राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के एक और नेता मुनाफ हकीम ने शुक्रवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया. हकीम ने के उस बयान पर ऐतराज जताया जिसमें उन्होंने मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बचाव किया था. इससे पहले शुक्रवार को ही पार्टी के सांसद तारिक अनवर ने भी एनसीपी छोड़ दी और लोकसभा से भी इस्तीफा दे दिया.
मुनाफ हकीम एनसीपी के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं. में ये पार्टी के बड़े चेहरे के तौर पर गिने जाते थे. मुनाफ इस्तीफा देने तक पार्टी के महासचिव पद पर कार्यरत थे. एनसीपी के संस्थापक नेताओं में शामिल होने के साथ ही वे प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष भी थे.
हकीम से पहले अनवर ने छोड़ने के साथ-साथ लोकसभा से भी इस्तीफा दे दिया. अनवर ने 1999 में सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मुद्दे पर कांग्रेस से बगावत कर शरद पवार के साथ एनसीपी बनाई थी. तारिक अनवर ने आजतक से इस्तीफा देने की बात को स्वीकारा और कहा, 'मैंने एनसीपी छोड़ दी है और लोकसभा से भी इस्तीफा दे दिया है.'
तारिक अनवर ने कहा, पवार साहब का राफेल पर बयान मुझे ठीक नहीं लगा. एनसीपी की तरफ से सफाई आई लेकिन वो सही नहीं है. पवार साहब ने जब बयान दिया था तो खुद उनको सफाई देनी चाहिए थी. हालांकि उनकी तरफ से खुद कोई सफाई नहीं आई तो मैंने इस्तीफा दे दिया.
एनसीपी छोड़ने के बाद किस पार्टी में जाएंगे इस सवाल पर तारिक अनवर ने कहा कि ये अभी तय नहीं है. समर्थकों से बात करने के बाद तय करूंगा. इसके बाद बताऊंगा. सूत्रों की मानें तो एनसीपी से इस्तीफा देने के बाद एक बार फिर कांग्रेस में वापसी कर सकते हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव में तारिक अनवर बिहार के कटिहार से जीत हासिल की थी.
अनवर के इस्तीफे पर एनसीपी के वरिष्ठ नेता ने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा, यह बहुत खेद की बात है कि हमारे एक वरिष्ठ नेता ने लोकसभा और एनसीपी से इस्तीफा देने का फैसला किया. ताज्जुब की बात है कि उन्होंने पवार की ओर से एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू पर यह फैसला किया, जबकि राफेल के बारे में सारे तथ्य लगभग स्पष्ट हैं.
बता दें कि गुरुवार को राफेल मामले पर एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार के सरकार का समर्थन करने की खबर आई थी, जिस पर बाद में एनसीपी ने सफाई देते हुए कहा था कि ऐसी कोई बात नहीं कही गई है.
रविकांत सिंह / मुस्तफा शेख