शनि शिंगणापुर के इतिहास में पहली बार महिलाओं ने दही हांडी फोड़ी

इस मौके पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी पालन किया गया है. शनि शिंगणापुर के इतिहास में पहली बार दही हाड़ी की मटकी महिलाओं ने फोड़ी है. महिलाओं को शनि भगवान का दर्शन का अधिकार मिलने के बाद पहली बार संस्थान की ओर से इस दही हांडी उत्सव का आयोजन किया गया था.

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मंदिर प्रशासन की पहल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मंदिर प्रशासन की पहल

प्रियंका झा / पंकज खेळकर

  • मुंबई,
  • 26 अगस्त 2016,
  • अपडेटेड 3:16 AM IST

कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार देश भर में मनाया जा रहा है. चारों तरफ दही हांडी की धूम है. लेकिन शनि शिंगणापुर के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ जब मुंबई से आए गोरखनाथ महिला गोविंदा ने मटकी फोड़ी. मंदिर परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम को देखने के लिए गांववालों के साथ ही हजारों शनिभक्त मौजूद थे.

इस मौके पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी पालन किया गया है. शनि शिंगणापुर के इतिहास में पहली बार दही हाड़ी की मटकी महिलाओं ने फोड़ी है. महिलाओं को शनि भगवान का दर्शन का अधिकार मिलने के बाद पहली बार संस्थान की ओर से इस दही हांडी उत्सव का आयोजन किया गया था.

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महिला गोविंदाओं ने धूम मचाते हुए दो बार दही हांडी को सलामी दी, तीसरी बार शनि भगवान को सलामी दे कर मटकी फोड़ी. महिला गोविंदाओं का कहना है कि उन्हें मटकी फोड़ने का मौका मिला यह उनका सौभाग्य है. महिला राण रागिनी ब्रिगेड की अध्यक्षा तृप्ति देसाई ने इस उत्सव में महिलाओं द्वारा शनि शिंगणापुर में दही हांडी फोड़े जाने पर खुशी जाहिर की और कहा कि ये महिलाओं की एक और जीत है. क्योंकि जिस शिंगणापुर में महिलाओं को अपवित्र माना जाता था, उन्होंने आज मंदिर के परिसर में दही हांडी उत्सव मनाया. ये एक बहुत अच्छी शुरुआत है. सिर्फ उनके अकेले की नहीं बल्कि सभी महिलाओं के संघर्ष की जीत है.

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