देश में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) लागू होने के बाद पूरे देश में इसके खिलाफ प्रदर्शन चल रहे हैं. केरल, राजस्थान और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों की विधानसभा से इस कानून के खिलाफ प्रस्ताव पारित हो चुके हैं. वहीं अब एक गांव से भी सीएए और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ प्रस्ताव पारित किए जाने की खबर है.
बताया जाता है कि महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के इस्लाक गांव में गणतंत्र दिवस के दिन 26 जनवरी को हुई ग्राम पंचायत की बैठक में सीएए और एनआरसी के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया गया. इस प्रस्ताव पर सरपंच और उप सरपंच ने हस्ताक्षर किए, जिसके बाद इसे जिला प्रशासन को भेज दिया गया. अहमदनगर शहर के करीब स्थित इस गांव की आबादी लगभग दो हजार है. हालांकि यहां मुस्लिम आबादी शून्य है.
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इस संबंध में गांव के सरपंच बाबासाहेब गोरांगे ने कहा कि गांव की अधिकांश आबादी मध्यम वर्ग के, छोटे किसान हैं. काफी लोगों के पास अपनी जमीन नहीं है, और ना ही कोई पुराना कागजात ही है जिससे ये अपनी नागरिकता सिद्ध कर सकें. उन्होंने कहा कि पीढ़ियों पहले से रह रही ऐसे लोगों की आबादी के लिए नागरिकता साबित करना लगभग नामुमकिन है. सरपंच ने गांव में मुस्लिम आबादी शून्य बताते हुए कहा कि यह प्रस्ताव पूरी तरह से मानवीय आधार पर पारित किया गया है.
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खुद भी छोटे किसान सरपंच गोरांगे ने बताया कि दस्तावेजों के अभाव में गांव की बड़ी आबादी सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने से वंचित रह जाती है. गणतंत्र दिवस के दिन हुई ग्राम सभा की बैठक के दौरान ग्राम पंचायत के सदस्य ने ग्रामीणों को यह कानून लागू किए जाने पर होने वाली समस्याएं बताईं. इसके बाद इस पर चर्चा हुई और फिर एनआरसी के साथ ही राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) लागू किए जाने पर असहयोग का प्रस्ताव पारित किया गया.
(अहमदनगर से इसरार चिश्ती के इनपुट के साथ)
पंकज खेळकर