मुंबई के बीएमसी चुनाव पर चर्चित सेफोलॉजिस्ट और एक्सिस माय इंडिया के चेयरमैन प्रदीप गुप्ता ने कहा कि इस बार भी वहां मुस्लिम वोटों का बिखराव होगा. प्रदीप कुमार ने कहा कि एनडीए आगे जरूर है लेकिन कितना आगे है ये समय बताएगा. लोकनीति सीएसडीएस के को-डायरेक्टर संजय कुमार ने बीएमसी चुनाव पर अपनी भविष्यवाणी में कहा कि लैंडस्लाइड किसी के लिए नहीं होने जा रहा है. ये बीच-बीच की स्थिति दिखती है. वहीं वोट वाइव्स के अमिताभ तिवारी ने कहा कि चुनाव हमेशा कांटे की टक्कर होती है लेकिन रिजल्ट एकतरफा हो सकता है. लेकिन अगर विधानसभा चुनाव का ट्रेंड दोहराया जाता है तो एनडीए को 227 में 118 से 133 सीटें मिल सकती है.
मुंबई में आयोजित आजतक के कार्यक्रम मुंबई मंथन में इन चुनावी विश्लेषकों ने अपनी राय रखी. कार्यक्रम 'कौन जीतेगा मुंबई' में एक्सिस माय इंडिया के चेयरमैन प्रदीप गुप्ता ने कहा है कि इस चुनाव में कोई किसी के साथ और सब कोई सब के साथ मिलकर चुनाव लड़ रहा है. मुंबई की बात करें तो उन्होंने कहा कि MVA में अब कांग्रेस माइनस हो चुका है और एमएनएस प्लस हो चुका है. उन्होंने कहा कि बीएमसी में चार कॉर्नर पर दो दो दलों का मुकाबला है.
वहीं लोकनीति सीएसडीएस के को-डायरेक्टर संजय कुमार ने कहा कि इस बार के चुनाव में बहुत अजीब तरह का अलायंस है. लेकिन मुझे लगता है कि इस चुनाव में सब सबके साथ हैं और सब सबके साथ लड़ रहे हैं इस पर पूरी पीएचडी हो सकती है. जहां तक रुझान की बात करें तो अगर 227 में एक अलायंस को 67-68 सीटें पहले ही मिल चुकी हैं तो इसमें ज्यादा कुछ कहने की जरूरत नहीं है कि शुरुआती रुझान तो एकतरफा है और ये बीजेपी शिवसेना के पक्ष में है.
बता दें कि बीजेपी-शिवसेना अलायंस इस बीएमसी चुनाव में 67-68 सीटें बिना चुनाव लड़े जीत चुकी हैं.
वोट वाइव के अमिताभ तिवारी ने कहा कि मुंबई में 40 प्रतिशत लोग अपने कॉरपोरेटर का नाम तक नहीं जानते हैं. हमलोग सोचते थे कि दो ही पार्टी एक साथ नहीं आ सकती है, बीजपी और कांग्रेस लेकिन वो भी एक साथ आ गई है. ये हाइपर लोकल चुनाव प्रेशिडेंशियल स्टाइल का हो गया है. अगर आप पूरे महाराष्ट्र में देखे तो यूबीटी सेना को 10 प्रतिशत वोट मिला था. ठाकरे ब्रांड अभी जीवित है और इसलिए दोनों साथ हैं.
सीएसडीएस के को डायरेक्टर संजय कुमार ने कहा कि मुझे लगता है कि मुस्लिम मतदाताओं का वोट कांग्रेस से धीरे धीरे खिसक कर उद्धव ठाकरे की पार्टी के साथ चला गया है. कांग्रेस के साथ ये दोनों रहते तो ज्यादा ठीक रहता.
चर्चा के दौरान प्रदीप कुमार ने कहा कि मुंबई में ठाकरे ब्रदर्स का मिलन मायने रखता है. 25 साल एक लंबा अरसा होता है और मुंबई का नगर सेवक सबसे ज्यादा लोगों से जुड़ा होता है. सारे के सारे वार्ड में एम्बुलेंस शिवसेना की ब्रांडिंग के साथ खड़ी होती है. जहां तक बंबई औऱ ग्रेटर बंबई की बात करें तो लोकसभा की दोनों सीटें यूबीटी के पास है. तात्पर्य यह है कि अगर कांग्रेस भी ठाकरे ब्रदर्स के साथ होती तो फाइट बहुत टाइट होती. हालांकि ये वोटर टर्नआउट पर भी निर्भर करेगा. यदि वोटर टर्नआउट 50 प्रतिशत से नीचे चला जाता है तो स्थिति कुछ होगी. इसका मतलब यह है कि बीजेपी-शिवसेना कमजोर हो सकती है.
वोट वाइव के अमिताभ तिवारी ने कहा कि इस अगले कुछ दिनों महिलाओं के खाते में लाडली बहना की तीन किस्त जाने वाली है. महिलाओं का अच्छा समर्थन हम विधानसभा में देख ही चुके हैं. शिवसेना दो भागों में बंट गई है और हमारे सर्वे के अनुसार दोनों पार्ट को लगभग बराबर वोट मिल रहा है.
मुस्लिम वोटों पर उन्होंने कहा कि इस चुनाव में 41 फीसदी मुस्लिम वोट कांग्रेस को मिलता दिख रहा है और 28 फीसदी वोट ठाकरे ब्रदर्स को मिलता दिख रहा है. मुस्लिम समाज के मन में द्वंद है कि किसे वोट दें.
गैर मराठी वोटों को समझाते हुए उन्होंने कहा कि क्योंकि ठाकरे बंधुओं का एंटी गुजराती और एंटी उत्तर भारत एजेंडा रहा है इसलिए ये वोट महायुति के फेवर में जा रहा है. उन्होंने कहा कि स्लम में रहने वाले लोग ज्यादा संख्या में वोट करते हैं. जबकि बिल्डिंग में रहने वाले लोग कम संख्या में वोट करते हैं. इसलिए बीएमसी चुनाव में एनडीए आगे तो है लेकिन एनडीए को खतरा भी है. अभी के ट्रेंड में एनडीए आगे है. मिडिल क्लास को देवेंद्र फडणवीस अपील करते हैं लेकिन स्लम में रहने वाले लोगों की दूसरी चिंता है.
संजय कुमार ने कहा कि आज के दौर में सेफोलॉजिस्ट होना बड़ी चुनौती है. इसमें फंडिंग, सैंपल जैसी चीजें हैं, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती तटस्थता की कसौटी पर खरा उतरना है.
उन्होंने कहा कि बीएमसी चुनाव में मुस्लिम वोट ठाकरे ब्रदर्स के पक्ष जाएगा. क्योंकि उन्हें लगता है कि कांग्रेस इस पक्ष में नहीं है कि महायुति का मुकाबला कर पाए.
एक्सिस माय इंडिया के एमडी प्रदीप गुप्ता ने कहा कि कांग्रेस को राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में चीजें निर्धारित करनी है इसलिए वो इस चुनाव में ठाकरे ब्रदर्स के साथ नहीं गई. कांग्रेस मुसलमान और दलित को धीरे धीरे एक एक राज्यों में अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है. चाहे वो बिहार, बंगाल या फिर महाराष्ट्र क्यों न हो.
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