Bihar: 7 साल के बच्चे को ससुराल वालों ने 2 बार डेड घोषित करवा दिया, जिंदा होने का सबूत लेकर मां पहुंची कोर्ट

बिहार के गया जिले में 27 साल की महिला ने पटना हाईकोर्ट के समक्ष दो बार मृत घोषित हो चुके अपने बच्चे को जिंदा साबित कर दिया. महिला ने बच्चे की मौजूदा तस्वीरें अदालत में पेश की है.

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पटना हाईकोर्ट पटना हाईकोर्ट

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 28 सितंबर 2022,
  • अपडेटेड 1:30 PM IST

बिहार के गया जिले से हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. एक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद 27 साल की एक महिला को अपना बेटा मिलने की उम्मीद है. साल 2015 में महिला पर अपने पति की हत्या करने का आरोप लगा था. उस समय महिला के बेटे की उम्र महज पांच महीने थी. अब बच्चे की उम्र सात साल है.

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महिला मुन्नी देवी बेटे की कस्टडी के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी है. दरअसल महिला के ससुराल पक्ष ने पटना हाईकोर्ट के समक्ष इस बच्चे का मृत्यु प्रमाणपत्र दो बार पेश किया था. ससुराल पक्ष का दावा रहा है कि बच्चे की मौत हो चुकी है. लेकिन पुलिस को अब महिला का बेटा उसके ससुराल पक्ष के पास ही मिला है. फिलहाल बच्चे को गवर्मेंट होम में रखा गया है. 

जेल से बाहर निकलने के बाद बेटे की कस्टडी की लड़ाई लड़ी

पति की हत्या के आरोप में जेल में बंद महिला ने बाहर निकलने के बाद अपने बच्चे की कस्टडी के लिए पटना हाईकोर्ट का रुख किया था. महिला ने अपने बेटे की ताजा तस्वीरें अदालत के समक्ष पेश की ताकि यह सिद्ध किया जा सके वह जिंदा है. 

महिला के वकील अविनाश कुमार सिंह ने कहा, जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्ला और जस्टिस पूर्णेंदु सिंह की पीठ ने 12 सितंबर को अपने मौखिक आदेश में कहा कि अदालत बच्चे की सुरक्षा को लेकर चिंतित है.

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अदालत के आदेश के बाद बच्चे को ढूंढ़ा गया और फिलहाल उसे गया के बाल कल्याण केंद्र में रखा गया है. महिला मुन्नी देवी ने बताया, हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब मैं अपने बेटे से दोबारा मिल पाऊंगी. मामले की अगली सुनवाई 11 अक्टूबर को है. जब मुझे जेल भेजा गया तो मुझे मेरे पांच महीने के बेटे से अलग कर दिया गया था. 

हालांकि, अदालत ने अपने ताजा आदेश में मामले की अगली सुनवाई 11 अक्टूबर को मुकर्रर की है. अदालत ने साफतौर पर यह नहीं कहा है कि महिला को किस दिन उनके बेटे से मिलाया जाएगा.

बता दें कि महिला ने जब अपने बेटे की कस्टडी मांगी थी तो उसे बताया गया था कि उसके जेल जाने के बाद ही उसके बेटे की मौत हो गई थी. 

मुन्नी देवी ने कहा, पुलिस, नगरपालिका और स्थानीय पंचायत के साथ मिलीभगत के बाद मेरे सास-ससुर ने अदालत के समक्ष एक बार नहीं बल्कि दो बार बेटे की फर्जी मौत का सर्टिफिकेट पेश किया था.

गया के पुलिस अधीक्षक ने हाईकोर्ट को बताया कि जाली दस्तावेजों के संबंध में एफआईआर दर्ज की गई है. 

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