देश की सर्वोच्च अदालत ने कृषि कानूनों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है. सुप्रीम कोर्ट ने धरने पर बैठे किसानों से बात करने के लिए चार सदस्यों वाली एक कमेटी का गठन किया है. चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने कहा कि अगले आदेश तक इन तीनों कृषि कानूनों के लागू होने पर रोक लगी रहेगी.
चीफ जस्टिस की अगुवाई में तीन जजों की बेंच इस मामले में दाखिल याचिका की सुनवाई कर रही है. सुनवाई के दौरान दलीलों का लंबा दौर चला. इस दौरान किसान यूनियन के वकील नरसिम्हन ने कहा कि एक प्रतिबंधित संगठन भी इस आंदोलन को समर्थन दे रहा है. इस पर कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल से पूछा क्या आप इसके बारे में जानते हैं?
इस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि मेरी जानकारी के मुताबिक एक प्रतिबंधित संगठन है जो आंदोलनकारियों को भटकाने में मदद कर रहा है. करनाल में जो घटना हुई ये उसी का एक उदाहरण है. कर्नाटक और दूसरे दक्षिण राज्य में किसान इन कानूनों का समर्थन कर रहे हैं. किसान संगठन 26 जनवरी को दिल्ली में एंट्री लेना चाहते हैं. वो कहां जाएंगे किसको पता. एक बार दिल्ली में आ जायेंगे तो उनको ट्रैक करना मुश्किल है.
इस पर चीफ जस्टिस ने अटॉर्नी जनरल से कहा कि प्रतिबंधित संगठन को लेकर आप हलफनामा दायर करें. पूरी जानकारी हमें चाहिए. हम पहले दिन से कह रहे हैं कि कानून व्यवस्था बनाए रखना पुलिस का काम है, वो करेंगे. इसमें हमारा कोई दखल नहीं होगा. 26 जनवरी को किसानों की ट्रैक्टर रैली को लेकर दाखिल केंद्र सरकार के हलफनामे पर सुप्रीम कोर्ट ने किसान संगठनों को नोटिस जारी किया.
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अटॉर्नी जनरल ने कहा कि हम किसे नोटिस दें, चारों वकील तो पेश नहीं हुए. इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि आप पक्षों को दें. सोमवार को सुनवाई करेंगे. मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हम अपने हिसाब से कमेटी का गठन करेंगे. कमेटी में कौन होगा कौन नहीं ये अब हम तय करेंगे. उन्होंने कहा कि हम इस बारे में सभी की राय को संतुष्ट या खुश करने के लिए समिति का गठन नहीं कर रहे हैं. हम अपने उद्देश्य के लिए समिति का गठन कर रहे हैं.
अनीषा माथुर