शपथ लेने के लिए इंजीनियर राशिद को नहीं मिली जमानत, 1 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

इंजीनियर राशिद 2016 के जम्मू-कश्मीर आतंकी फंडिंग मामले में गिरफ्तार हैं और इस वक्त जेल में हैं. उन्होंने जेल से ही लोकसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की है. अब संसद में बतौर सांसद शपथ लेने के लिए उन्होंने अंतरिम जमानत याचिका लगाई है.

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इंजीनियर राशिद ने उमर अब्दुल्ला को हराकर लोकसभा चुनाव जीता है (फाइल फोटो) इंजीनियर राशिद ने उमर अब्दुल्ला को हराकर लोकसभा चुनाव जीता है (फाइल फोटो)

सृष्टि ओझा

  • नई दिल्ली,
  • 22 जून 2024,
  • अपडेटेड 4:12 PM IST

दिल्ली की अदालत ने लोकसभा सांसद के रूप में शपथ लेने के लिए इंजीनियर राशीद द्वारा दायर अंतरिम जमानत याचिका को स्थगित कर दिया है. इस मामले में अगली सुनवाई 1 जुलाई को होगी. इंजीनियर राशिद 2016 के जम्मू-कश्मीर आतंकी फंडिंग मामले में गिरफ्तार हैं और इस वक्त जेल में हैं. उन्होंने जेल से ही लोकसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की है. अब संसद में बतौर सांसद शपथ लेने के लिए उन्होंने अंतरिम जमानत याचिका लगाई है. एनआईए द्वारा अपना जवाब दाखिल करने के लिए और समय मांगने के बाद मामला स्थगित कर दिया गया. 

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सांसद के रूप में शपथ लेने के लिए अंतरिम जमानत की मांग करने वाली याचिका पर अदालत ने शनिवार को दलीलें सुनीं.  इंजीनियर राशिद के नाम से मशहूर शेख अब्दुल राशिद ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ते हुए 2024 के लोकसभा चुनावों में बारामूला में नेशनल कॉन्फ्रेंस के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को हराकर जीत हासिल की है. 

जम्मू-कश्मीर टेरर फंडिंग केस में राशिद को 2016 में गिरफ्तार किया गया था. वह सांसद के रूप में शपथ लेने के लिए अंतरिम जमानत की मांग कर रहे हैं. अदालत ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया कि वह कौन सी तारीख है जिस दिन इंजीनियर राशिद को शपथ लेनी है. अब इस मामले पर 22 जून को विचार किया जाएगा. कथित आतंकी फंडिंग मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम), 1967 अधिनियम (UAPA) के तहत आरोप लगाए जाने के बाद इंजीनियर राशिद 2019 से जेल में हैं. 

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राशिद का नाम कश्मीरी व्यवसायी जहूर वटाली की जांच के दौरान सामने आया था, जिसे एनआईए ने घाटी में आतंकवादी समूहों और अलगाववादियों को कथित रूप से फंडिंग करने के आरोप में गिरफ्तार किया था. एनआईए ने इस मामले में कश्मीर के अलगाववादी नेता यासीन मलिक, आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद और हिजबुल मुजाहिदीन प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन सहित कई लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था. या​सीन मलिक पर लगे आरोपों के लिए दोषी ठहराते हुए 2022 में एक ट्रायल कोर्ट ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी.
 

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