कनाडा में पति- पत्नी, ठाणे में हुआ तलाक, वीडियो कॉल पर जज ने जारी की डिवोर्स डिक्री

ठाणे की एक अदालत ने तकनीक का सहारा लेते हुए कनाडा में रह रहे दंपती की शादी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आपसी सहमति से समाप्त कर दिया. विशेष विवाह अधिनियम के तहत दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि सभी विवाद सुलझ चुके हैं और साथ रहना संभव नहीं है. यह फैसला प्रवासी भारतीयों के लिए अहम मिसाल माना जा रहा है.

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कनाडा में पति- पत्नी, ठाणे में हुआ तलाक (Photo: representational image ) कनाडा में पति- पत्नी, ठाणे में हुआ तलाक (Photo: representational image )

aajtak.in

  • ठाणे ,
  • 10 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:12 PM IST

महाराष्ट्र के ठाणे की एक अदालत ने तकनीक के इस्तेमाल से पारिवारिक न्याय प्रक्रिया को नया आयाम देते हुए कनाडा में रह रहे एक दंपती की शादी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आपसी सहमति से समाप्त कर दिया है. यह फैसला उन मामलों के लिए अहम माना जा रहा है, जहां पति-पत्नी विदेश में रहते हुए भारत में कानूनी प्रक्रिया पूरी करने में व्यावहारिक दिक्कतों का सामना करते हैं.

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जिला न्यायाधीश आर. एस. भाकरे ने सोमवार को पारित आदेश में कहा कि दोनों पक्षों ने स्वेच्छा से तलाक की याचिका दायर की थी और परिस्थितियों को देखते हुए विवाह को समाप्त करना न्यायोचित है. अदालत ने इस प्रकार सात महीने से अधिक समय से चल रही कानूनी प्रक्रिया को समाप्त करते हुए तलाक की डिक्री जारी कर दी.

मामले में याचिकाकर्ता 31 साल के एक सर्विस प्रोफेशनल और 24 साल की उनकी पत्नी हैं. दोनों इस समय कनाडा के ओंटारियो प्रांत के अलग-अलग हिस्सों में रह रहे हैं. उनकी शादी 9 मार्च 2022 को महाराष्ट्र के ठाणे जिले के मीरा रोड इलाके में हुई थी. हालांकि, आपसी मतभेदों के चलते दंपती ने 10 दिसंबर 2023 से अलग-अलग रहना शुरू कर दिया था.

दोनों ने 18 जून 2025 को विशेष विवाह अधिनियम के तहत तलाक की याचिका दायर की. चूंकि दंपती भारत से बाहर रह रहे हैं, इसलिए पूरी कानूनी प्रक्रिया पावर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से शुरू की गई. कानून के तहत निर्धारित छह महीने की अनिवार्य प्रतीक्षा अवधि पूरी होने के बाद भी दोनों अपने फैसले पर अडिग रहे.

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सोमवार को दंपती अदालत के समक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए और न्यायाधीश के समक्ष यह स्पष्ट किया कि वे अब साथ नहीं रहना चाहते. अदालत ने शपथपत्रों और वर्चुअल बयान के आधार पर साक्ष्यों की समीक्षा की. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रशिक्षित मीडिएटर के माध्यम से सुलह का प्रयास किया गया, लेकिन दोनों पक्ष साथ रहने को तैयार नहीं हुए. साथ ही, पति-पत्नी के बीच भरण-पोषण, गुजारा भत्ता और भविष्य से जुड़े सभी मुद्दों का आपसी सहमति से निपटारा हो चुका है. 

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