'उनका सहारा मेरे लिए पहाड़ जैसा था', राज ठाकरे ने 'सामना' में 'काका' बालासाहेब को किया याद

बालासाहेब ठाकरे की जयंती और जन्म शताब्दी वर्ष की शुरुआत पर राज ठाकरे ने 20 साल बाद सामना में ‘माझा काका’ शीर्षक से एक संपादकीय लिखा. उन्होंने बालासाहेब को अपने लिए 'पहाड़ जैसा सहारा' बताया और उनकी निडर सोच व सांस्कृतिक विरासत को अपनी राजनीति की प्रेरणा बताया. उन्होंने साफ किया कि पाकिस्तानी कलाकारों पर उनका सख्त रुख व्यक्तिगत नहीं बल्कि बालासाहेब से मिली सांस्कृतिक समझ का हिस्सा है.

Advertisement
20 साल बाद 'सामना' में राज ठाकरे का एडिटोरियल छपा है. (File Photo: ITG) 20 साल बाद 'सामना' में राज ठाकरे का एडिटोरियल छपा है. (File Photo: ITG)

ऋत्विक भालेकर

  • मुंबई,
  • 23 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:32 PM IST

बालासाहेब ठाकरे की जयंती और उनके जन्म शताब्दी वर्ष की शुरुआत के मौके पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने ‘सामना’ में एक एडिटोरियल लिखा है. इसका शीर्षक है 'माझा काका' (मेरे काका). यह बीते 20 साल में 'सामना' में उनका पहला लेख है, जिसे महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.

राज ठाकरे ने इस लेख में बालासाहेब को सिर्फ अपने मार्गदर्शक के रूप में नहीं, बल्कि अपने लिए 'पहाड़ जैसा सहारा' (mountain of support) बताया है. उन्होंने याद किया कि शिवसेना संस्थापक की निडर कलात्मकता और राजनीतिक कार्टूनों में किए गए 'बोल्ड स्ट्रोक्स' ने उन्हें सत्ता और पाखंड को बिना डर चुनौती देना सिखाया. लेख में राज कपूर और अमिताभ बच्चन जैसे दिग्गजों से जुड़े कुछ दुर्लभ किस्सों का भी जिक्र है.

Advertisement

'मुझे विरासत में मिली सांस्कृतिक सोच' 

राज ठाकरे ने इस लेख में यह भी साफ किया कि पाकिस्तानी कलाकारों को लेकर उनका सख्त रुख किसी व्यक्तिगत नफरत का नतीजा नहीं, बल्कि वह 'सांस्कृतिक सोच' है, जो उन्हें अपने काका बालासाहेब से विरासत में मिली.

राजनीतिक तौर पर यह लेख सिर्फ भावनात्मक श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि गहरे संकेत भी देता है. ऐसे समय में जब ठाकरे परिवार के दोनों भाई बीजेपी नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन के खिलाफ एक ही धारा में खड़े नजर आ रहे हैं, 'सामना' में राज ठाकरे की वापसी 'ठाकरे ब्रांड' की एकजुटता को मजबूत करती है.

महाराष्ट्र की राजनीति में बढ़ सकती है भूमिका

राज ने यह स्वीकार किया कि बालासाहेब के मजबूत समर्थन के बिना वे कभी अलग पार्टी बनाने का साहस नहीं कर पाते. इसे शिवसेना कैडर के साथ दूरी कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि राज्य के हित में वे आगे चलकर 'अहम भूमिका' निभा सकते हैं, न कि निजी राजनीतिक लाभ के लिए. माना जा रहा है कि यह बयान आने वाले राजनीतिक संघर्षों में सत्तारूढ़ गठबंधन को चुनौती देने के लिए मराठी वोट बैंक के एकीकरण की रणनीति की ओर इशारा करता है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement