस्थितियों में ही सीमित किया जा सके. इसमें यह भी तय किया गया कि किसी भी खेती की उपज की स्टॉक लिमिट को सिर्फ़ बागवानी की उपज की रिटेल कीमत में 100% की बढ़ोतरी या खराब न होने वाली खेती की खाने की चीज़ों की रिटेल कीमत में 50% की बढ़ोतरी होने पर ही रेगुलेट किया जाएगा.
हालांकि, केंद्र ने तब से पांच बार ECA का इस्तेमाल किया है, जिसमें खाने की कीमतों पर लगाम लगाने और घरेलू ज़रूरतों को पूरा करने की ज़रूरत का हवाला देते हुए अनाज और गेहूं, चीनी के एक्सपोर्ट पर स्टॉक लिमिट लगाई गई है.
ऐश्वर्या पालीवाल