नए बजट से पहले बढ़े फिस्कल डिफिसिट के आंकड़े कितना परेशान करते हैं? : आज का दिन, 12 जनवरी

फिस्कल डिफिसिट में बढ़ोतरी को क्यों नहीं रोक पा रही है सरकार, आज से शुरु हो रहे ग्लोबल साउथ समिट का एजेंडा क्या है और उड़ीसा में तीन रूसी नागरिकों की मौत को लेकर पुलिस की कारवाई पर क्यों उठ रहे हैं सवाल? सुनिए 'आज का दिन' में.

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रोहित त्रिपाठी

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  • 12 जनवरी 2023,
  • अपडेटेड 8:41 AM IST

साल 2023 में अभी महज 12 दिन ही बीते है, नए काम शुरू होगे , नए सिरे से योजनाएं बनेंगी. केंद्र सरकार का नया बजट भी आएगा. 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन बजट 2023-2024 पेश करेंगी। लेकिन उससे पहले कुछ समस्याएं हैं, पिछले बरस की, जो आंकड़ों के तौर पर समझ लीजिए. कहा जा रहा है कि इस बार फिस्कल डेफिसिट यानी सरकारी खजाने का घाटा सरकारी अनुमान से ज़्यादा रहने की उम्मीद है. और हर बरस बढ़ता डेफिसिट ओवरऑल देश के कर्जे में इजाफा कर रहा है. अब इसका कारण समझ लीजिए. ऑन एन एवरेज देश भर में 2577 करोड़ रुपए हर दिन कर्जे भरने में खर्च किये जाते हैं जो शिक्षा और स्वास्थ्य पर होने वाले खर्च से भी ज़्यादा है.  साल 2019 से लगातार देश का फिसिकल डेफिसिट बढ़ता जा रहा है. अब इस बार भी जब नम्बर्स इसी तरफ़ इजाफा कर रहे हैं सरकार की ये मुसीबत बढ़ेगा. किस तरह से हुआ ये इज़ाफ़ा और ये आंकड़े कितना चिंतित करते हैं? 'आज का दिन' में सुनने के लिए क्लिक करें. 

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NAM यानि नॉन एलाइनमेंट मूवमेंट. ऐसा ग्रूप जिसमें यूरोप और उत्तरी अमेरिका को छोड़ बाकी 120 देश इसका हिस्सा हैं. 1961 में हुए Belgrade Conference के बाद जब ये ग्रुप बना उसके बाद से ही भारतीय प्रधानसंत्री नॉन एलाइनमेंट मूवमेंट के समिट में शामिल होते रहते हैं, लेकिन 2016 और 2019 से इसमें बदलाव आया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसमें शामिल नहीं हुए. इस कदम को नहरूवियन विदेश नीति में एक परिवर्तन के तौर पर देखा गया. अब आज से  Voice of Global South summit की शुरुआत हो रही है जिसमें वही नॉन एलाइनमेंट मूवमेंट के 120 देश शामिल हैं. खास बात ये है कि इस समिट को भारत होस्ट कर रहा है. ये समिट वर्चुअली होने वाली है और पीएम नरेंद्र मोदी इसकी अध्यक्षता करेंगे. तो एक वक्त भारत जिसने नहरूवियन विदेश नीति को छोड़ने की ओर कदम बढ़ाया था, उसी भारत ने रूस-यूक्रेन युद्ध में न्यूट्रल स्टैंड अपनाते हुए नहरूवियन विदेश नीति को अपनाया जिसकी दुनिया में सरहाना भी हुई. क्या फोकस रहने वाला है समिट का? 'आज का दिन' में सुनने के लिए क्लिक करें. 

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किसी भी देश में फोरेनर्स का मरना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुद्दा बनने के लिए पर्याप्त है. एक ही मौत भयंकर कंट्रोवर्सी क्रियेट कर देती है. लेकिन भारत के उड़ीसा में इससे भी ज्यादा कुछ हो चुका है. एक के बाद एक तीन रूसी नागरिकों की मौत. पहले लाश होटल से बरामद की जाती हैं, पुलिस और रशियन अम्बेसी भी इसे हार्ट अटैक बताती है. पहली मौत के दो दिन बाद उसी होटल के सामने एक दूसरे रशियन की लाश अंडर कंस्ट्रक्शन बिल्डिंग में मिलती है.कहा जाता है मरने वाले ने खुदकुशी के लिए तीसरी मंजिल से छलांग लगा ली.ये 21 और 24 दिसंबर की बात है. और अब इस महीने तीसरी मौत. तीन जनवरी को रायगढ़ के होटल साईं इंटरनेशनल से दूर प्रदीप पोर्ट पर होती है. मरने वाले की पहचान 51 साल के मिलायकोव सर्गे के तौर पर हुई. मिलायकोव एमबी अल्दना जहाज़ के चीफ इंजीनियर थे. ये जहाज़ बांग्लादेश के चिटगांव पोर्ट से प्रदीप पोर्ट के रास्ते मुंबई जा रहा था. उसी जहाज के केबिन में इनकी लाश मिली. हैरत अंगेज ये है है कि पुलिस और रशियन अधिकारियों को अब तक इसमें कुछ भी संदिग्ध नजर नहीं आ रहा, हालांकि घटना की जांच के लिए टीम बना दी गई है लेकिन फिर भी जांच और पुलिस की कारवाई सवालों के घेरे में है. अब तक इस मामले के क्या डिटेल्स सामने आए हैं, इन तीनों मौतों के बारे में पुलिस क्या कह रही है और इन तीनों में आपसी कनेक्शन क्या था?  'आज का दिन' में सुनने के लिए क्लिक करें. 

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