राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने हाल ही में मुस्लिम समुदाय के 14 प्रतिष्ठित व्यक्तियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की. नई पीएमओ बिल्डिंग में हुई इस अहम बैठक में 14 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में उद्योगपति, शिक्षाविद्, डॉक्टर, सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकार शामिल थे.
करीब डेढ़ घंटे चली इस बैठक में डोभाल ने शिष्टमंडल में शामिल सभी लोगों की बातों को ध्यानपूर्वक सुना और फिर अपने विचार साझा किए. बैठक का नेतृत्व कर रहे उद्योगपति और शिक्षाविद जफर सरेशवाला ने इंडिया टुडे डिजिटल से बात करते हुए कहा कि सरकार ने हमें आमंत्रित किया यह एक सकारात्मक संकेत है.
उन्होंने बैठक का जिक्र करते हुए बताया कि डोभाल ने साफ कहा, 'भारत एक कश्ती है, हम सभी या तो साथ यात्रा करेंगे या साथ डूबेंगे.' उन्होंने यह भी कहा कि डोभाल ने देश में धर्मों की एकता के महत्व पर जोर दिया.
जफर सरेशवाला ने कहा, 'बैठक में, हमने निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा की आवश्यकता पर जोर दिया. हमने कहा कि न तो मुसलमानों के साथ भेदभाव होना चाहिए और न ही उन्हें कोई विशेष सुविधा मिलनी चाहिए. यह तो बस एक खास चीज की शुरुआत है. हम भविष्य में भी इसे जारी रखेंगे.'
सरेशवाला के अलावा, डोभाल से मिलने वाले प्रमुख लोगों में केपी ग्रुप के संस्थापक और अध्यक्ष फारुक पटेल, जर्मन स्टील के सीएमडी इनामुलहक इराकी, जर्मन स्टील के कार्यकारी निदेशक इबरारुलहक इराकी, निटोन वाल्व के सीईओ जुनेद शरीफ, जीएलएस स्विचगियर के निदेशक जफर लारी, दाऊदी बोहरा नेता जमात अल्ताफ सादिकोट, अंजुमन-ए-इस्लाम के अध्यक्ष जहीर काजी, समुदाय के नेता हाजी रायमा और हज कमेटी इंडिया के अध्यक्ष कौसर जहां शामिल थे. इसके अलावा पर्यावरण कार्यकर्ता सहर भामला, एम्स डॉक्टर निशात हुसैन, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) की कुलपति नईमा खातून और पत्रकार समीना शेख भी समूह का हिस्सा थे.
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बैठक को सभी ने बताया सकारात्मक
बैठक के दौरान प्रतिभागियों ने शिक्षा, रोजगार और समान अवसर जैसे मुद्दों को उठाया. सरेशवाला ने कहा कि उन्होंने सरकार से 'लेवल प्लेइंग फील्ड' की मांग की- न तो किसी के साथ भेदभाव हो और न ही विशेष सुविधा दी जाए. इसे एक संतुलित और समावेशी दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है.
अन्य प्रतिभागियों ने भी इस पहल को सकारात्मक बताया. अंजुमन-ए-इस्लाम के अध्यक्ष जाहिर काजी ने कहा कि इस तरह के संवाद से गलतफहमियां दूर होती हैं और समाज में भरोसा बढ़ता है. वहीं पत्रकार समीना शेख ने सोशल मीडिया पर बढ़ते विवादों और समुदाय को लेकर उठने वाली चिंताओं को सामने रखा, जिस पर डोभाल ने समाधान सुझाए.
वरिष्ठ पत्रकार शीला भट्ट ने इस पहल को 'धुरंधर कदम' बताया और कहा कि यह मुलाकात वोट-बैंक राजनीति से आगे बढ़कर संवाद और विश्वास की नई शुरुआत है. उन्होंने लिखा, 'सभी मुस्लिम नेताओं का चयन सोच-समझकर और उद्देश्यपूर्ण तरीके से किया गया था. ये भारतीय तथाकथित 'वोट बैंक की राजनीति' का हिस्सा बनने से इनकार कर रहे हैं, जहां किसी का वोट केवल एक पार्टी को हराने या दूसरी पार्टी को चुनने का एक साधन बन जाता है.'
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स्वतंत्र पत्रकार समीना शेख ने डोभाल से मुलाकात के बाद X के बारे में अपने विचार साझा किए. उन्होंने कहा, 'चूंकि मैं एक स्वतंत्र पत्रकार हूं और मीडिया जगत का हिस्सा होने के साथ-साथ एक मुस्लिम लड़की भी हूं, इसलिए यह बताना महत्वपूर्ण था कि समुदाय हमारी शिक्षा और महत्वाकांक्षाओं के लिए किस प्रकार हमारा समर्थन करता है.'
शेख ने कहा, 'जब सोशल मीडिया पर मुद्दे बेकाबू हो जाते हैं और मुसलमानों को निशाना बनाया जाता है, तो यह हमें चिंतित करता है और हम सोचते हैं कि इसे कैसे नियंत्रित किया जाना चाहिए.' उन्होंने कहा कि डोभाल ने 'न केवल हमारी बात को बारीकी से सुना, बल्कि हमारी चिंताओं का समाधान भी प्रदान किया.'
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक सरकार और अल्पसंख्यक समुदाय के बीच संवाद को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भविष्य में और बड़े सामाजिक समन्वय का आधार बन सकता है.
(इनपुट- Avinash Kateel)
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