केंद्र सरकार ने गुरुवार को लोकसभा में वक्फ बोर्ड संशोधन बिल पेश किया. इस बिल के सदन में पेश होते ही वक्फ बोर्ड एक बार फिर से चर्चा में है. इस संशोधन बिल को मुस्लिम विरोधी बताकर इसका विरोध किया जा रहा है. इस बिल को अब संसद की संयुक्त समिति (JPC) के पास भेज दिया गया है. आईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने वक्फ बोर्ड में संशोधनों के खिलाफ खुलकर अपनी बात रखी है.
ओवैसी ने कहा कि वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर केंद्र सरकार लगातार सवाल उठा रही है. वक्फ बोर्ड की तुलना छोटे-छोटे खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्थाओं से की जा रही है. भारत बहुत बड़ा देश है, इसकी छोटे-छोटे गल्फ देशों से तुलना करना गलत है. सरकार का यह संशोधन बिल संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 25 के नियमों का उल्लंघन करता है. यह बिल संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन करता है.
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार कह रही है कि अब से वक्फ बाई यूजर नहीं होगा. इसका मतलब है कि वक्फ बोर्ड को अपनी संपत्ति दान करने वाला शख्स पांच साल तक मुस्लिम रहना जरूरी है. लेकिन हिंदू समाज में तो ऐसा नहीं होता. बिहार एंडोमेंट में तीन बोर्ड हैं, हिंदू एंडोमेंट बोर्ड, श्वेतांबर जैन एंडोमेंट बोर्ड और दिगांबर एंडोमेंट बोर्ड. इनके सदस्य कौन बनते हैं? क्या इनके सदस्य मुसलमान बन सकते हैं? नहीं बन सकते हैं. पंजाब और हरियाणा में जाइए, क्या वहां गुरुद्वारा कमेटी में मुस्लिम सदस्य बन सकता है? नहीं बन सकता है. भारत का कोई भी नागरिक अपनी संपत्ति किसे दे, इसे लेकर कोई कानून नहीं है. कोई गिफ्ट भी कर सकता है. हमारे हिंदू भाई तो वसीयत के जरिए अपनी एक औलाद को पूरी संपत्ति दे सकते हैं. सरकार ये जो काम कर रही है, वो संविधान की धारा 14, 15 और 25 के खिलाफ है.
वक्फ की प्रॉपर्टी छीनना चाहती है सरकार
वक्फ की संपत्ति बढ़ने के सवाल पर ओवैसी ने कहा कि सरकार शुरुआत से सवाल कर रही है कि वक्फ बोर्ड की प्रॉपर्टी बेतहाशा बढ़ गई है. लोग वक्फ बोर्ड को प्रॉपर्टी दे रहे हैं, उसके बकायदा डॉक्यूमेंट हैं. नियम-कायदों से काम हो रहा है. लेकिन बीजेपी की सरकार को तकलीफ है कि वक्फ की प्रॉपर्टी इतनी बढ़ कैसे रही है? सरकार वक्फ बोर्ड की संपत्ति बचाना नहीं चाहती है, ऐसा करने की उसकी कोई मंशा नहीं है. यही हम प्रूफ करना चाहते हैं. और सच साबित हो रहे हैं.
इस सवाल पर कि वक्फ बोर्ड किसी भी संपत्ति पर दावा कर सकता है. इस पर ओवैसी ने कहा कि ऐसा नहीं होता, ये भ्रम फैलाया जा रहा है. वक्फ बोर्ड के मामले ट्रिब्यूनल में देखे जाते हैं और इनके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील भी की जाती है. ट्रिब्यूनल के जजमेंट के खिलाफ आप हाईकोर्ट जा सकते हैं, इसमें कोई रोकटोक नहीं है. रिवीजन पीटिशन डालकर ऐसा किया जा सकता है. रिवीजन पीटिशन में आपको पेटेंट इलिगैलिटी दिखानी होती है. मोदी जी कह रहे हैं कि अब ट्रिब्यूनल में रिटायर्ड डिस्ट्रिक्ट जज होगा और रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी होगा. लेकिन अब ऐसा बताया जा रहा है कि ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की जा सकती है. लेकिन ऐसा पहले भी होता था. ये लोग झूठ बोल रहे हैं.
हम दूध के जले हैं, छाछ भी फूंक-फूंककर पीते हैं
ओवैसी ने कहा कि वैसे भी सर्वे कमिश्नर वक्फ बोर्ड का नहीं बल्कि सरकार का होता है, सरकार ही गैजेट जारी करती है. यहां सरकार सेक्शन 14 का हवाला दे रही है लेकिन ये सीओ का काम होता है कि वक्फ बोर्ड की जितनी अनयूज्ड प्रॉपर्टी है, उसे कैसे इस्तेमाल में लाया जाए. लेकिन इन संशोधनों से आपने उसे भी छीन लिया. सरकार के इस झूठे प्रोपेगैंडा को समझने की जरूरत है.
उन्होंने कहा कि ताजमहल की जमीन पर वक्फ बोर्ड अपना दावा नहीं कर रहा है. ताजमहल के अंदर मस्जिद है और सुन्नी वक्फ बोर्ड ने यह मामला उठाया है. सुन्नी वक्फ बोर्ड के सीओ जुफैर फारुखी साहब हैं. उन्हें अपॉइंट किसने किया है? वो सरकार का आदमी है. आपको बता दूं कि सुन्नी वक्फ बोर्ड की इजाजत से 1965 में मथुरा में कृष्णजन्मभूमि और वक्फ बोर्ड की परमिशन से एक एग्रीमेंट हुआ था, जिसके तहत वक्फ बोर्ड की आठ एकड़ की जमीन हमारे हिंदू भाइयों को दी गई थी. हम दूध के जले हैं, छाछ को भी फूंक-फूंककर पीएंगे.
ओवैसी ने कहा कि तमिलनाडु के जिस शख्स की जमीन पर वक्फ बोर्ड के कब्जे की बात की जा रही है, उसके बारे में बता दूं कि उस गांव की जमीन का सर्वे कमिश्नर प्रदेश सरकार का है, उसने सर्वे कर कहा कि जमीन वक्फ बोर्ड की है. एक साल का ऑब्जेक्शन टाइम मुस्लिमों को दिया गया. गैर मुस्लिमों के लिए कोई टाइम लिमिट नही है. तमिलनाडु की सरकार ने गैजेट नोटिफिकेशन जारी किया. आप इस फैसले को कोर्ट में चुनौती दो, कौन रोक रहा है? किरण रिजीजू ने जो संसद में कहा, मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि क्या उन्हें आठ लाख संपत्तियों के मामले में सिर्फ 15 मामले ही नजर आए. हैदराबाद में लोग वक्फ बोर्ड के खिलाफ हाईकोर्ट जाते हैं, कई मामलों में वक्फ बोर्ड को कानूनी हार का सामना करना पड़ा है.
धर्म के आधार पर वक्फ ट्रिब्यूनल क्यों नहीं होना चाहिए?
ओवैसी ने कहा कि हिंदू एंडोमेंट बोर्ड के पास समर इविक्शन पावर है. कई ट्रिब्यूनल हैं, जहां ऐसा होता है. ये सरकार कह रही है कि ट्रिब्यूनल में रिटायर्ड जज होगा और एक सरकारी कर्मचारी होगा. मैं कहना चाहात हूं कि धर्म के आधार पर ट्रिब्यूनल क्यों नहीं होना चाहिए? धर्म के आधार पर क्या कानून इजाजत नहीं देता? इतने सालों से ट्रिब्यूनल चल रहा है. सुप्रीम कोर्ट उसके वजूद को भी मानता है. अदालत ने वक्फ बोर्ड के फैसलों के खिलाफ भी फैसला दिया है. उसके फैसलों को भी माना गया है. अगर आरएसएस को तकलीफ है तो मुझे क्या करना है? यह संवैधानिक रूप से मान्यताप्राप्त है तो चल रहा है. वक्फ की जमीन प्राइवेट जमीन है, सरकारी जमीन नहीं है. मुसलमानों ने उसे अपने पैसों से खरीदकर वक्फ को दिया है. सरकार से कब्जा लेकर मुस्लिमों ने वो जमीन नहीं ली है.
बिलकिस बानो को वक्फ बोर्ड में शामिल करे केंद्र सरकार
वक्फ बोर्ड में महिलाओं को शामिल किए जाने से जुड़े सवाल पर ओवैसी ने कहा कि हमें महिलाओं से बिल्कुल आपत्ति नहीं है. मैं तो कहता हूं कि बिलकिस बानो और जकिया जाफरी को बोर्ड का सदस्य बनाएं. क्या इससे पहले बोर्ड में मुस्लिम महिलाएं नहीं थी? ये सरकार कितना झूठ बोलेगी?
ओवैसी ने कहा कि मैं संवैधानिक रियलिटी की बात कर रहा हूं. ये सरकार कह रही है कि आगाखानियों का वक्फ बनाएंगे. मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हूं कि मुंबई में आगाखानी बच्चों का अनाथालय था, जिसे एक प्रभावशाली शख्स ने 25 करोड़ रुपये में खरीद लिया और उसकी जगह आलीशान इमारत बना दी. सरकार को आगाखानियों की इतनी चिंता है तो उस अनाथालय को क्यों तोड़ने दिया गया? एक और अहम बात कि मौजूदा कानून के सेक्शन 52 में कहा गया था कि वक्फ की संपत्तियों को बेचने पर कड़ी सजा का प्रावधान था जबकि नए संशोधन में उसे बदलकर साधारण सजा में तब्दील कर दिया गया है. क्या इस तरह केंद्र सरकार काम करेगी.
महाराष्ट्र, हरियाणा चुनाव के मद्देनजर यह बिल लाया गया
ओवैसी ने कहा कि सरकार का एजेंडा हिंदुत्व विचारधारा से जुड़ा है. ये एनडीए की नहीं बल्कि बीजेपी की सरकार है. सरकार अभी भी घमंड में है. महाराष्ट्र और हरियाणा में चुनाव है तो सरकार अपने वोटबैंक को मैसेज देने की कोशिश कर रही है कि हम लगाम लगा रहे हैं. आप कह रहे हैं कि हिंदू वक्फ नहीं कर सकता लेकिन हिंदू मेबंर बन सकता है. ये लोग मुसलमानों के दुश्मन हैं और वक्फ बोर्ड को खत्म करना चाहते हैं.
मुस्लिम समाज से गद्दारी नहीं करूंगा
ओवैसी ने कहा कि जब भी तारीख लिखी जाएगी तो यह कहा जाएगा कि ओवैसी ने वक्फ के कानूनों के खिलाफ नियम-72 के तहत स्पीकर को नोटिस दिया था. हमने सरकार को एक्सपोज किया था. मैं अपनी जिम्मेदारियों को निभाऊंगा. मेरे बारे में कम से कम लोग ये नहीं कहेंगे कि मैंने मुस्लिम समाज से गद्दारी की.
बता दें कि मोदी सरकार ने बुधवार को वक्फ बोर्ड एक्ट में बदलाव के लिए संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश किया था. इस बिल को लेकर संसद में हंगामा हुआ था. इस दौरान जहां विपक्ष ने जमकर हंगामा किया तो वहीं सत्तापक्ष की तरफ से अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने विस्तार से बताया कि क्यों इस विधेयक को लाने की जरूरत पड़ी.
विपक्ष से समर्थन की गुहार लगाते हुए रिजिजू ने कहा था कि इस बिल का समर्थन कीजिए, करोड़ों लोगों की दुआ आपको मिलेगी. चंद लोगों ने पूरे वक्फ बोर्ड को कब्जा करके रखा है.और आम मुस्लिम लोगों को जो न्याय इंसाफ नहीं मिला उसे सही करने के लिए यह बिल लाया गया है. यह इतिहास में दर्ज होगा कि इस बिल का कौन-कौन समर्थन किया है और किसने विरोध किया है.
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