मुंबई में दस साल में 72 फीसदी बढ़े आवारा कुत्ते, 95 हजार से 1.64 लाख पहुंची आबादी

मुंबई में बीते दस साल में आवारा कुत्तों की संख्या में बेतहाशा बढ़ोत्तरी हुई है. साल 2014 में जहां 95 हजार कुत्ते थे, वहीं अब कुत्तों की आबादी करीब 1.64 लाख तक पहुंच चुकी है. इस साल बीएमसी कुत्तों की गणना कराने की तैयारी में है.

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मुंबई में बढ़े आवारा कुत्ते. (Representational image) मुंबई में बढ़े आवारा कुत्ते. (Representational image)

aajtak.in

  • मुंबई,
  • 25 अगस्त 2023,
  • अपडेटेड 8:15 AM IST

बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने गुरुवार को कहा कि मुंबई में आवारा कुत्तों की आबादी 1.64 लाख तक पहुंच गई है. बीएमसी ने कहा कि साल 2014 की तुलना में यह करीब 72 प्रतिशत ज्यादा है. बता दें कि इससे पहले मुंबई में गलियों में घूमने वाले कुत्तों की डिजिटल आइडेंटिफिकेशन की पहल भी शुरू की गई. इसके तहत कुत्तों को लेकर डेटा तैयार करना है.

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बीएमसी की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया कि साल 2014 में हुई गणना के अनुसार शहर में आवारा कुत्तों की आबादी 95 हजार थी. बयान में आगे कहा गया है कि बीएमसी ने जनवरी 2024 में आवारा कुत्तों की अगली गणना कराने की तैयारी की है. इसी के साथ फरवरी 2024 में बड़े पैमाने पर रेबीज टीकाकरण अभियान भी प्रस्तावित है.

जारी बयान में बीएमसी ने कहा है कि अगले दस दिनों में लगभग एक लाख आवारा कुत्तों का टीकाकरण किया जाएगा. कुछ गैर सरकारी संगठनों की मदद से बीएमसी ने मंगलवार को मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 26 आवारा कुत्तों का टीकाकरण किया.

बीते महीने की गई आवारा कुत्तों के डिजिटल आइडेंटिफिकेशन की पहल

बीते महीने बृहन्मुंबई नगर निगम ने आवारा कुत्तों के डिजिटल आइडेंटिफिकेशन की पहल की है. इसके लिए जानवरों की क्यूआर टैगिंग होगी. पहली बार सिविक एजेंसी ने ये कदम उठाया है. कुत्तों के गले में क्यूआर कोड वाले टैग लटकाए गए, जिसके जरिए उनकी पूरी डिटेल मिल जाएगी. इन जानकारियों में कुत्तों के टीकाकरण, उनकी नसबंदी और डिजिटल तौर पर रखे गए उनके नाम का भी डेटा होगा. इस से बीएमसी को केंद्रीकृत डेटाबेस के जरिए सटीक डेटा मिलेगा.

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बीएमसी के महाप्रबंधक ने कही थी ये बात

बीएमसी के महाप्रबंधक डॉ. कलिम्पाशा पठान ने कहा था कि हम क्यूआर कोड सक्षम डॉग टैग के माध्यम से डेटा इकट्ठा करने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि इसकी उपयोगिता और लागत को तय कर सकें. यह पायलट प्रोजेक्ट है, हमें देखना होगा कि इसे आगे कैसे बढ़ाया जा सकता है.

उन्होंने यह भी कहा था कि देखना जरूरी है कि क्या कुत्ते अपनी गर्दन के चारों ओर कॉलर को लंबे समय तक रखने देते हैं. हमें इसके बेहतर रिजल्ट को जानने की जरूरत है. आदमी बनाम कुत्ते का संघर्ष गंभीर समस्या बन गया है. यह एक नया खतरा बन रहा है. इसलिए हम देख रहे हैं कि इसे कम करने के लिए और क्या किया जा सकता है.

(एजेंसी)

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