महाराष्ट्र के ठाणे जिले की अंबरनाथ नगर परिषद की राजनीति में एक बार फिर बड़ा मोड़ आ गया है. शुक्रवार को एकनाथ शिंदे की शिवसेना, अजित पवार गुट की एनसीपी और एक निर्दलीय पार्षद ने मिलकर नगर परिषद की सत्ता पर दावा ठोक दिया है, जिससे बीजेपी को सत्ता से दूर रखने की कोशिश की जा रही है.
बीजेपी के लिए बड़ा झटका
शिवसेना के एक वरिष्ठ स्थानीय नेता ने बताया कि शिवसेना, एनसीपी और एक निर्दलीय पार्षद ने साथ आने का फैसला किया है और इस नए गठबंधन की जानकारी जिला प्रशासन को लिखित रूप में दे दी गई है. यह घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है, जब हाल ही में कांग्रेस के निलंबित 12 पार्षद बीजेपी में शामिल हुए थे.
हालांकि शिवसेना और एनसीपी, दोनों राज्य में बीजेपी के साथ महायुति सरकार का हिस्सा हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर यह गठजोड़ बीजेपी की योजनाओं के लिए झटका माना जा रहा है. एनसीपी के एक नेता ने भी इस गठबंधन की पुष्टि की है.
अंबरनाथ में कांग्रेस-बीजेपी ने मिला लिया था हाथ
दरअसल, 20 दिसंबर को हुए नगर परिषद चुनाव के बाद बीजेपी की स्थानीय इकाई ने कांग्रेस के साथ मिलकर ‘अंबरनाथ विकास आघाड़ी’ बनाई थी और नगर परिषद की सत्ता हासिल की. इस गठबंधन में बीजेपी ने अपने सहयोगी दल शिवसेना को किनारे कर दिया था, जबकि शिवसेना ही सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. इस आघाड़ी में अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी भी शामिल थी, जो राज्य सरकार में बीजेपी की सहयोगी है.
60 सदस्यीय अंबरनाथ नगर परिषद में अंबरनाथ विकास आघाड़ी (AVA) को 31 सीटों का बहुमत मिला था. चुनाव में शिवसेना ने 27 सीटें जीतीं, बीजेपी को 14, कांग्रेस को 12, एनसीपी को 4 सीटें मिलीं, जबकि 2 निर्दलीय पार्षद भी चुने गए. एक निर्दलीय के समर्थन से इस तीन दलों के गठबंधन की संख्या बढ़कर 32 हो गई, हालांकि नगर परिषद के अध्यक्ष बीजेपी से हैं.
इस अप्रत्याशित गठबंधन से कांग्रेस असहज हो गई और उसने बुधवार को अपने 12 पार्षदों और एक ब्लॉक अध्यक्ष को निलंबित कर दिया. ताजा घटनाक्रम में शिवसेना, एनसीपी और एक निर्दलीय पार्षद के गठजोड़ के पास भी कुल 32 सदस्यों का समर्थन हो गया है.
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