पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत सरकार की पाकिस्तानी नागरिकों को भारत छोड़ने की समय-सीमा खत्म हो गई है. अब पुलिस ने भारत में अवैध रूप से रह रहे पाकिस्तानी नागरिकों को डिपोर्ट कर उनके देश भेजना शुरू कर दिया है. इसी बीच बेंगलुरु में रहने वाले एक परिवार ने अपने निर्वासन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और कहा कि उनका परिवार भारतीय नागरिक है.
बेंगलुरु निवासी एक परिवार ने अपने निर्वासन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए याचिका दायर की है. अदालत ने उनकी इस याचिका को स्वीकार कर शुक्रवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर लिया है. याचिकाकर्ता का कहना है कि वह भारतीय नागरिक है और उसके परिवार को अवैध रूप से गिरफ्तार किया गया है.
याचिकाकर्ता ने किए ये दावे
याचिकाकर्ता ने दावा किया कि वह और उनका परिवार साल 1997 तक मीरपुर के निवासी थे. याचिकाकर्ता ने छठी कक्षा तक मीरपुर में पढ़ाई की है. इसके बाद वह साल 2000 में श्रीनगर चले गए और 2009 तक श्रीनगर में रहे. इसके बाद साल 2009 में कॉलेज के लिए वह बेंगलुरु चले गए. उनके भाई-बहनों की शिक्षा श्रीनगर के एक निजी स्कूल में हुई है.
याचिकाकर्ता का कहना है कि वह और उसके परिवार के पांच सदस्य सभी भारतीय नागरिक हैं और उनके पास गृह मंत्रालय द्वारा जारी भारतीय पासपोर्ट है.
FRO के दावे अवैध और निराधार: याचिकाकर्ता
पाकिस्तानी नागरिकों को भारत छोड़ने का निर्देश देने वाले गृह मंत्रालय के आदेश के बाद, उनमें से प्रत्येक को नोटिस जारी किया गया. याचिका में कहा गया है कि FRO ने अवैध और निराधार तरीके से दावा किया है कि वह और उनके परिवार के सदस्य पाकिस्तानी नागरिक हैं और उन्होंने साल 1997 में भारत में प्रवेश किया था. अब वीजा की अवधि खत्म होने पर उन्हें भारत छोड़ने की बाध्यता थी.
'J-K पुलिस ने किया गिरफ्तार'
याचिकाकर्ता का कहना है कि उनके पिता, मां, बहन और उसके छोटे भाई को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने 29 अप्रैल को लगभग 9 बजे अवैध रूप से गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद उन्हें 30 अप्रैल को करीब दोपहर 12 बजकर 20 मिनट पर भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर ले जाया गया, उन्हें बॉर्डर से भारत छोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है.
वहीं, याचिकाकर्ता के वकील का दावा है कि उनके परिवार के 6 सदस्यों के पास भारतीय आधार कार्ड, पैन कार्ड है, लेकिन उन्हें निर्वासित किया जा रहा है.
सृष्टि ओझा