पैंगोंग के बाद इन क्षेत्रों से गतिरोध खत्म करने पर जोर, जानिए LAC के मौजूदा हालात

अधिकारियों का कहना है कि भारतीय और चीनी सैनिकों का शुरुआती डिसएंगेजमेंट प्रोसेस पैंगोंग झील तक ही सीमित है. दोनों सेनाओं को उनके मूल पोजीशन पर वापस जाने में दो हफ्ते लग सकते हैं. 

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भारत-चीन के सैनिक (फ़ोटो- इंडियन आर्मी) भारत-चीन के सैनिक (फ़ोटो- इंडियन आर्मी)

अभिषेक भल्ला

  • नई दिल्ली ,
  • 11 फरवरी 2021,
  • अपडेटेड 11:50 PM IST
  • पैंगोंग के बाद दूसरे क्षेत्रों से भी खत्म होगा गतिरोध
  • ये डिसएंगेजमेंट प्रोसेस पैंगोंग झील तक ही सीमित
  • पैंगोंग झील का फ़िंगर एरिया नो पैट्रोल ज़ोन

भारत-चीन के बीच सीमा पर गतिरोध खत्म करने की प्रक्रिया (डिसएंगेजमेंट प्रोसेस) शुरू हो चुकी है. इस प्रक्रिया के तहत पैंगोंग झील के किनारे से दोनों सेनाओं का पीछे हटना शुरू हो गया है. टैंकों को भी पीछे किया जा रहा है. इस मसले पर अधिकारियों का कहना है कि भारतीय और चीनी सैनिकों का शुरुआती डिसएंगेजमेंट प्रोसेस पैंगोंग झील तक ही सीमित है. दोनों सेनाओं को उनके मूल पोजीशन पर वापस जाने में दो हफ्ते लग सकते हैं. 

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एक बार जब ये प्रक्रिया पूरी हो जाएगी तो कॉर्प्स कमांडर (Corps Commander) स्तर की बातचीत में हॉट स्प्रिंग्स, गोगरा और 900 वर्ग किलोमीटर डेपसांग मैदान जैसे अन्य गतिरोध वाले क्षेत्रों पर चर्चा करने के लिए 48 घंटों के भीतर बैठक होगी. 
 
इस मुद्दे पर गुरुवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राज्यसभा में ऐलान किया है कि पैंगोंग झील के पास विवाद को लेकर भारत और चीन के बीच समझौता हो गया है. बुधवार से इस प्रक्रिया को लागू करना शुरू कर दिया गया है. रक्षा मंत्री ने कहा कि पूर्वी लद्दाख में LAC पर अभी भी कुछ बिंदुओं पर तैनाती और गश्त के संबंध में मुद्दे अनसुलझे हैं. ये सब मुद्दे चीन के साथ आगे की चर्चाओं में उठाए जाएंगे. 

Depsang में बिल्ड-अप को मौजूदा गतिरोध का हिस्सा नहीं माना गया. यहां पिछले साल मई से चीन की गतिविधियां बढ़ी हैं. हालांकि, 2013 से ही यह एरिया नजर में है. फिलहाल, भारत ने पूर्वी लद्दाख में सभी मुद्दों को हल करने के लिए हालिया सैन्य कमांडर बैठकों के दौरान जोर दिया है. 

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बता दें कि पैंगोंग झील के दोनों किनारे पर कई जगहों पर दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने बेहद करीब थे. ऐसे में दोनों देशों ने टकराव को दूर करने के लिए ये योजना बनाई. जिसके तहत सबसे पहले यहीं डिसएंगेजमेंट प्रोसेस शुरू किया गया. पैंगोंग झील का फ़िंगर एरिया नो पैट्रोल ज़ोन होगा. 
  
गौरतलब है कि भारतीय सेनाओं ने झील के उत्तर में चीनी ऑपरेशन को काउंटर करने के लिए झील के दक्षिणी किनारे पर स्थित अहम चोटियों पर कब्जा कर लिया था. सितंबर के बाद से चीन द्वारा भारतीय सैनिकों को यहां से हटाने की कोशिश ने और अधिक शत्रुता पैदा कर दी थी. 

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विवादास्पद फ़िंगर एरिया मसले पर संसद में  बयान दिया. उन्होंने कहा कि भारत व चीन ने पैंगोंग झील के दक्षिण और उत्तर इलाके में पीछे हटने का फैसला किया है. इसके अनुसार, फॉरवर्ड इलाकों में दोनों देशों ने जो सेनाओं की तैनाती की है उसे चरणबद्ध तरीके से पीछे हटाया जाएगा. राजनाथ ने कहा कि हमने इस बातचीत में कुछ भी खोया नहीं है.
  
रक्षा मंत्री के मुताबिक, चीन अपनी सेना की टुकड़ी को उत्तर बैंक में फिंगर 8 के पूर्व में रखेगा, भारत फिंगर 3 के पास अपने परमानेंट बेस पर रखेगा. ऐसा ही तरीका दक्षिण बैंक के पास अपनाया जाएगा. हाल के कुछ वक्त के लिए अस्थाई स्तर पर पेट्रोलिंग को खत्म कर दिया गया है.

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