'जिस EVM से मैं चार बार जीती उस पर सवाल कैसे उठाऊं', बोलीं सुप्रिया सुले

मुंबई में आजतक के ‘मुंबई मंथन’ कार्यक्रम में एनसीपी शरद पवार गुट की सांसद सुप्रिया सुले ने बीएमसी और आगामी नगर निकाय चुनावों को लेकर कहा कि यह कार्यकर्ताओं के सम्मान और संघर्ष की लड़ाई है, लेकिन महाराष्ट्र में बने अलग-अलग और असामान्य गठबंधनों ने उन्हें चिंतित किया है. उन्होंने निर्विरोध चुनावों को बढ़ते परिवारवाद का नतीजा बताया और बीजेपी पर कांग्रेस व एनसीपी के नेताओं से भरे होने का आरोप लगाया.

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सुप्रिया सुले ने कहा कि राजनीति और परिवार अलग हैं, देश सेवा सर्वोपरि है. (Photo: ITG) सुप्रिया सुले ने कहा कि राजनीति और परिवार अलग हैं, देश सेवा सर्वोपरि है. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • मुंबई,
  • 08 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:18 PM IST

महाराष्ट्र में आगामी नगर निकाय चुनाव के बीच गुरुवार को मुंबई में 'मुंबई मंथन' का मंच सजा. आजतक के इस आयोजन में एनसीपी शरद पवार गुट की सांसद सुप्रिया सुले ने भी शिरकत की. उन्होंने बीएमसी चुनाव, गठबंधन, परिवारवाद, अजित पवार, वन नेशन वन इलेक्शन और ईवीएम समेत कई मुद्दों पर खुलकर बात की.

बीएमसी चुनाव पर क्या बोलीं सुप्रिया सुले

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सुप्रिया सुले ने कहा कि बीएमसी चुनाव कार्यकर्ताओं के लिए बहुत बड़ा होता है. जो कार्यकर्ता हमारे लिए लड़ता है, अब उसके लिए लड़ने का वक्त है. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र जैसे गठबंधन देश में पहले कभी नहीं देखे गए. उन्होंने कहा कि ऐसी राजनीति देखकर उन्हें महाराष्ट्र की चिंता होती है.

उन्होंने कहा कि इस बार दो ऐसी बातें हुई हैं जो पहले कभी नहीं हुईं. हर शहर में अलग गठबंधन बना है. दूसरी और ज्यादा चिंताजनक बात बिन विरोध (निर्विरोध) चुनाव हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में जो भी बिन विरोध चुने गए हैं, वे सभी परिवारवाद से जुड़े हैं.

'कांग्रेस, एनसीपी के नेताओं से भरी पड़ी है बीजेपी'

सुप्रिया सुले ने कहा कि हाल के नगर पंचायत चुनावों में 22 लोग बिन विरोध चुने गए. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जैसे लोकप्रिय नेता के खिलाफ भी कोई न कोई चुनाव लड़ता है, लेकिन महाराष्ट्र में 22-23 ऐसे लोग हैं जिनके खिलाफ खड़ा होने को भी कोई तैयार नहीं है.

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उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस मुक्त भारत की बात करने वाली बीजेपी आज कांग्रेस और एनसीपी के नेताओं से भरी पड़ी है. बिन विरोध जीतने वाले सभी लोग परिवारवाद से आए हैं, जबकि संघर्ष करने वाला कार्यकर्ता कहीं नजर नहीं आता.

अजित पवार को लेकर क्या कहा?

अजित पवार से जुड़े सवाल पर सुप्रिया सुले ने कहा कि परिवार एक तरफ है और राजनीति दूसरी तरफ. उन्होंने साफ कहा कि उनके लिए देश पहले है, फिर राज्य, फिर पार्टी और उसके बाद परिवार. उन्होंने कहा कि उनकी राजनीति परिवार के लिए नहीं बल्कि देश सेवा और नीति निर्माण के लिए है.

'ईवीएम पर सवाल नहीं उठा सकती'

ईवीएम को लेकर पूछे गए सवाल पर सुप्रिया सुले ने कहा कि वह ईवीएम पर सवाल नहीं उठा सकतीं, क्योंकि वह खुद चार बार उसी से चुनाव जीत चुकी हैं. उन्होंने कहा कि कभी वोट बढ़ते हैं, कभी घटते हैं. लेकिन असली मुद्दा वोटर लिस्ट का है.

उन्होंने कहा कि अब तो एकनाथ शिंदे की पार्टी भी वोटर लिस्ट में गड़बड़ी की बात कर रही है. अगर वोटर लिस्ट में गड़बड़ी है तो एसआईआर जरूरी है, लेकिन यह समय रहते होनी चाहिए. उन्होंने सवाल उठाया कि जहां चुनाव होते हैं, वहीं एसआईआर क्यों की जाती है. अगर करनी है तो कश्मीर से कन्याकुमारी तक हर जगह होनी चाहिए.

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'गौतम अडानी को मैं 30 साल से जानती हूं'

गौतम अडानी से संबंधों पर सुप्रिया सुले ने कहा कि उनके पारिवारिक संबंध और राजनीति अलग हैं. उन्होंने कहा, 'मैं गौतम अडानी को 30 साल से जानती हूं. मैं पुरानी सोच की राजनीति करती हूं, जहां मतभेद हो सकते हैं लेकिन मनभेद नहीं.' उन्होंने कहा कि ठाकरे परिवार से उनके संबंध बचपन से हैं. राजनीति चलती रहती है, लेकिन पारिवारिक रिश्ते नहीं टूटते. उन्होंने यह भी कहा कि इंडिया गठबंधन किसी व्यक्ति पर नहीं बल्कि मुद्दों पर आधारित है.

क्या भविष्य में भी रहेगा अजित पवार से गठबंधन?

अजित पवार के साथ भविष्य के गठबंधन पर सुप्रिया सुले ने कहा कि फिलहाल इस पर कोई चर्चा नहीं है. उन्होंने बताया कि पुणे का एक तिहाई हिस्सा उनके निर्वाचन क्षेत्र में आता है और यह गठबंधन पुणे के विकास के लिए है. उन्होंने फिर दोहराया कि राजनीति अलग है और परिवार अलग.

'इस बार पवार परिवार ने दिवाली नहीं मनाई'

यह पूछे जाने पर कि क्या पहली बार पवार परिवार की दिवाली पार्टी में अजित पवार नहीं आए थे, सुप्रिया सुले ने कहा कि उस समय दो वजहें थीं. महाराष्ट्र में भारी बारिश हुई थी और किसानों की आत्महत्याओं के चलते राज्य में काली दिवाली थी. इसके अलावा उनकी चाची भारती पवार का निधन भी हुआ था. इसी कारण 2025 में पवार परिवार ने दिवाली नहीं मनाई.

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क्या संभव होगा 'वन नेशन वन इलेक्शन'?

वन नेशन वन इलेक्शन को लेकर सुप्रिया सुले ने कहा कि कोशिश जरूर हो रही है, लेकिन यह आसान नहीं है. उन्होंने कहा कि इतने सारे राज्य और इतने चुनाव हैं. यह देश किसी की मनमर्जी से नहीं, बल्कि संविधान से चलता है.

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