आज का दिन: इस यूपी चुनाव में अखिलेश यादव ने परिवार-रिश्तेदारों के टिकट क्यों काटे?

यूपी चुनाव में परिवार को शामिल क्यों नहीं कर रहे अखिलेश यादव? पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह अपनी जीत से ज्यादा कांग्रेस की हार चाहते हैं? चुनावी मौसम में हाथरस पीड़िता के परिवार की कौन-2 सुध लेने आया?

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अखिलेश यादव (फाइल फोटो) अखिलेश यादव (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 जनवरी 2022,
  • अपडेटेड 10:14 AM IST

राजनीति में परिवारवाद की पुरानी कहानी है. और खासतौर पर इसकी चपेट में कांग्रेस के साथ साथ समाजवादी पार्टी भी आती रही है. 2012 में जब अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने तब भी विपक्षी दलों ने परिवारवाद के मसले पर उन्हें घेरा था तो वहीं पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सपा के समाजवाद का मतलब है... एक पार्टी का विकास.  दूसरी ओर पॉलिटिकल एनालिस्ट कहते हैं कि 2017 के यूपी चुनाव में सपा के हारने में बड़ा कारण अखिलेश का परिवार से प्रेम भी रहा, जिसे बीजेपी ने खूब भूनाया. लेकिन इस बार मामला थोड़ा अलग दिखने मिल रहा है. यूपी चुनाव में सपा मुखिया अखिलेश यादव वंशवाद, परिवारवाद के टैग से बचते नज़र आ रहे हैं.  उदाहरण के तौर पर आप देखें, टिकट वितरण के मसले पर उन्होंने नेताओं के परिवार को इसमें शामिल करने से मना किया. इसके अलावा स्टार प्रचारकों की सूची में शिवपाल यादव को छोड़ कर अपने परिवार के किसी दूसरे शख्स को शामिल नहीं किया. अखिलेश की पत्नी डिम्पल यादव जो उनके साथ अक्सर चुनाव प्रचार का हिस्सा रहीं, वो भी इस दफा चुनावी कैंपेन से नदारद ही रहीं.  मुलायम सिंह यादव के रिश्तेदारों के टिकट भी कटे जिसके बाद कई नेता नाराज़ होकर पार्टी भी छोड़ गए, जिसमें एक बड़ा नाम मुलायम सिंह की बहू अपर्णा यादव का है, जिन्होंने हाल ही में बीजेपी ज्वाइन किया है.  तो अब अखिलेश के इन फैसलों से ऐसा कहा जा रहा है कि वो इस बार चुनाव में अपने पार्टी को वो डायनेस्टी बेस्ड पोलिटीक्स के ठप्पे से मुक़्त रखने की कोशिश कर रहे हैं. तो सवाल यहां ये है कि अखिलेश की इस रणनीति के पीछे का मकसद क्या है? किस तरह का गणित बिठाने में वो लगे हैं?

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पिछले साल सितंबर में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजाब के सीएम पद से इस्तीफा दिया था. कहा गया कि कैप्टन को हटाने के पीछे कांग्रेस हाईकमान पर सिद्धू का दबाव था. दो महीने हुए भी नहीं थे कि अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस छोड़ कर अपनी नई पार्टी ‘पंजाब लोक कांग्रेस’ का गठन किया. उस दौरान अमरिंदर सिंह ने कहा कि उन्हें जो करना पड़े वो करेंगे लेकिन कांग्रेस को पंजाब की सत्ता में वापस नहीं आने देंगे. उसके बाद से ही अमरिंदर सिंह लगातार कांग्रेस पर हमलावर रहे हैं. फिर चाहे वो सोनिया गांधी के नेतृत्व पर सवाल उठाना हो या सीएम चरणजीत सिंह चन्नी के मी टू का कोई मुद्दा हो. कैप्टन, कांग्रेस को कटघरे में खड़ा करने का एक भी मौका नहीं छोड़ रहे. अब इसी कडी में कल नवजोत सिंह सिद्धु पर आरोप लगाते हुए कैप्टन ने कहा कि जब कैप्टन सीएम थे तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का फोन आया जिसमें वो सिद्धु को मंत्री पद देने की सिफारिश कर रहे थे.  

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कैप्टन के इस बयान के बाद देश की सियासत गर्मा गई और एक दफा फिर से चुनाव में पाकिस्तान ने एंट्री ले ली. इसके इतर कल पंजाब में बीजेपी, पंजाब लोक कांग्रेस और सुखदेव सिंह ढींढसा की पार्टी के सीट बंटवारे का भी ऐलान हुआ. बहरहाल, अब इसी सब के बीच राजनीति के जानकार ये कह रहे हैं कि अमरिंदर सिंह पंजाब चुनाव में जितने हमलावर कांग्रेस को लेकर हो रहे हैं, उतने हमलावर वो अकाली दल या आम आदमी पार्टी को लेकर नहीं हो रहे. इसके साथ ही चुनावी अभियान में उनके साढ़े चार साल के काम का ब्योरा न के बराबर दिखता है जब वो इसकी बात करते नज़र आते हैं क्योंकि उनका ज्यादातर फोकस कांग्रेस को कटघरे में खड़ा करने पर रहता है. तो इन बातों से अब क्या ये समझा जाए कि अमरिंदर सिंह केवल कांग्रेस को हराने के लिए पंजाब चुनाव लड़ रहे हैं या चुनाव में वो अपनी जीत तलाशते भी नज़र आ रहे हैं?

दिसंबर 2020 में हाथरस में हुई घटना ने पूरे देश को हिला कर रख दिया था जब एक रेप पीड़ित लड़की की मृत्यु के बाद यूपी पुलिस ने उसका दाह संस्कार किया था. जिसके बाद ये आरोप लगे कि परिवार को विश्वास में लिए बिना इस काम को अंजाम दिया गया. बात बढ़ी तो तमाम विपक्षी दल पीड़िता के परिवार से मिलने निकले और यूपी सरकार पर कारवाई को लेकर दवाब बनाया, इसी दौरान कई नेताओं को हिरासत में लिया गया, धारा 144 लगाई गई और अंत में दोषी पर कारवाई करते हुए उसे हिरासत में लिया गया जिस पर फिलहाल केस चल रहा है. हाल ही में कांग्रेस ने पीड़िता के परिवार को यूपी चुनाव लड़ने का ऑफर दिया था, मगर चुनाव लड़ने से परिवार ने ये कह कर इंकार कर दिया कि पहले उन्हें इंसाफ चाहिए तब ही कोई बात बनेगी. बहरहाल, हाथरस के उस घटना को हुए अब एक साल से ज्यादा हो गए हैं, तो उस परिवार का हाल क्या है, अभी तो यूपी चुनाव हैं इसलिए नेता परिवार से मिलने जाते हैं, लेकिन क्या बीते एक साल में कोई भी नेता उनसे मिलने गया?

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कल क्रिकेट जगत के दो ख़बरों से बाज़ार गर्म रहा. एक तो कल जिम्बाब्वे के पूर्व विकेटकीपर और बैट्समैन, ब्रेंडन टेलर अपने बयान को लेकर सुर्खियों में बने रहे. उन्होंने आरोप लगाया कि एक इंडियन बिजनेसमैन ने उन्हें अंतर्राष्ट्रीय मैचों को फिक्स करने के लिए मजबूर करने की कोशिश की थी और बात न मानने पर कोकीन लेते हुए उनका एक वीडियो वायरल करने की धमकी दी थी. वहीं दूसरी ओर कल आईसीसी ने 2021 के लिए अवार्ड्स की घोषणा की. मेन्स कैटेग्री में भारत के एक भी खिलाड़ी का नाम इसमें शामिल नहीं था, लेकिन भारत की स्मृति मंधाना को आईसीसी ने साल 2021 की सर्वश्रेष्ठ महिला खिलाड़ी चुना. स्मृति ऑस्ट्रेलिया की ऑलराउंडर एलिस पेरी के बाद ICC अवार्ड्स की फीमेल कैटेगरी में सबसे ज्यादा अवार्ड जीतने वाली दूसरी खिलाड़ी रहीं. तो आइसीसी अवार्ड्स के हाइलाइट्स क्या रहे और ब्रेंडन टेलर के आरोप की कहानी की शुरूआत कब हुई और ये पूरा मसला है क्या?

इन ख़बरों पर विस्तार से चर्चा के अलावा ताज़ा हेडलाइंस, देश-विदेश के अख़बारों से सुर्खियां, आज के इतिहास की अहमियत सुनिए 'आज का दिन' में अमन गुप्ता के साथ

 

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