महाराष्ट्र की राजनीति में अजित पवार के विमान हादसे को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. एनसीपी नेता (शरद गुट) रोहित पवार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस हादसे को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं और आशंका जताई है कि यह केवल दुर्घटना नहीं बल्कि साजिश भी हो सकती है. रोहित पवार ने कहा कि पूरे महाराष्ट्र में लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि अजित पवार का विमान हादसा वास्तव में दुर्घटना था या इसके पीछे कोई साजिश थी.
उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि कई लोगों को अब भी विश्वास नहीं हो रहा कि अजित पवार अब इस दुनिया में नहीं हैं. उन्होंने बताया कि हादसे के बाद अजित पवार का जला हुआ स्वेटर, घड़ी और चप्पल मिली थीं, जिसे देखकर हर कोई भावुक हो गया.
उन्होंने कहा कि ग्रुप में शाम 7:13 बजे एक मैसेज भेजा गया, जिसमें कहा गया कि कल सुबह 8:00 बजे बारामती जाना है. दादा ने कार से जाने का फैसला किया था, सभी कारें सड़क से यात्रा के लिए तैयार थीं. उनकी यात्रा की योजना एक दिन पहले ही बनाई गई थी. यह आखिरी समय का फैसला था.
पवार ने इजरायल के मोसाद पर आधारित एक किताब की लाइन का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि ये लाइन थी, 'कभी-कभी ड्राइवर को मार देना सबसे असरदार होता है' और बस हो गया.
उड़ान और हादसे को लेकर सवाल
रोहित पवार ने दावा किया कि विमान के उड़ान से पहले कई संदिग्ध बातें सामने आई हैं. उन्होंने बताया कि सुबह 7:02 बजे क्रू मौजूद था, 7:03 बजे विजिबिलिटी चेक की गई, 7:10 बजे सब कुछ ठीक बताया गया, 7:50 बजे अजित पवार एयरपोर्ट पहुंचे और 8:10 बजे विमान ने उड़ान भरी.
काफिला बारामती जाने के लिए उनके बंगले के बाहर तैयार था, एक सीनियर लीडर उनसे मिलने आ रहे थे जो देर से आए और वह सड़क से यात्रा नहीं कर सके और उन्हें फ्लाइट बुक करने के लिए मजबूर होना पड़ा. उन्हें विदर्भ की एक फाइल पर साइन करना था, वह मंत्रालय में थे, इसलिए उन्होंने बारामती जाने के लिए देर तक इंतजार किया. प्लेन का समय सुबह 7:00 बजे था, यह सुबह 8:10 बजे क्यों निकला, फ्लाइट के टेक ऑफ में देरी के लिए कौन जिम्मेदार था?
उन्होंने सवाल उठाया कि विमान हादसे से दो दिन पहले सूरत गया था और कंपनी ने इसे मेंटेन विमान बताया, लेकिन स्थानीय महिला ने कहा कि हादसे से पहले विमान की आवाज सामान्य से अलग थी. ग्राम पंचायत के सीसीटीवी में विमान को हवा में 360 डिग्री घूमते भी देखा गया.
तकनीकी खामियों और जांच पर सवाल
रोहित पवार ने पूछा कि क्या विमान की टेक्निकल जांच सही तरीके से हुई थी, टेकलॉग और एयरवर्दी रिपोर्ट कहां है, नियमित मेंटेनेंस क्यों नहीं हुआ और हैंगर के सीसीटीवी फुटेज कहां हैं. उन्होंने आशंका जताई कि सबूतों के साथ छेड़छाड़ हो सकती है और जांच पूरी तरह पारदर्शी नहीं है.
उन्होंने आरोप लगाया कि विमान कंपनी VSR को DGCA का संरक्षण मिल रहा है. उनका दावा है कि VSR के विमानों में कई बार कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर काम नहीं करते थे. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि दुर्घटना के समय ट्रांसपोंडर एक मिनट पहले बंद क्यों हो गया.
पायलट और उड़ान से जुड़े आरोप
रोहित पवार ने मुख्य पायलट कैप्टन सुमित कपूर की भूमिका पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में पायलट की चुप्पी संदिग्ध लगती है. उन्होंने दावा किया कि कैप्टन कपूर का नाम पहले भी ‘ड्रंक पायलट’ सूची में आ चुका है और कंपनी के डायरेक्टर द्वारा भेजे गए मैसेज में इसका जिक्र था. उन्होंने यह भी कहा कि उड़ान के लिए पहले दूसरे पायलट नियुक्त किए गए थे, जिन्हें आखिरी समय में बदला गया. साथ ही यह सवाल भी उठाया कि क्या पायलटों की ब्रेथ एनालाइजर जांच हुई थी या नहीं.
उन्होंने कहा कि एक मेल से पता चलता है कि कैप्टन साहिल मदान और कैप्टन यश को असाइन किया जाने वाला था, जिसे आखिरी समय में बदल दिया गया. सुमित कपूर के नाम से एक वायरल फोटो इस्तेमाल की गई थी, जो साहिल मदान की थी, उनकी पत्नी ने इस पर कमेंट किया है. सुबह 7:02 बजे अधिकारी ने मैसेज भेजा कि सभी क्रू पहुंच गए हैं. असाइन किए गए पायलट वहां क्यों नहीं थे? क्या वे सच में ट्रैफिक में थे? क्या DGCA के पास उनका CDR है? क्या वे एयरपोर्ट या एयरपोर्ट के पास रह रहे थे.
DGCA की रिपोर्ट में 20+ सेकंड का फ़र्क है. क्रैश से एक मिनट पहले जानबूझकर ट्रांसपोंडर बंद कर दिया गया. ऐसी सिचुएशन में एक नॉर्मल आदमी आगे क्या होने वाला है, यह जानकर रिएक्ट करेगा या घबरा जाएगा, यह जानते हुए कि यह क्रैश होने वाला है, शांभवी पाठक (Co-Pilot) ने कहा 'ओह शिट ओह शिट', लेकिन मेन पायलट (कपूर) ने कुछ नहीं कहा, क्या वह सो रहे थे? क्या उनका प्लान फ्लाइट क्रैश करने का था? ओह शिट नॉर्मल रिएक्शन था? वह मेडे कहने की हालत में नहीं थी? भले ही कपूर के पास 16000 घंटे थे, उन्हें शायद लियरजेट में कम एक्सपीरियंस था, शांभवी को उनसे ज़्यादा लियरजेट का एक्सपीरियंस था, इसे क्रॉस चेक करने की जरूरत है.
रनवे और विजिबिलिटी पर भी सवाल
रोहित पवार ने बताया कि पहले रनवे-29 पर लैंडिंग की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन बाद में रनवे-11 की मांग की गई, जो अधिक कठिन माना जाता है. उन्होंने कहा कि DGCA के नियमों के अनुसार 5 किलोमीटर विजिबिलिटी जरूरी होती है, जबकि रिपोर्ट में हादसे के समय विजिबिलिटी केवल 3 किलोमीटर बताई गई.
रोहित पवार ने ARROW और VSR कंपनियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए और कहा कि कई राज्यों में वीवीआईपी उड़ानों के लिए इन्हीं कंपनियों का इस्तेमाल होता है. उन्होंने कहा कि उन्हें किसी खास नेता पर आरोप नहीं लगाना है, लेकिन कंपनियों और पायलट के इतिहास को देखते हुए जांच जरूरी है.
उन्होंने यह भी दावा किया कि जांच में देरी हो रही है और बड़े कॉरपोरेट दबाव के चलते जांच प्रभावित हो सकती है. रोहित पवार ने कहा कि ब्लैक बॉक्स की पूरी रिकॉर्डिंग सार्वजनिक की जानी चाहिए और सभी सीसीटीवी फुटेज की जांच होनी चाहिए.
शरद पवार के बयान पर प्रतिक्रिया
शरद पवार द्वारा हादसे को साजिश न मानने के बयान पर रोहित पवार ने कहा कि उन्होंने यह बयान हादसे के कुछ घंटों बाद दिया था, जबकि अब नए तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर सवाल उठ रहे हैं. रोहित ने कहा कि वे किसी पर सीधे आरोप नहीं लगा रहे हैं, लेकिन हादसे से जुड़े हर पहलू की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच जरूरी है ताकि सच्चाई सामने आ सके.
'दादा ने मुझसे अपना एयरक्राफ्ट खरीदने के लिए कहा'
रोहित पवार ने आगे कहा कि उन्होंने (अजित पवार) मुझसे किसी और हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल न करने के लिए कहा था, सिर्फ मेरे दोस्त के भरोसेमंद हेलीकॉप्टर का. वह अपना खुद का एयरक्राफ्ट चाहते थे. उन्होंने मुझे इसके बारे में बताया था, मुझे नहीं पता उन्होंने ऐसा क्यों कहा. हमें साज़िश का शक है, हर डिटेल शेयर की गई है, मुझे किसी खास नेता या किसी आदमी पर शक नहीं है. मैं VSR, ARROW कंपनी और कैप्टन सुमित कपूर पर सवाल उठा रहा हूं. हमें DGCA पर भरोसा है, सरकार पर हमारे कोई आरोप नहीं हैं, लेकिन हम सिर्फ अपने शक की बात कर रहे हैं, CID एयरपोर्ट में कैसे घुस सकती है?
इस दौरान रोहित पवार ने प्रफुल्ल पटेल की तरफ इशारा किया, जो लियरजेट्स की दो मेंटेनेंस कंपनियों में से एक के मालिक हैं. उन्होंने कहा कि इंडिया में सिर्फ दो कंपनियां एयरक्राफ्ट का MRO मेंटेनेंस रिपेयर ओवरहॉल करती हैं. एक दिल्ली में और एक मुंबई में, हमने सुना है कि मुंबई वाली कंपनी प्रफुल्ल पटेल की है. VSR ने अपनी इन-हाउस मेंटेनेंस कंपनी शुरू की है.
अभिजीत करंडे