पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में कथित जबरन गुमशुदगियों को लेकर तनाव और बढ़ गया है. हब शहर में छह बलूच नागरिकों के परिवारों ने लासबेला प्रेस क्लब के बाहर प्रदर्शन किया और अपने लापता परिजनों को तुरंत रिहा करने की मांग की. लापता लोगों में महिलाएं और नाबालिग भी शामिल हैं, जिससे इलाके में डर और गुस्सा दोनों बढ़ गया है.
परिवारों का आरोप है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बल उनके रिश्तेदारों को बिना किसी नोटिस, आरोप या कानूनी प्रक्रिया के उठा ले गए. जिन लोगों के लापता होने की बात कही जा रही है, उनके नाम नसरीन बलूच, हानी बलूच, हैर निसा बलूच, फातिमा बलूच, फरीद बलूच और मुजाहिद बलूच बताए गए हैं. परिजनों का कहना है कि इन घटनाओं के बाद उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह बिखर गई है और वे लगातार मानसिक तनाव में जी रहे हैं.
यह भी पढ़ें: पाकिस्तान में टूटने की आहट: आसिम मुनीर के 'टुकड़े-टुकड़े' प्लान से सिंध-बलूचिस्तान में गुस्सा, गिलगित में फिर बवाल?
प्रदर्शन कर रहे लोगों ने सवाल उठाया कि अगर उनके परिजनों ने कोई अपराध किया है, तो उन्हें अदालत में पेश क्यों नहीं किया जा रहा. उनका कहना है कि किसी को गुप्त रूप से हिरासत में रखना पाकिस्तान के संविधान और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों दोनों का उल्लंघन है.
पुलिस ने FIR दर्ज करने से किया इनकार!
परिवारों ने यह भी बताया कि जब वे थाने में शिकायत दर्ज कराने गए, तो पुलिस ने FIR लिखने से मना कर दिया. एक महिला प्रदर्शनकारी ने कहा कि जब शिकायत दर्ज कराने का अधिकार ही नहीं मिलेगा, तो इंसाफ की उम्मीद कैसे की जा सकती है. इसी वजह से उन्हें सड़क पर उतरकर विरोध करना पड़ा.
यह भी पढ़ें: हम भी PAK के सताए हुए, भारत के खिलाफ ISI से कभी हाथ नहीं मिलाया, 'धुरंधर' पर बलूचिस्तान क्यों नाराज?
अंतरराष्ट्रीय संगठनों से मदद की अपील
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन ने लापता लोगों के बारे में साफ जानकारी नहीं दी, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा. उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से भी मदद की अपील की है. बलूच यकजहती कमेटी की नेता फौजिया बलूच ने कहा कि बलूचिस्तान में महिलाओं की गुमशुदगी बेहद गंभीर मामला है और जब तक यह अन्याय खत्म नहीं होता, संघर्ष जारी रहेगा.
aajtak.in