फिल्ममेकर करण जौहर की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए मुंबई सेशन कोर्ट ने सोमवार को यूट्यूबर अजय नागर उर्फ कैरीमिनाटी, टैलेंट मैनेजर दीपक चार और कुछ अन्य लोगों को करण जौहर के खिलाफ कथित मानहानिकारक सामग्री (defamatory content) को सोशल मीडिया पर पब्लिश या सर्कुलेट करने से रोक दिया है. प्रधान सत्र न्यायाधीश पी जी भोंसले की अदालत में यह याचिका करण जौहर की कंपनी धर्मा प्रोडक्शंस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अपूर्व मेहता की ओर से दायर की गई थी.
करण जौहर की ओर से पेश वकील प्रदीप गांधी और पराग खंडार ने दलील दी कि सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने यूट्यूब पर अपलोड किए गए वीडियो में करण जौहर के खिलाफ मानहानिकारक बयान दिए हैं. उन्होंने कहा कि ये बयान बेहद अश्लील और अपमानजनक हैं और इन्हें तुरंत हटाया जाना चाहिए.
'वीडियो हटाए जा चुके हैं, कोर्ट आने का आधार नहीं'
वहीं कैरीमिनाटी की ओर से पेश वकील विकास खेड़ा और अमित कुकरेजा ने कहा कि अजय नागर पहले ही वीडियो हटा चुके हैं, ऐसे में करण जौहर के पास अदालत आने का कोई आधार नहीं बचता. इस पर प्रदीप गांधी ने दलील दी कि भले ही प्रतिवादी ने वीडियो हटा दिए हों, लेकिन उन्हें लाखों लोग देख चुके हैं और कई लोग उन वीडियो के रील बनाकर दोबारा सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं. इसी आधार पर उन्होंने सभी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के खिलाफ अंतरिम आदेश पारित करने की मांग की.
अदालत ने क्या कहा?
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश भोंसले ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि अजय नागर और दीपक चार ने करण जौहर के खिलाफ मानहानिकारक बयान दिए और अश्लील भाषा का इस्तेमाल किया. अदालत ने कहा कि ऐसे वीडियो तुरंत हटाए जाने चाहिए और सोशल मीडिया पर इन्हें शेयर या रिशेयर करने वालों के खिलाफ निषेधाज्ञा जरूरी है.
कंटेंट क्रिएटर्स को लेकर कोर्ट का आदेश
अदालत ने करण जौहर की अंतरिम राहत याचिका पर अंतिम सुनवाई तक कंटेंट क्रिएटर्स और अन्य लोगों, जिनमें अज्ञात जॉन डो भी शामिल हैं, को करण जौहर के खिलाफ किसी भी अन्य मानहानिकारक सामग्री को पोस्ट या प्रसारित करने से अस्थायी रूप से रोक दिया है. साथ ही मेटा प्लेटफॉर्म्स को भी कथित आपत्तिजनक सामग्री से जुड़े वीडियो लिंक हटाने का निर्देश दिया गया है.
विद्या