लोकसभा चुनाव से पहले महाराष्ट्र में शीट शेयरिंग को लेकर महाविकास अघाड़ी में शामिल दलों में घमासान मचा हुआ है. राज्य में कांग्रेस को लगातार झटके लग रहे हैं. पहले मिलिंद देवड़ा ने पार्टी छोड़ी और फिर अशोक च्वहाण और फिर कांग्रेस नेता शिवराज पाटिल की बहू बीजेपी में शामिल हो गए और अब मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष संजय निरुपम भी पार्टी छोड़ने की तैयारी में हैं.
दरअसल संजय निरुपम कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में मुंबई उत्तर पश्चिम सीट पर चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन शिवसेना यूबीटी ने यहां से अमोल कीर्तिकर को अपना उम्मीदवार बना दिया जिससे निरुपम भड़क गए. निरुपम ने पहले भी सीट बंटवारे में कांग्रेस पर हावी होने के लिए शिवसेना यूबीटी की आलोचना की थी.
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पार्टी पर वाम विचार वाले लोग हावी- निरुपम
संजय निरुपम ने मुंबई में अपने समर्थकों के साथ बैठक भी की थी. बैठक में कांग्रेस के महाराष्ट्र प्रभारी रमेश चेन्निंथला के सामने मुंबई उत्तर पश्चिम सीट पर जोर नहीं देने के लिए विरोध प्रदर्शन भी किया था. उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से इस बात की गहराई से जांच करने को भी कहा था कि अशोक चव्हाण जैसे नेता कांग्रेस क्यों छोड़ रहे हैं. हाल ही में मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा था कि पार्टी अध्यक्ष पद से राहुल गांधी के इस्तीफे से पार्टी की स्थिति प्रभावित हुई थी और उन्होंने पार्टी पर वाम प्रभाव की भी आलोचना की थी.
उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं पर वामपंथी लोगों का भारी प्रभाव और दबाव है. कांग्रेस पार्टी में अब धर्मनिरपेक्षता बहुत ज्यादा बढ़ गई है. निरुपम ने INDIA ब्लॉक की भी आलोचना की थी. मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ ने संजय निरुपम का नाम लिए बिना कहा था कि निरुपम के विचार निजी हैं और उन्होंने पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर अपनी सीमाएं लांघी हैं. संजय निरुपम गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बड़ा फैसला ले सकते हैं.
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पहले भी जता चुके हैं नाराजगी
कुछ समय पहले भी उन्होंने अपनी ही पार्टी को निशाने पर लिया था. तब निरुपम ने कहा था, 'कांग्रेस नेतृत्व ने कई दिनों से मुझसे बात तक नही की. मुझसे पूछा तक नहीं गया.कांग्रेस देश मे न्याय की बात करती है लेकिन अपने लोगों पर ही ध्यान नहीं देती है.मैं अपने क्षेत्र में कई सालों से काम कर रहा हूं. लेकिन शीर्ष नेतृत्व ने संज्ञान नहीं लिया और शिवसेना के सामने झुक गई. मैं अपने नेतृत्व को 1 हफ्ते का समय देता हूं, अगर फैसला नहीं लिया जाता है तो हफ्ते भर के अंदर मैं अपना स्वतंत्र निर्णय लूंगा और लड़ाई अब आर-पार की होगी. जिस तरह से कांग्रेस की सीटों को छीना गया है और कांग्रेस के लोग अलग हुए इसमें शिवसेना (यूबीटी) का छुपा मकसद कांग्रेस को खत्म करना हो सकता है.'
साहिल जोशी