बॉम्बे HC की फटकार के अगले ही दिन मंत्री के बेटे ने किया सरेंडर, महाड़ चुनाव हिंसा से जुड़ा है मामला

महाड़ नगर परिषद चुनाव हिंसा मामले में शिवसेना नेता भरत गोगावले के बेटे विकास गोगावले ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. भरत गोगावले महायुति सरकार में मंत्री हैं. बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार को फटकार लगाई थी.

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महाड़ नगर परिषद चुनाव हिंसा मामले में शिवसेना नेता भरत गोगावले के बेटे विकास गोगावले ने सरेंडर किया. (Photo: X/@Shivsena) महाड़ नगर परिषद चुनाव हिंसा मामले में शिवसेना नेता भरत गोगावले के बेटे विकास गोगावले ने सरेंडर किया. (Photo: X/@Shivsena)

aajtak.in

  • मुंबई,
  • 23 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:12 PM IST

महाड़ नगर परिषद चुनाव के दौरान हुई हिंसा के मामले में शिवसेना नेता और महायुति सरकार में मंत्री भरत गोगावले के बेटे विकास गोगावले ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है. बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा महाराष्ट्र सरकार की कड़ी आलोचना के एक दिन बाद यह घटनाक्रम सामने आया. राज्य सरकार ने शुक्रवार को हाई कोर्ट को बताया कि विकास गोगावले ने रायगढ़ जिले के महाड़ पुलिस थाने में आत्मसमर्पण किया है. कोर्ट ने गुरुवार को सरकार से सवाल किया था कि क्या राज्य में कानून का राज है और क्या मुख्यमंत्री इतने बेबस हैं कि एक कैबिनेट मंत्री के बेटे के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पा रही.

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एडवोकेट जनरल मिलिंद साठे ने न्यायमूर्ति माधव जामदार की एकल पीठ को बताया कि इस मामले के सभी आरोपी, जिनमें विकास गोगावले और उनके चचेरे भाई महेश गोगावले शामिल हैं, ने सुबह महाड़ पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया. पुलिस के अनुसार, विकास गोगावले, महेश गोगावले और छह अन्य आरोपी सरेंडर करने महाड़ सिटी पुलिस स्टेशन पहुंचे. बता दें कि 2 दिसंबर को हुए नगर परिषद चुनाव के दौरान एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के समर्थकों के बीच झड़प हुई थी. शिंदे और पवार दोनों भाजपा-नीत महायुति सरकार में उपमुख्यमंत्री हैं.

यह भी पढ़ें: शिंदे संग चले राज ठाकरे... महाराष्ट्र निगम चुनाव के गठबंधन पर अब भारी होती अवसरवादी राजनीति

पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109 (हत्या का प्रयास), 115(2) (जानबूझकर चोट पहुंचाना) सहित अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया है. झड़प के दौरान पिस्तौल लहराए जाने के चलते आर्म्स एक्ट भी लगाया गया. दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराईं, जिसके बाद क्रॉस-एफआईआर हुईं. बॉम्बे हाई कोर्ट श्रीयंश जगताप की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहा था. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था. इसके बाद शुक्रवार को जगताप ने अपनी याचिका वापस ले ली, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया.

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सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जामदार ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इस मामले में महाराष्ट्र के दो उपमुख्यमंत्रियों से जुड़ा पहलू है. उन्होंने कहा, 'अब पुलिस को उसे (श्रीयंश जगताप) भी गिरफ्तार करना होगा. फर्क सिर्फ इतना है कि वह एक पूर्व मंत्री का बेटा है.' विकास और महेश गोगावले की अग्रिम जमानत याचिकाओं पर भी कोई राहत नहीं मिली थी. श्रीयंश जगताप को दिसंबर में गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण मिला था. कोर्ट ने गुरुवार को मंत्री के बेटे की गिरफ्तारी न होने पर कानून व्यवस्था को लेकर सख्त टिप्पणी की थी.

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