SIR पर सुप्रीम कोर्ट में आज अहम सुनवाई हुई. इस दौरान कोर्ट में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता ना केवल मौजूद रहीं बल्कि अपनी दलील भी कोर्ट के सामने रखीं. कोर्ट ने चुनाव आयोग और सीईओ बंगाल सहित पक्षकारों को नोटिस जारी करते हुए सोमवार को अगली सुनवाई की तारीख तय की है.
इससे पहले ममता बनर्जी ने कहा कि चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल को टारगेट किया जा रहा है. ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने इलेक्शन से ठीक पहले इतनी बड़ी प्रक्रिया को जल्दबाजी में लागू किया जबकि ऐसा काम सामान्य तौर पर वर्षों में पूरा होता है.
ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट के सामने चुनाव आयोग को ‘व्हाट्सऐप आयोग’ तक कह डाला. ममता बनर्जी ने कहा, 'चुनाव आयोग… माफ कीजिए, ‘व्हाट्सऐप आयोग’ यह सब कर रहा है. लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं. बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है.' ममता ने कहा,' हम न्याय के लिए आए हैं निर्वाचन आयोग को भी हमने सभी कुछ बताया लेकिन कोई सुन नहीं रहा.' सीजेआई ने बीच में ही टोकते हुए कहा, 'मैडम ममता! आप लोगों की ओर से कपिल सिब्बल और अन्य वकील आपकी दलीलें दे रहे हैं. आप जो बता रही हैं उसे विस्तार से सिब्बल बता चुके हैं.'
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ममता की याचिका पर SC ने ECI को नोटिस जारी किया है जिस पर ECI सोमवार को जवाब दाखिल करेगा. पश्चिम बंगाल सरकार डेप्यूट करने के लिए उपलब्ध क्लास 2 अधिकारियों की लिस्ट देगी. अब इस मामले की अगली सुनवाई सोमवार यानि 9 फरवरी को होगी.
CJI ने कहा, 'पश्चिम बंगाल सरकार उन SDM और क्लास-2 अधिकारियों की सूची दे, जिन्हें प्रतिनियुक्त किया जा सकता है. अगर अधिकारी उपलब्ध हैं, तो शायद माइक्रो ऑब्ज़र्वर्स की ज़रूरत नहीं पड़ेगी.एक ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता, प्रसिद्ध लेखक को भी नोटिस जारी किया गया है, कृपया इस तरह की चीज़ें देखिए. हर राज्य में कुछ नए मुद्दे होते हैं.'
ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट के सामने चुनाव आयोग को ‘व्हाट्सऐप आयोग’ कहा. ममता बनर्जी ने कहा, 'चुनाव आयोग… माफ कीजिए, ‘व्हाट्सऐप आयोग’ यह सब कर रहा है. लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं. बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है.'
ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट की बेंच के सामने टैगोर का उद्धरण दिया. CJI ने कहा, “सैद्धांतिक रूप से अगर ऐसा हो रहा है कि रॉय, दत्ता, गांगुली आदि के नाम अलग-अलग तरह से लिखे जा रहे हैं… तो हम यह भी नहीं जानते कि आजकल टैगोर कैसे लिखा जा रहा है-कुछ लोग ‘E’ लगाते हैं, कुछ नहीं.” ममता बनर्जी ने कहा, “अगर आप अनुमति दें तो मैं प्रमुख बंगाली अखबारों में छपी कुछ तस्वीरें दिखा सकती हूं. Mismatch को mismap किया जा रहा है. अगर बेटी शादी के बाद ससुराल जाती है और पति का उपनाम इस्तेमाल करती है, तो उसे भी mismatch दिखाया जा रहा है. बेटी के ससुराल शिफ्ट होने पर भी नाम mismatch बताकर हटाया जा रहा है. काम के लिए लोग पता बदलते हैं, तो उसे भी ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ बताकर नाम हटाया जा रहा है.यह पूरी प्रक्रिया ‘डिस्क्रेपेंसी मैपिंग’ है. बंगाल के लोग बहुत खुश थे कि इस अदालत ने आधार कार्ड, डोमिसाइल सर्टिफिकेट और सरकारी आवास कार्ड स्वीकार करने का आदेश दिया. लेकिन चुनाव से ठीक पहले सिर्फ बंगाल को ही निशाना बनाया जा रहा है. 24 साल बाद इतनी जल्दबाजी क्यों? जो काम दो साल में होना था, उसे चार महीने में क्यों किया जा रहा है? फसल कटाई के मौसम में, पूजा के समय-जब लोग शहर में नहीं थे,तब नोटिस जारी कर दिए गए.”
ममता बनर्जी ने कोर्ट से बोलने की अनुमति मांगते हुए कहा कि मैं समझा सकती हूं क्योंकि मैं उस राज्य से हूं. इस पर सीजेआई ने कहा- 'इसमें कोई शक नहीं कि आप वहीं से हैं.' इस पर ममता ने कहा, 'मुझे बोलने की इजाज़त देने के लिए बेंच का धन्यवाद. समस्या यह है कि वकील हमेशा केस के लिए लड़ते हैं जब सब कुछ खत्म हो जाता है. जब हमें न्याय नहीं मिल रहा होता है. न्याय दरवाज़ों के पीछे रो रहा होता है. मैंने ECI को 6 चिट्ठियां लिखीं लेकिन कोई जवाब नहीं आया. मैं कोई बहुत महत्वपूर्ण शख्सियत नहीं हूं, मैं एक बंधुआ मज़दूर हूं. लेकिन मैं अपनी पार्टी के लिए नहीं लड़ रही हूं.मैं एक आम इंसान हूं.'
इस पर सीजेआई ने कहा, 'पश्चिम बंगाल राज्य ने भी एक याचिका दायर की है.. SC के सबसे अच्छे वकील राज्य का प्रतिनिधित्व करने के लिए मौजूद हैं. कपिल सिब्बल, गोपाल शंकरनारायणन और श्याम दीवान सहित एक अनुभवी कानूनी टीम इस मामले में कोर्ट की मदद कर रही है...'
CJI ने नामों में असंगति के मामलों का जिक्र करते हुए पूछा कि क्या अदालत ऐसे मामलों से निपट रही है, जहां उपनामों की स्पेलिंग अलग-अलग लिखी गई है- जैसे 'Datta'और 'Dutta' या 'Sharma' और 'Sarma'. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दिवान ने जवाब दिया कि यही वे वास्तविक उदाहरण हैं, जिनका सामना मतदाता जमीनी स्तर पर कर रहे हैं. हालांकि, CJI ने टिप्पणी की कि इस स्तर पर नोटिस वापस लेने का निर्देश देना व्यावहारिक नहीं होगा, क्योंकि नोटिस पहले ही जारी किए जा चुके हैं.
ममता ने SC को बताया कि लिस्ट में शामिल डॉक्यूमेंट्स स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं. ममता की तरफ से कहा गया कि लॉजिकल गड़बड़ी की गैर-कानूनी कैटेगरी का इस्तेमाल 3.6 करोड़ लोगों को नोटिस जारी करने के लिए किया गया. कोर्ट से मांग की गई कि वह ECI को निर्देश दें कि वोटर को फ्लैग करने और नोटिस जारी करने के कारण का विवरण दें. ममता के वकील दीवान ने कहा कि नोटिस पर कोई छोटा सा कारण होना चाहिए ताकि लोगों को पता चल सके कि वे लिस्ट में क्यों नहीं हैं?
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है. ममता बनर्जी कोर्टरूम में सबसे आगे की पंक्ति में बैठी हैं. ममता बनर्जी की तरफ से पेश हुए एडवोकेट श्याम दीवान ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में तत्काल दिशा-निर्देश की मांग की.
ममता बनर्जी के मामले पर अब लंच के बाद सुनवाई हो सकती है.SC बेंच के मामलों का शेड्यूल बदला गया.पहले इस बेंच को सिर्फ दोपहर 1 बजे तक बैठना था लेकिन अब बेंच पूरे दिन बैठेगी. (इनपुट-अनीशा)
सुप्रीम कोर्ट में SIR की सुनवाई से पहले ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में नई अर्जी दाखिल की. ममता बनर्जी ने ECI को वोटर लिस्ट से कोई भी नाम हटाने से रोकने के लिए कोर्ट से तुरंत निर्देश देने की मांग की है. ताज़ा अर्जी में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल राज्य में चल रही SIR प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर वोटरों के नाम काटे जाने का खतरा है. अर्जी में कहा गया है कि ECI ने लोगों के आवेदनों में मामूली गलतियों के लिए भी कई लोगों को सर्कुलर जारी किए हैं ममता ने SC से तीन मुख्य गुहार लगाई है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि 2022 की वोटर लिस्ट से किसी भी वोटर का नाम न हटाया जाए. यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी वोटर का वोट देने का अधिकार न छीना जाए. (इनपुट- संजय शर्मा)
ममता बनर्जी जैसे ही वह सुप्रीम कोर्ट (SC) में दाखिल हुईं, बनर्जी को अपनी टीम से कहते हुए सुना गया,“मैं पीछे बैठूंगी, बिल्कुल पीछे.” दिलचस्प दृश्य ये रहा कि चुनाव आयोग (EC) से मुलाकात के दौरान बनर्जी ने काली शॉल ओढ़ी हुई थी. उनके प्रतिनिधिमंडल के सभी सदस्यों, जिनमें कथित SIR पीड़ित भी शामिल थे, को भी ऐसी ही काली शॉल दी गई थी. आज सुप्रीम कोर्ट में वह काला स्टोल लिए नजर आईं.
सुप्रीम कोर्ट में SIR की सुनवाई और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के SC के सामने पेश होने पर, शिवसेना (UBT) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, "...जिस तरह से पश्चिम बंगाल और दूसरे चुनाव वाले राज्यों में SIR किया जा रहा है, वह एकतरफा तरीके से किया जा रहा है. चुनाव आयोग वही कर रहा है जो BJP उनसे करने को कह रही है. ED, CBI और IT पहले से ही यह कर रहे थे अब EC भी इसमें शामिल हो गया है. मैं ममता बनर्जी जो कर रही हैं, उसका समर्थन करती हूं. वह सामने से कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं. अगर BJP की यह मनमानी जारी रही, तो हम यह लड़ाई लड़ेंगे."
ममता बनर्जी अपने आवास से सुप्रीम कोर्ट लिए रवाना हो गई हैं. ममता बनर्जी के साथ अभिषेक बनर्जी भी मौजूद हैं. CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और विपुल पंचोली की बेंच आज इस मामले की सुनवाई करेगी. (इनपुट- श्रेया)
आज होने वाली 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) मामले की अहम सुनवाई से पहले सुप्रीम कोर्ट परिसर के बाहर सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त कर दी गई है. सुप्रीम कोर्ट की ओर जाने वाली मुख्य सड़क, भगवान दास रोड पर अतिरिक्त सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है. पुलिस ने बैरिकेडिंग और सघन चेकिंग के जरिए घेराबंदी की है. (इनपुट- नलिनी)
ममता बनर्जी कानून स्नातक यानी LLB डिग्री होल्डर हैं. लेकिन उन्होंने किसी State Bar Council में Enrollment नहीं कराया. All India Bar Examination (AIBE) पास नहीं किया. Bar Council of India से Certificate of Practice (CoP) नहीं लिया. इसीलिए वे प्रैक्टिसिंग एडवोकेट नहीं मानी जातीं.कानूनी भाषा में कहें तो ममता बनर्जी Law Graduate हैं. लेकिन एडवोकेट नहीं हैं.
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सूत्रों के अनुसार, ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट में मामले में बहस करने के लिए CJI से इजाज़त मांग सकती हैं. ममता ने कहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट के तौर-तरीकों और प्रक्रिया से पूरी तरह वाकिफ हैं और तय नियमों और चलन के मुताबिक व्यवहार करने का वादा करती हैं. इतना ही नहीं ममता ने कहा कि कि वह राज्य में चल रही SIR प्रक्रिया के कारण पश्चिम बंगाल के निवासियों को होने वाली ज़मीनी हकीकत से वाकिफ हैं.