दिल्ली दंगों की साजिश से जुड़े चर्चित UAPA केस में सुप्रीम कोर्ट ने अहम कदम उठाया है. आरोपी तस्लीम अहमद की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. अदालत ने पुलिस से पूछा है कि आरोपी को क्यों ना जमानत दी जाए. जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीवी वराले की बेंच अगले महीने इस मामले की आगे सुनवाई करेगी.
इससे पहले तस्लीम अहमद को राहत नहीं मिल सकी थी. 2022 में निचली अदालत ने जमानत याचिका खारिज कर दी थी. सितंबर 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट ने भी जमानत देने से इनकार कर दिया था. हाईकोर्ट के फैसले के बाद तस्लीम ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया.
UAPA के तहत दर्ज है केस
तस्लीम अहमद के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत एफआईआर दर्ज है. आरोप है कि वह दिल्ली दंगों की कथित साजिश में शामिल था.
उसी केस में अन्य आरोपियों में उमर खालिद, शरजील इमाम, मोहम्मद सलीम खान, शिफा उर रहमान, अतहर खान, मीरान हैदर, शादाब अहमद, अब्दुल खालिद सैफी और गुलफिशा फातिमा के नाम भी शामिल हैं.
आरोपी का क्या है दावा?
याचिकाकर्ता तस्लीम अहमद का कहना है कि वह केवल नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) का विरोध कर रहा था. उसका दावा है कि उसे गलत तरीके से इस मामले में फंसाया गया.
तस्लीम को 24 जून 2020 को गिरफ्तार किया गया था. उस पर आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त रहने के आरोप लगाए गए हैं.
संजय शर्मा