MP: राजगढ़ की महिला कलेक्टर के कथित 'थप्पड़ प्रकरण' की जांच करेगी उच्चस्तरीय कमेटी

बद्रीलाल यादव की टिप्पणी पर राज्य आईएएस अधिकारी संघ ने सख्त आपत्ति का इजहार किया. इसके बाद यादव के खिलाफ आईपीसी की धारा 188 और 294 के तहत केस दर्ज किया गया.

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दो अधिकारी कथित घटना की करेंगे जांच दो अधिकारी कथित घटना की करेंगे जांच

हेमेंद्र शर्मा

  • भोपाल,
  • 12 फरवरी 2020,
  • अपडेटेड 1:29 PM IST

  • पहले दो अधिकारियों ने अपनी-अपनी जांच में दिए अलग अलग निष्कर्ष
  • CAA के समर्थन रैली के दौरान एक सब इंस्पेक्टर को तमाचा मारने का आरोप
मध्य प्रदेश सरकार ने राजगढ़ ज़िला कलेक्टर निधि निवेदिता से जुड़ी कथित घटना की जांच के लिए उच्चस्तरीय कमेटी बनाई है. उन पर 19 जनवरी को नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के समर्थन में हुई रैली के दौरान एक सब इंस्पेक्टर को तमाचा मारने का आरोप है. सब इंस्पेक्टर का नाम नरेश शर्मा बताया जा रहा है. अभी तक इस घटना का कोई वीडियो सामने नहीं आया है.

शहरी प्रशासन विभाग के प्रधान सचिव संजय दुबे और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक उपेंद्र जैन को कमेटी का सदस्य बनाया गया है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने इंडिया टुडे को बताया, 'दो अधिकारी कथित घटना की जांच करेंगे, वो संबंधित सभी पक्षों से बात करने के बाद एक हफ्ते में मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंपेंगे.'

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बता दें कि राजगढ़ जिला कलेक्टर निधि निवेदिता को बीजेपी नेताओं को तमाचा जड़ने के कुछ वीडियो सामने आए थे. ये नेता 19 जनवरी को CAA के लिए समर्थन जुटाने में लगे थे. बीजेपी ने इस पूरे घटनाक्रम के विरोध में राजगढ़ में 23 जनवरी को रैली का आयोजन किया था. इसी रैली के दौरान पूर्व बीजेपी विधायक बद्रीलाल यादव ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में जिला कलेक्टर निधि निवेदिता के ख़िलाफ़ अशोभनीय टिप्पणी की थी. 

यादव की टिप्पणी पर राज्य आईएएस अधिकारी संघ ने सख्त आपत्ति का इजहार किया. इसके बाद यादव के खिलाफ आईपीसी की धारा 188 और 294 के तहत केस दर्ज किया गया.

इस मामले ने तब नया मोड़ ले लिया जब राज्य के डीजीपी वी के सिंह ने प्रदेश के गृह विभाग को एसडीएम सौम्या सिंह की ओर से की गई जांच रिपोर्ट सौंपी. सौम्या सिंह ने अपनी जांच में कहा कि जिला कलेक्टर ने सब इंस्पेक्टर नरेश शर्मा को तमाचा मारा और शर्मा ने पूरे घटनाक्रम के खिलाफ लिखित शिकायत दी है.

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शीर्ष सरकारी सूत्रों के मुताबिक दो अलग अधिकारियों की ओर से अलग-अलग जांच में विरोधाभासी निष्कर्ष दिए जाने की वजह से उच्चस्तरीय जांच कमेटी बनाई गई. ऐसा भी कहा जा रहा है मुख्यमंत्री कमलनाथ डीजीपी की ओर से गृह विभाग को रिपोर्ट भेजे जाने से नाखुश हैं.

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